इतिहास के पन्नों मे दफन हो गया राजा सुजान सिंह गंधर्व का टीले के उपर बना किला

उस ऐतिहासिक टीले पर गांव के लोग अतिक्रमण कर रहे हैं वो टीला ग्रामीणों के लिये उपले व घास फुस रखने का साधन बन गया है। इस गांव के लोगो का कहना है कि गावं के प्रधान को चाहिए की जिले के डीएम से मिलकर इस जगह की पुरात्तव बिभाग द्वारा खुदाई कराये, ताकि इस टीले मे दफ्न सच्चाई बाहर आये।

रजनीश कुमार मिश्र

गाजीपुर: यहां के जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर की दुरी पर मौजूद एक छोटा सा गांव गन्धपा मे एक टीला मौजूद है। जिसे राजा सुजान सिंह गंधर्व का टीला कहां जाता है,वो टीला जो राजा सुजान सिंह गंधर्व के शासन काल मे किसी पहचान का मोहताज नहीं था। क्योंकि ग्यारह बीघे में फैले इस टीले के उपर राजा सुजान सिंह गंधर्व का किला स्थापित था।

 ये भी पढ़ें—जानिए क्यों मनाया जाता है विजय दिवस, PM समेत इन लोगों ने दी श्रद्धांजलि  समय के साथ ये टीला अब अपने अतीत को समेटे हुए इतिहास के पन्नो मे बिलुप्त हो गया है।उस टीले पर आज भी करीब तीन सौ साल पुराना ईट व मिट्टी के बर्तनो के कुछ अवशेष मिलते है। बुजुर्ग ग्रामीणों का कहना है की टीला इतना ऊचा था की इसके उपर से बिहार राज्य के बक्सर मे जो दिये जलते थे। उसे यहां से देखा जा सकता था। ग्रामीण बताते हैं कि राजा ने किले के चारो तरफ तलाब बनवाया था बुजुर्ग ग्रामीण शिवधन बिन्द बताते है कि उनके दुश्मन उस किले मे प्रवेस न कर सके। वहीं गांव के कुछ अन्य बुजुर्ग बताते हैं कि सुजान सिंह अपने आने जाने के लिए नाव का प्रयोग करते थे।

टीले के उपर बना था किला

गांव के 78बर्षीय केशव प्रसाद ने बताया की इस टीले के उपर राजा सुजान सिंह गंधर्व ने किला बनवाया था। उस कीले के उपर से ही अपने रियासत पर नजर रखा करते थे। राजा सुजान सिंह अपने किले के बाहर बहुत कम ही आते थे,क्योंकि उनको डर था कि उनके दुश्मन कभी भी उनको मार देगें।

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किले के पास मौजूद है कुआं

गांव के 110 वर्षीय शिवधन बिन्द बताते है की राजा सुजान सिंह गंधर्व ने किले मे ही एक कुआं बनवाया था। जब राज सुजान सिंह की मृत्यु हो गई तो सुजान सिंह का सारा धन दौलत व सारा अस्त्र-शस्त्र उस कुए मे डाल कर बंन्द कर दिया गया। उस कुएं का छत आज भी दिखाई देता है जिस पर ग्रामीण उपले रखते है। उस टीले के पास करीब तीन सौ साल पुराना ब्रम्ह बाबा श्यान जी का मंदिर भी है।

कौन थे पंडित श्यान जी

गांव के 110बर्षीय शिवधन बिन्द बताते है की पंडित श्यान जी क्रुर राजा सुजान सिंह के मंत्री हुआ करते थे। शिवधन बताते है की राजा सुजान सिंह के विरासत के लोगो का जब विवाह होता था, तो सुजान सिंह के पास उस नगर के नइनवेली दुल्हन एक रात के लिए जाती थी। इस नगर के लोग जब परेसान हो गये तो राजा को मारने के लिए सोच बिचार करने लगे। इस बात की जानकारी सुजान सिंह को लग गई शिवधन बताते है की मैं अपने बुजुर्गों से सुना है कि रात मे सोने के वक्त अपने स्थान सुजान सिंह ने अपने मंत्री पंडित श्यान जी तिवारी को सुला दिया, जिसे राजा सुजान सिंह समझ मार दिया गया।

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राजा सुजान सिंह ने बनाया था गन्धपा नगर

पंड़ित श्यान जी के वंशज कमलेश्वर तिवारी बताते हैं कि आज से करीब तीन सौ साल पहले राजा सुजान सिंह गंधर्व ने ही गन्धपा नगर बनाया था। कमलेश्वर तिवारी बताते है कि उनके शासन काल मे यहां के लोग बहुत सुखी रहते थे,सुजान सिंह अपने प्रजा का ध्यान अच्छे से रखते थे।

टीले मे बना है सुरंग

बुजुर्ग ग्रामीण बताते हैं कि इस किले के टीले में सुरंग दफन है। जो राजा सुजान सिंह दुश्मनो से घिरने के बाद वहां से बच कर जाने के लिए बनवाया था। आज भी गन्धपा गांव मे अपने अस्तित्व को समेटे हुए टीले की मिट्टी से दबा हुआ सुर्खी चुने से बना कीले का छत आज भी दिखाई देता है।

टीले पर आज भी मौजूद है देवी देवताओं के खंडिंत मुर्ति

राजा सुजान सिंह के उस टीले पर आज भी पत्थर का खंडिंत देबी देवता की मुर्ति आज भी मौजूद है। गांव के बुजुर्ग शिवधन बिन्द बताते है की ये खंडित भगवान की मुर्ति राजा सुजान सिंह के जमाने की है। ग्रामीण बताते है की अगर सरकार के द्वारा यहां पर खुदाई करया जाय तो बहुत से रहश्य पुरातत्व बिभाग को मिलेंगे।

ग्रामीण कर रहे हैं अतिक्रमण

उस ऐतिहासिक टीले पर गांव के लोग अतिक्रमण कर रहे हैं वो टीला ग्रामीणों के लिये उपले व घास फुस रखने का साधन बन गया है। इस गांव के लोगो का कहना है कि गावं के प्रधान को चाहिए की जिले के डीएम से मिलकर इस जगह की पुरात्तव बिभाग द्वारा खुदाई कराये, ताकि इस टीले मे दफ्न सच्चाई बाहर आये।