Solar Eclipse

रविवार 21 जून को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग चुका है। जो नौ बजकर 15 मिनट से शुरू हुआ, जो कि दोपहर 3 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। बता दें कि यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण है, जिसमें सूरज एक चमकीले छल्ले की भांति दिखाई देता है।

इस साल का पहला और आखिरी सूर्यग्रहण रविवार को लगा। इसके बाद अगला सूर्यग्रहण 25 अक्टूबर 2022 को भारत में दिखेगा।

बस कुछ देर में  सूर्य ग्रहण लग जाएगा। इस दौरान हम लोग सूतक में है सूर्य ग्रहण में स्नान दान पूण्य और जाप ध्यान का बड़ा महत्व है। इसलिए ग्रहण की समाप्ति पर स्नान के बाद दान की परंपरा है। मान्यता है कि ग्रहण के पश्चात दान करने से व्यक्ति को आरोग्य की प्राप्ति होती है। इस दौरान किया गया दान राहु, केतु और शनि के दोष का निवारण करता है। इस तरह के दान से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

अब आने वाली 21 जून को ग्रहण लग रहा है। यह सूर्य ग्रहण होगा। इसे धार्मिक दृष्टि से महत्‍वपूर्ण माना जा रहा है क्‍योंकि यह चंद्र ग्रहण के मात्र 16 दिन बाद लग रहा है जो भारत में खंडग्रास रूप में दिखाई देगा।  चंद्र ग्रहण में सूतक मान्‍य नहीं था लेकिन सूर्य ग्रहण में सूतक का काल मान्‍य होगा। इसकी अवधि 12 घंटे पहले से ही लग जाएगी।

सूर्यग्रहण का सूतक, स्पर्श के चार प्रहर पूर्व अर्थात 12 घण्टे पूर्व अर्थात 20 जून रात्रि 10:15 से माना जाएगा। ग्रहण सूतक प्राम्भ के पश्चात, रखे गये पके हुए भोज्य पदार्थ का इस्तेमाल बाद में भी वर्जित है।

साल का पहला सूर्य ग्रहण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ये सूर्य ग्रहण धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोणों से काफी माहत्वपूर्ण माना जा रहा है।

1 जून, रविवार को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण साल का पहला सूर्य ग्रहण है। यह सूर्य ग्रहण कई मायनों में इस बार खास। ज्योतिषाचार्यों और वैज्ञानिकों के अनुसार यह ग्रहण आषाढ़ अमावस्या, 21 जून को वलयाकार यानी फायर रिंग के रूप में दिखेगा। कुछ विद्वान इसे चूड़ामणि का भी नाम दे रहे हैं। माना जा है कि

आषाढ़ मास की अमावस्या, दिन रविवार सूर्य लग्न, मिथुन राशि और मृगशिरा नक्षत्र के चौथे चरण में सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। इस पंचांग को 21 जून 2020 की तारीख रहेगी।

21 जून यानी रविवार को साल 2020 का पहला सूर्य ग्रहण  होगा। इस बार साल के सबसे बड़े दिन 21 जून को दुर्लभ खगोलीय घटना होगी। रविवार आषाढ़ अमावस्या को वलयाकार सूर्य ग्रहण लगेगा। इसे कंकणाकार ग्रहण भी कहते हैं। यह सूर्य ग्रहण देश के कुछ भागों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा।

इस ग्रहण का प्रकोप कम करने के लिए ग्रहण काल के दौरान भगवान शिव की चालीसा का पाठ करें और ऊं नम: शिवाय के मंत्रों का जाप करें।