मायावती के भाई आंनद ने भूमि आवंटन घोटाले की ऐसे लिखी पटकथा

बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई आनंद ने नोएडा भू-आवंटन घोटाले की पटकथा वर्ष-2007 में सरकार गठन के साथ ही लिख दी थी। सेक्टर-94 में 95 एकड़ जमीन पर कैसे कब्जा किया जाए इसके लिए योजना बद्ध तरीके से काम को अंजाम दिया गया।

नोएडा: बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई आनंद ने नोएडा भू-आवंटन घोटाले की पटकथा वर्ष-2007 में सरकार गठन के साथ ही लिख दी थी। सेक्टर-94 में 95 एकड़ जमीन पर कैसे कब्जा किया जाए इसके लिए योजना बद्ध तरीके से काम को अंजाम दिया गया।

प्राधिकरण अधिकारियों से सांठगाठ कर 2007-08 के लिए वाणिज्यिक (बिल्डर प्लाट-2) योजना निकाली गई जिसकी तकनीकी बिड तीन मार्च 2008 को खोली गई और फाइनेंशियल बिड 11 मार्च 2008 को खोली गई। लेकिन इस जमीन का अलाटमेंट लेटर एक साल बाद छह फरवरी 2009 को बीपीटीपी लिमिटेड (कंर्सोटियम) के नाम जारी किया गया।

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सूत्रों के मुताबिक ताज्जुब की बात यह है कि शासन की ओर से जारी 6 जनवरी 2009 के जियो (01/77-4-09-142एन/08) के आधार पर 85 हजार 672.17 वर्गमीटर (11,15,51,16,239.91 रुपए) के सापेक्ष भूखंड को चार भूखंड में विखंडित किया गया जिसमें प्लाट नंबर-2 सेक्टर-94 बीपीटीपी लिमिटेड को आवंटित किया गया। वहीं, जब योजना के तहत तकनीकी बिड के बाद 11 मार्च 2008 को फाइनेंशियल बिड खोली गई तब बीपीटीपी को 38 हजार 765.20 वर्गमीटर जमीन मिलने की बात कहीं गई। इसकी लागत 5056987000.00 रुपए थी।

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अब सवाल खड़ा होता है कि योजना 2007-08 में निकाली जाती है। तकनीकी बिड 2008 में खुलती है और अलाटमेंट लेटर और अलाटमेंट लेटर एक साल पूरे होने के एक माह पहले मिलता है। ऐसे में योजना एक ही भूखंड 95 एकड़ की थी। अब एक साल में इस भूखंड को अपने मनमुताबिक कंपनियों को बेचने के लिए योजनाबद्ध तरीके से चार भागों में बांटा गया। ऐसे में बिडिंग प्रक्रिया पूरी हो गई थी तो इस भूखंड को चार खंडो में बांटने का प्रस्ताव किसने भेजा और बिना प्रस्ताव भेजे 6 जनवरी 2009 को जियो कैसे जारी किया गया? जियो क्या था? जिसका जिक्र अलाटमेंट लेटर में नहीं किया गया।

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ऐसे ही तमाम छोटे-छोटे बिंदुओं को जांच एजेंसी ने पकड़ा है। ऐसे में उस समय के तत्कालीन सीईओ से लेकर शासन स्तर पर जियो जारी करने वाले अधिकारी तक जांच एजेंसी की रडार पर आ चुके हैं। जिनकी कुंडली खुलने वाली है।

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नियमों को किया लचर सरकार को राजस्व हानि

प्लाट संख्या-2 जिसमें बीपीटीपी लिमिटेड (कंसोरटियम) को अलाट किया गया है। उसमें तत्कालीन अधिकारियों ने नियमों को इतना ज्यादा लचर किया कि भूखंड की लीज डीड महज 50 रुपए के स्टांप पर ही बनाने का नियम शामिल किया गया जिससे प्राधिकरण को राजस्व की भारी हानि हुई। वहीं इसी लचर नियम ने ही निबंधन विभाग को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान किया, क्योंकि इसी नियम के तहत सबलीज 100 रुपए के स्टांप पर की गई जबकि भूखंड की केवल एक ही विखंडित भूखंड संख्या-2, 5056987000.00 रुपए की थी। इसे 6 कंपनियों को सबलीज दिया गया है जिसे जांच एजेंसी 440 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति मान रही है।