रास के लिए भाजपा प्रत्याशी: खेल बाकी है अभी, नौवां पत्ता होगा ट्ंप कार्ड

यूपी की दस राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा ने आज अपने आठ उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। बहुजन समाज पार्टी के एक प्रत्याशी के आज नामांकन कराने के बाद भाजपा ने अपना नौंवा प्रत्याशी नहीं उतारा है।

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लखनऊ। यूपी की दस राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा ने आज अपने आठ उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। बहुजन समाज पार्टी के एक प्रत्याशी के आज नामांकन कराने के बाद भाजपा ने अपना नौंवा प्रत्याशी नहीं उतारा है।

घोषित किए गए उम्मीदवारों में निवर्तमान सदस्यों हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह  और नीरज शेखर को फिर से मौका दिया गया है। इनके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता हरद्वार दुबे, पूर्व डीजीपी बृजलाल, पूर्व विधायक सीमा द्विवेदी, बीएल वर्मा  गीता शाक्य  तथा नरेश बंसल को अपना उम्मीदवार बनाया है। हरदीप सिंह पुरी केन्द्र में मंत्री भी हैं। भाजपा के उम्मीदवारों में  दो ब्राम्हण, दो क्षत्रिय, दो पिछडी तथा एक दलित के अलावा एक वैश्य  को मौका दिया गया है। कुल आठ प्रत्याशियों  में दो महिलाओं को भी मौका दिया गया है।

कार्यकर्ताओं को एक संदेश देने का काम

सीमा द्विवेदी जौनपुर से तीन बार विधायक रह चुकी हैं पर पिछला विधानसभा चुनाव वह हार गयी थीं। भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष रहे बीएल वर्मा के नाम से भी लोग चौक गए  हैं क्योकि उनका कोई लम्बा पालिटिकल कैरियर भी नहीं है। साथ ही एक साधारण कार्यकर्ता गीता षाक्य को मौका देकर पार्टी ने  कार्यकर्ताओं को एक संदेश देने का काम किया है जो एक साधारण कार्यकर्ता रही हैं। नरेश बंसल उत्तराखंड भाजपा के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष रहे हैं।

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नौवां प्रत्याशी न उतारे जाने के बारे में कहा जा रहा है कि भाजपा एक सीट अपने सहयोगी अपना दल को भी दे सकती है। क्योंकि अपना दल राज्य सभा में पार्टी के प्रतिनिधित्व को लेेकर काफी दिनों से बेचैन है। यह भी संभावना है कि नामांकन के अंतिम समय पर भाजपा कल अपना नौंवा प्रत्याषी धोषित कर दे।

वोटों का गणित साधना एक बडी चुनौती

वैसे भाजपा अगर अपना प्रत्याशी भी उतारती है तो उसके लिए वोटों का गणित साधना एक बडी चुनौती होगी। एक तरफ अपना दल की नाराजगी झेलनी पडेगी जबकि दूसरी तरफ किसी अन्य दल से उसे समर्थन मिलने की भी उम्मीद नहीं है। भारतीय जनता पार्टी का एक और सदस्य तब ही जीत सकता है जब विपक्ष साझा प्रत्याशी न खड़ा करे। समीकरण यह है कि  कि न बहुजन समाज पार्टी और न ही कांग्रेस खुद के दम पर अपना प्रत्याशी जिता सकती है। विधानसभा में मौजूदा सदस्य संख्या के आधार पर जीत के लिए किसी भी प्रत्याशी को 36 वोटों की आवश्यकता होगी। बहुजन समाज पार्टी के विधायकों की संख्या वैसे तो 18 ही हैं, लेकिन इनमें भी मुख्तार अंसारी, अनिल सिंह सहित दो-तीन और के वोट उसे मिलने की उम्मीद नहीं है।

भाजपा के पास 304 विधायक

विधानसभा सदस्यों की संख्या के हिसाब से देखें तो, भाजपा के पास 304 विधायक हैं। उस हिसाब से 296 विधायकों के बल पर भाजपा के आठ प्रत्याशियों की जीत तय है। इसी तरह दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी के पास 48 विधायक हैं। उनकी पार्टी में घोषित प्रत्याशी प्रो रामगोपाल यादव की भी जीत तय है।

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भाजपा के बचे आठ विधायकों के अलावा नौ विधायक सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के पास हैं। इसके अलावा सपा के नितिन अग्रवाल, कांग्रेस के राकेश सिंह, अदिति सिंह और बसपा के अनिल सिंह भी भाजपा के साथ हैं। इस सब के बाद भी नौंवी सीट जीतने के लिए भाजपा को 16 विधायकों के वोटों की और जरूरत होगी। जिसकी उम्मीद फिलहाल कम ही दिखती है।

श्रीधर अग्निहोत्री

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