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देश भर में लोकसभा चुनाव का माहौल अपने चरम पर है। नेता जीत के लिए पूरी ताकत झोंके हुए हैं। प्रचार जोर शोर से चल रहा है। लेकिन मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ लोकसभा सीट के प्रत्याशियों को समझ में नहीं आ रहा है कि वो कैसे 1 करोड़ 5 लाख वोटर्स तक अपनी बात पहुंचाए।

बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) रह चुके नायक ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों का राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं रह गया है और इसलिए सभी मतदान केंद्रों पर केंद्रीय बलों की तैनाती की उनकी मांग बढ़ गई है।

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान हो चुका है। इसके बाद से केंद्र की सत्ता पर काबिज बीजेपी के नेताओं में उत्साह नजर आने लगा है। राज्य बीजेपी के नेता दावा करते हैं कि राज्य की सभी 42 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस को उनकी पार्टी बराबर की टक्कर दे रही है।

आज हम आपको बताएंगे  कोलकाता उत्तर लोकसभा सीट के बारे में, मौजूदा सांसद तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय हैं। 2014 के चुनाव में 535,236 पुरुष और 420,542 महिलाओं ने वोट डाले। कुल 955,778 वोट पड़े।

वाम मोर्चे ने 34 वर्षों तक पश्चिम बंगाल पर निर्विरोध शासन किया और फिर आया 2011 जिसमें उसे ऐसी हार मिली की अभी भी वो सदमें से उबर नहीं पाया है। हमारी जानकारी के मुताबिक एक बार फिर इस चुनाव में वाम मोर्चा का प्रदर्शन बेहद खराब रहने वाला है।

सूबे में भले ही सपा-बसपा गठबंधन जोरदार तरीके से चुनावी मैदान में शक्ति प्रदर्शन में लगा हो। लेकिन 11 लोकसभा सीटें ऐसी भी हैं, जहां पिछले दो दशकों में सपा- बसपा को जीत नसीब नहीं हुई है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी 15 अप्रैल को संसदीय क्षेत्र फतेहपुर सीकरी, जनपद आगरा के बाह विधानसभा क्षेत्र के जरार में आयोजित जनसभा को संबोधित करेंगे। फतेहपुर सीकरी से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर चुनाव लड़ रहे हैं।

18 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान होना है। इस चरण में मतदाताओं को सूझबूझ से मतदान करना होगा, ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें आपराधिक चरित्र वाले उम्मीदवारों की भरमार है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस चरण में कुल 1,590 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनमें से 251 यानी 16% के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।

इस लोकसभा चुनाव में दलों के लिए हर एक सीट जरुरी है। इसी नीति पर काम करते हुए बिहार में कई राजनीतिक दलों के अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष मैदान में हैं। परिणामों के बाद इन नेताओं के साथ ही इनके दलों का भविष्य भी तय होगा।

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) ने लोकसभा चुनाव के लिए अभी तक करीब 1700 बसें निर्वाचन आयोग को किराए पर भेजी हैं। इसलिए इन बसों के खाली हुए कंडक्टरों (परिचालकों) के जल्द समायोजन की तैयारी चल रही है।