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देश का पहला एनकाउंटर: यहां हुई थी मुठभेड़, इस माफिया के खिलाफ बड़ा एक्शन

अगर देश में हुए पहले एनकाउंटर की बात करें तो उसका श्रेय मुंबई पुलिस को जाता है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुंबई में देश का पहला एनकाउंटर हुआ था।

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ShreyaBy Shreya

Published on 10 July 2020 8:05 AM GMT

देश का पहला एनकाउंटर: यहां हुई थी मुठभेड़, इस माफिया के खिलाफ बड़ा एक्शन
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कानपुर: शुक्रवार सुबह उत्तर प्रदेश के मोस्ट वॉन्टेड क्रिमिनल और कानपुर एनकाउंटर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मुख्य आरोपी विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। यूपी एसटीएफ की टीम उसे उज्जैन से लेकर कानपुर नगरी जा रही थी। तभी पुलिस की गाड़ी पलट गई और इस मौके का फायदा उठाकर विकास दुबे वहां से भागने की कोशिश करने लगा। पुलिस द्वारा आत्मसमर्पण की बात कहे जाने पर उसने पुलिस की टीम पर फायरिंग कर दी। जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उसे मार गिराया।

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मुंबई में हुआ था देश का पहला एनकाउंटर

वहीं अगर देश में हुए पहले एनकाउंटर की बात करें तो उसका श्रेय मुंबई पुलिस को जाता है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुंबई में देश का पहला एनकाउंटर हुआ था। तो चलिए जानते हैं कि मुंबई पुलिस द्वार इस मुठभेड़ में कौन सा माफिया कब मारा गया था।

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देश में कब हुआ था पहला एनकाउंटर?

आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई पुलिस की डिटेक्शन यूनिट ने 11 जनवरी 1982 को मुंबई में पहला एनकाउंटर किया था। इसे देश का भी पहला एनकाउंटर कहा जाता है। मुंबई पुलिस की इस टीम ने मुंबई के वडाला कॉलेज में यह एनकाउंटर किया था। इस एनकाउंटर में गैंगस्टर मान्या सुर्वे को मुंबई पुलिस द्वारा ढेर कर दिया गया था। मान्या सुर्वे को छह गोलियां मारी गई थीं। इस मुठभेड़ की काफी चर्चा भी हुई थी।

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मुंबई पुलिस की डिटेक्शन यूनिट को जाता है श्रेय

कहा जाता है कि आजादी मिलने के बाद यह देश और मुंबई का पहला एनकाउंटर था। यहीं नहीं इस घटना पर फिल्म भी बन चुकी है। वहीं अगर बात करें मुंबई पुलिस की डिटेक्शन यूनिट की तो इसे मुंबई में बढ़ते गैंग वार और अंडरवर्ल्ड के अपराधों को देखते हुए 1980 के दशक में गठित किया गया था। जिसे एनकाउंटर स्कवैड भी कहा जाता था। इस यूनिट को डी कंपनी, अरुन गवाली और अमर नाइक गैंग पर शिकंजा कसने के लिए बनाया गया था।

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कब होता है मुठभेड़ शब्द का इस्तेमाल?

बता दें कि पुलिस या सशस्त्र बल द्वारा एनकाउंटर या मुठभेड़ का शब्द का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब किसी माफिया या गैंगस्टर द्वारा पुलिस बल या अन्य पर अटैक कर दिया जाता है। ऐसे में सेल्फ डिफेंस के लिए पुलिस माफिया बदमाशों या फिर आतंकवादियों से मुठभेड़ करती है।

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