जानकर हो जायेंगे हैरान: यूपी में हर 16 में से एक व्यक्ति मानसिक विकार से ग्रस्त

सर्वेक्षण में पता चला कि 18 वर्ष से अधिक आयु के करीब दो करोड़ लोग तंबाकू संबंधी विकार व मानसिक विकारों से ग्रस्त हैं, जिसमें सामान्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याए जैसे एंग्जाइटी व डिप्रेशन वौर मादक पदार्थ उपयोग संबंधी विकार प्रमुख हैं। इसके अलावा करीब 0.5 प्रतिशत मिर्गी यानी एपिलेप्सी व बौद्धिक विकलांगता से प्रभावित हैं।

मनीष श्रीवास्तव

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 16 में से एक व्यक्ति मानसिक विकार से ग्रस्त है। निम्न आय वर्ग के सबसे ज्यादा लोग मानसिक विकार से ग्रसित हैं, जिसमें प्रत्येक 10 में से एक व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित है। सामान्य मानसिक विकार महिलाओं व अधेड़ आयु के लोगों में ज्यादा देखने को मिलता है। 40-50 वर्ष की आयु की महिलाओं में जैविकीय परिवर्तन होने के कारण मानसिक विकारों जैसे डिप्रेशन, एंग्जाइटी से ग्रसित होने की संभावना ज्यादा होती है। वर्ष 2015-16 में नेशनल मेंटल हैल्थ सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा किए गये एक सर्वेक्षण में यह चैंकाने वाले आकंड़ें सामने आये।

करीब 0.5 प्रतिशत मिर्गी यानी एपिलेप्सी व बौद्धिक विकलांगता से प्रभावित हैं

सर्वेक्षण में पता चला कि 18 वर्ष से अधिक आयु के करीब दो करोड़ लोग तंबाकू संबंधी विकार व मानसिक विकारों से ग्रस्त हैं, जिसमें सामान्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याए जैसे एंग्जाइटी व डिप्रेशन वौर मादक पदार्थ उपयोग संबंधी विकार प्रमुख हैं। इसके अलावा करीब 0.5 प्रतिशत मिर्गी यानी एपिलेप्सी व बौद्धिक विकलांगता से प्रभावित हैं। सर्वेक्षण बताता है कि बड़े शहरों में रहने वाले युवा पुरुष गंभीर बीमारियों जैसे सीजोफ्रेनिया और बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रसित हैं।

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10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस

दरअसल, मानसिक तनाव आज एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रहा है। इसका शिकार कोई खास आयु वर्ग नहीं है, प्रतिस्पर्धाओं के चलते सभी इसकी चपेट में आ रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर जागरूकता लाने के उद्देश्य से हर साल पूरे विश्व में 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर यूपी के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक डा. पदमाकर सिंह ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश जारी कर मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता सप्ताह मनाने का निर्देश दिया है।

इस संबंध में लखनऊ के मुख्य चिकित्साधकारी डा. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह 7 अक्टूबर से 13 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। इस वर्ष इसकी थीम है- आत्महत्या को रोकने के लिए मिलकर काम करें, डा. नरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि आज की भाग दौड़ वाले जीवन में, आगे निकलने की होड़ ने एक नयी स्वास्थ्य समस्या को जन्म दिया है और वह है मानसिक तनाव।

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यह तनाव न केवल हमें ही प्रभावित करता है बल्कि हमारे आस-पास रहने वाले लोग, परिवार के सदस्य भी इससे प्रभावित होते हैं। कभी कभी तो यह स्थिति हो जाती है कि व्यक्ति आत्महत्या भी कर लेता है। इसलिए हमें इस बात के लिए लोगों को जागरूक करना है कि तनाव किसी भी समस्या का हल नहीं है।

दिवस की थीम के अनुसार हमारा फोकस आत्महत्या

यूपी में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा. आरके.चैधरी ने बताया इस दिवस की थीम के अनुसार हमारा फोकस आत्महत्या पर ही रहेगा। तनाव से न केवल वयस्क ही ग्रस्त हैं बल्कि आजकल बच्चे भी इसकी चपेट में आ गये हैं। अक्सर अखबारों में बच्चों द्वारा आत्महत्या करने की खबरें पढ़ने में आ रही हैं।

मोबाइल व सोशल मीडिया भी तनाव का एक मुख्य कारण

इसका मुख्य कारण अभिभावकों द्वारा बच्चों पर अच्छे नंबर लाने के लिए व अपने साथियों से आगे निकलने के लिए दबाव डालना है। शिक्षकों व अभिभावकों को बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार ही आगे बढ्ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए न कि अपनी इच्छाओं व सपनों को उन पर थोपना चाहिए। अभिभावकों को अपने बच्चों की तुलना उनके सामने नहीं करनी चाहिए। डा. चैधरी ने बताया कि आजकल मोबाइल व सोशल मीडिया भी तनाव का एक मुख्य कारण है। युवा वर्ग इनका आदी हो रहा है जिसके कारण, तनाव, अवसाद जैसी बीमारियों कि चपेट में आ रहा है।

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मानसिक विकारों से ग्रसित बच्चों की पहचान करने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण

मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को ध्यान में रखते हुये जिले में लगभग 70 स्कूलों के नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण 9 अक्टूबर को मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में आयोजित किया गया है। 70 स्कूलों में 50 प्रतिशत सरकारी स्कूल व 50 प्रतिशत प्राइवेट स्कूल के शिक्षक प्रतिभाग करेंगे। शिक्षकों को यह प्रशिक्षण मानसिक विकारों से ग्रसित ऐसे बच्चों की पहचान करने के दिया जा रहा है ताकि उनका उपचार समय से हो सके। साथ ही स्कूलों में हेल्थ क्लब का गठन कर ऐसे बच्चों को लाइफ स्किल ट्रेनिंग भी दी जायेगी।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पहली बार 1992 में मनाया गया

इसके अलावा 10 अक्टूबर को सिटी मोंटेसरी स्कूल, गोमती नगर में बच्चों के साथ ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। 11 अक्टूबर को दिलकुशा गार्डेन में दुआ से दवा कार्यक्रम तथा 12 अक्टूबर सरोजिनी नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में विशाल मानसिक विकलांगता स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पहली बार 1992 में मनाया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पूरे विश्व में लगभग 35 करोड़ से अधिक लोग मानसिक अवसाद से ग्रस्त हैं। पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित होती हैं।