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इसरो ने चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से संपर्क करने की कोशिश में अभी भी लगा हुआ है। बता दें कि पिछले महीने चंद्रमा की सतह पर 'सॉफ्ट लैंडिंग' की कोशिश के दौरान 'चंद्रयान-2' के लैंडर 'विक्रम' से संपर्क टूट गया था, लेकिन इसरो उससे संपर्क करने की कोशिशें अभी छोड़ी नहीं हैं।

विक्रम की लैंडिंग आखिरी पलों में गड़बड़ हुई।  ये दिक्कत तब शुरू हुई जब विक्रम लैंडर चांद की सतह से मात्र 2.1 किलोमीटर ऊपर था।  अब वैज्ञानिक विक्रम लैंडर के उतरने के रास्ते का विश्लेषण कर रहे हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक हर सब-सिस्टम के परफॉर्मेंस डाटा में कुछ राज छिपा हो सकता है।  यहां लिक्विड इंजन का जिक्र बेहद अहम है।  विक्रम लैंडर की लैंडिंग में इसका अहम रोल रहा है।

चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का चांद की सतह से करीब 2 किमी पहले ही इसरो से संपर्क टूट गया। हालांकि उम्मीदें अभी कायम हैं। इसरो के वैज्ञानिकों ने अब भी हिम्मत नहीं हारी है और उनका हौसला बुलंद है।

भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 की असफल हो गया तो पूरा देश भावुक हो गया। लैंडर विक्रम का शुक्रवार यानी 6 सितंबर की देर रात चांद की सतह से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर संपर्क टूट गया। सालों से मेहनत कर रही वैज्ञानिक मायूस हो गए जिसमें इसरो के चीफ के. सिवन भी शामिल थे।

नई दिल्ली : प्रख्यात वैज्ञानिक के. सिवन बुधवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुंसधान संगठन (इसरो) के नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए। तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के वर्तमान निदेशक सिवन, ए.एस. किरन कुमार की जगह लेंगे। उनका कार्यकाल तीन वर्षो का होगा। यह के सिवन ही थे कि इसरो ने एक ही मिशन में 104 उपग्रह …