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...तो इसलिए हर साल CM योगी गोरक्षनाथ को चढ़ाते हैं 'खिचड़ी', वजह है बेहद दिलचस्प

मकर संक्रान्ति पर गोरखनाथ पीठ के महंत और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने इस पर्व की शुरुआत नेपाल के राजा की खिचड़ी चढ़ाकर की।

Shivani Awasthi

Shivani AwasthiBy Shivani Awasthi

Published on 15 Jan 2020 4:35 AM GMT

...तो इसलिए हर साल CM योगी गोरक्षनाथ को चढ़ाते हैं खिचड़ी, वजह है बेहद दिलचस्प
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गोरखपुर: आज पूरे भारत में मकर संक्रान्ति का पर्व बेहद उल्‍लास के साथ मनाया जा रहा है। गोरखनाथ पीठ के महंत और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ (CM Yogi) ने इस पर्व की शुरुआत नेपाल के राजा की ओर से भेजी गयी खिचड़ी चढ़ाकर की। इसके बाद पूरे एक माह तक यहां पर पूरे भारत से लोग आकर खिचड़ी चढ़ाएंगे। नाथ सम्‍प्रदाय के जनक गुरू गोरक्षनाथ (Gorakhnath Mandir) के हजारों भक्‍तों का काफिला हर रोज इस मंदिर में आकर खिचडी चढ़ाता है।

सीएम योगी ने खिचड़ी चढ़ा कर की पर्व की शुरुआत:

गोरखपुर जिले के गोरखनाथ मंदिर में बुधवार तड़के चार बजे से बाबा गोरक्षनाथ को खिचडी चढनी शुरू हो गई। मंदिर के महंत योगी आदित्‍यनाथ के द्वारा नेपाल के राजा की खिचडी चढाने के बाद शुरू हुआ खिचडी चढाने का सिलसिला अभी कई हफ्तों तक चलेगा।

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बाबा गोरखनाथ को खिचडी चढ़ाने के लिये दूर दूर से लोग इस समय गोरखनाथ मंदिर में आये हुये हैं। बाबा गोरखनाथ जी के दर्शन के लिए देश के कोने कोने से लोग आये हैं। सभी का मानना है, कि गुरु गोरखनाथ उनकी सभी मनोकामनाओं को पूरा करेंगे।

मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परम्परा पुरानी:

मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि त्रेता युग में सिद्ध गुरु गोरक्षनाथ भिक्षाटन करते हुए हिमांचल के कांगड़ा जिले के ज्वाला देवी मंदिर गए। यहां देवी प्रकट हुई और गुरु गोरक्षनाथ को भोजन का आमंत्रन दिया।

वहां तामसी भोजन देखकर गोरक्षनाथ ने कहा, 'मैं भिक्षाटन में मिले चावल-दाल को ही ग्रहण करता हूं।' इस पर ज्वाला देवी ने कहा, 'मैं चावल-दाल पकाने के लिए पानी गरम करती हूं, आप भिक्षाटन कर चावल -दाल लाइए।'

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गुरुगोरक्षनाथ यहां से भिक्षाटन करते हुए हिमालय की तराई स्थित गोरखपुर पहुंचे। उस समय इस इलाके में घने जंगल थे। यहां उन्होंने राप्ती और रोहिणी नदी के संगम पर एक मनोरम जगह पर अपना अक्षय भिक्षापात्र रखा और साधना में लीन हो गए। इस बीच खिचड़ी का पर्व आया, एक तेजस्वी योगी को साधनारत देख लोग उनके भिक्षापात्र में चावल-दाल डालने लगे, पर वह अक्षयपात्र भरा नहीं।

इसे सिद्ध योगी का चमत्कार मानकर लोग अभिभूत हो गए और उसी समय से गोरखपुर में गुरु गोरक्षनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई। इस दिन हर साल नेपाल-बिहार व पूर्वाचल के दूर-दराज इलाकों से श्रद्धालु गुरु गोरक्षनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने आते हैं और यह खिचड़ी मेला माह भर तक चलता है।

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