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ठेकेदार की आत्महत्या के मामले में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई

वाराणसी मे पीडब्लूडी ठेकेदार की आत्महत्या के मामले में योगी सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पांच इंजीनियरों के अलावा दो अन्य कर्मचारियों को निलम्बित कर दिया है। साथ ही प्रशासनिक आधार पर अम्बिका सिंह, मुख्य अभियन्ता, वाराणसी को प्रमुख अभियन्ता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष कार्यालय से सम्बद्ध किया गया है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 2 Sep 2019 4:30 PM GMT

ठेकेदार की आत्महत्या के मामले में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
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लखनऊ: वाराणसी मे पीडब्लूडी ठेकेदार की आत्महत्या के मामले में योगी सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए पांच इंजीनियरों के अलावा दो अन्य कर्मचारियों को निलम्बित कर दिया है। साथ ही प्रशासनिक आधार पर अम्बिका सिंह, मुख्य अभियन्ता, वाराणसी को प्रमुख अभियन्ता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष कार्यालय से सम्बद्ध किया गया है।

उल्लेखनीय है कि इस आत्महत्या को लेकर राजनीतिक क्षेत्र में काफी हो हल्ला मचने के बाद शासन ने लोकनिर्माण विभाग के सचिव समीर वर्मा की देखरेख में एक कमेटी का गठन कर इस मामले में रिपोर्ट देने को कहा था। इस कमेटी का गठन गत 28 अगस्त को किया गया था जिसने तीन दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी।

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रिपोर्ट में जांच समिति द्वारा उपलब्ध करायी गयी जांच आख्या के आधार पर आशुतोष कुमार सिंह, सहायक अभियन्ता मनोज कुमार सिंह, अवर अभियन्ता यूएस पाण्डेय, अवर अभियन्ता मोनू राम मौर्य, वरिष्ठ सहायक (सम्प्रेक्षा लिपिक) रजत राय, वरिष्ठ सहायक (शिविर लिपिक) को निलम्बित कर दिया गया है।

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इनके अलावा दददन प्रसाद खण्डीय लेखाधिकारी के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करने के लिए महालेखाकार, प्रयागराज को प्रस्ताव भेजा गया है। साथ ही वित्तीय अनियमितताओं के लिए तत्कालीन अधिशासी अभियन्ता आरआर गंगवार,एवं सत्यदेव मिश्रा, सहायक अभियन्ता, को प्रथमदृष्टया दोषी पाये जाने के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है। साथ ही प्रशासनिक आधार पर अम्बिका सिंह, मुख्य अभियन्ता, वाराणसी को प्रमुख अभियन्ता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष कार्यालय से सम्बद्ध किये जाने का निर्णय लिया गया है।

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गौरतबल है कि वाराणसी के कैन्ट में स्थित पीडब्लूडी कार्यालय परिसर में बुधवार को चीफ इंजीनियर के कमरे में ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी। ठेकेदार ने सुसाइड नोट में उसने कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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इस घटना के बारे में कहा गया है कि कबीरचौरा महिला अस्पताल निर्माण का लगभग 20 करोड़ रुपये का ठेका था, जिसमें लगभग 90 फीसद तक कार्य हो चुका था। ठेकेदार का इसमें तीन से चार करोड़ रुपये इस समय बकाया था। ठेकेदार इसी रकम के भुगतान के लिए कई माह से मुख्य अभियंता कार्यालय का चक्कर काट रहा था। मगर मुख्य अभियंता भुगतान के लिए टाल मटोल कर रहे थे।

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