lord vishnu

हर साल में कुल 24 एकादशी व्रत आते हैं और अधिकमास में 26 एकादशी व्रत होते हैं। भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने के लिए लोग एकादशी का व्रत रखते हैं। इस बार 2 जून, मंगलवार को ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है जिसे निर्जला एकादशी के रूप में मनाया जाना हैं। निर्जला एकादशी का व्रत साल की सभी एकादशी का फल दिलाता हैं। इस व्रत को करने से व्यक्ति को कष्टों से मुक्ति मिलती है और उसके सभी पाप धुल जाते हैं।

हिंदू धर्म में  हर मास को भगवान से जोड़कर देखा गया है और उसी के अनुसार काम किए जाते हैं। इसकी के अनुसार अभी चल रहा वैशाख मास  जो 7 मई तक रहेगा। इन दिनों में भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है।

पौष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी का पावन व्रत रखा जाता है। श्री हरि भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है।

दिन की शुरुआत चाहते हैं शुभ और सफलतादायक हो तो बिस्तर से उठते ही अपने दोनों हाथों को आपस में रगड़ कर चेहरे पर लगाएं। बिस्तर से उठते ही अपने दोनों हाथों को आपस में रगड़ कर चेहरे पर लगाएं और दिए गए 3 मंत्रों में से किसी भी 1 मंत्र को हर दिन बोलें। आपको हर काम में सफलता मिलने लगेगी। 

दिन की शुरुआत चाहते हैं शुभ और सफलतादायक हो तो बिस्तर से उठते ही अपने दोनों हाथों को आपस में रगड़ कर चेहरे पर लगाएं। बिस्तर से उठते ही अपने दोनों हाथों को आपस में रगड़ कर चेहरे पर लगाएं और दिए गए 3 मंत्रों में से किसी भी 1 मंत्र को हर दिन बोलें।

भगवान विष्णु को संसार का पालनहार कहा जाता है। विष्णुपुराण के अनुसार जब दुनिया खतरे में होती है तो बुरी शक्तियों से संसार को बचाने के लिए भगवान विष्णु पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। 12 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा है।

कार्तिक मास का व्रत करने वालों को चाहिए कि वह तपस्वियों के समान व्यवहार करें अर्थात कम बोले, किसी की निंदा या विवाद न करें, मन पर संयम रखें आदि।

जयपुर:पौष मास में शुक्ल पक्ष एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते हैं।माना जाता है कि इस एकादशी के व्रत के समान दूसरा कोई व्रत नहीं है। जिन्हें संतान होने में बाधाएं आती हैं उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। इस उपवास को रखने से संतान संबंधी हर चिंता और समस्या का निवारण हो जाता …

जयपुर: शास्त्रों में एकादशी का बड़ा महत्व है इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा कर उन्हें प्रसन्न किया जाता है। दिवाली से पहले कार्त‌िक कृष्‍ण एकादशी का बड़ा महत्व है क्योंकि यह चतुर्मास की अंत‌िम एकदशी है। भगवान व‌िष्‍णु की पत्नी देवी लक्ष्मी ज‌िनका एक नाम रमा भी हैं उन्हें यह एकादशी …

जयपुर: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष, रविवार 23 सितंबर को अनन्त चतुर्दशी है। अनंत, जिसका न आदि का पता है और न ही अंत का अर्थात श्री हरि। इस व्रत में स्नानादि करने के पश्चात अक्षत, दूर्वा, शुद्ध रेशम या कपास के सूत से बने और हल्दी से रंगे हुई चौदह गांठ के अनंत को सामने …