स्थगित हुआ महामूर्ख सम्मेलन तो लोगों ने कहा, ‘पहली बार की अकल की बात’

काशी में परंपरा रही है कि हर साल 1 अप्रैल को महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। उटपटांग कार्यक्रमों के चलते हर काशीवासी को पूरे साल इसका बेसब्री से इंतजार रहता है। लेकिन कोरोना वायरस की ऐसी मार पड़ी की इस कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा

Published by Ashiki Patel Published: April 1, 2020 | 10:33 pm
Modified: April 1, 2020 | 10:35 pm

संगीता सिंह

वाराणसी: धर्म नगरी काशी में परंपरा रही है कि हर साल 1 अप्रैल को महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। उटपटांग कार्यक्रमों के चलते हर काशीवासी को पूरे साल इसका बेसब्री से इंतजार रहता है। लेकिन कोरोना वायरस की ऐसी मार पड़ी की इस कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा।

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लोगों ने दिया ऐसा रिएक्शन

काशी की इस अजीबोगरीब परंपरा वाले सम्मेलन के स्थगित होने से लोग बेहद निराश हैं। पिछले 50 सालों से राजेन्द्र प्रसाद घाट पर 1 अप्रैल के दिन महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। इसमें बेहद उटपटांग तरह के अलग-अलग कार्यक्रम किये जाते हैं। लेकिन कोरोना के चलते पूरे देश में लॉकडाउन किया गया है। लिहाजा आयोजकों ने इस बार कर्यक्रम को स्थगित कर दिया। सोशल मीडिया से अपने अपने तरीके के लोग इस पर रिएक्शन दे रहे हैं। कार्यक्रम के संयोजक सुदामा तिवारी उर्फ सांड बनारसी कहते हैं कि पिछले 50 सालों से कार्यक्रम के आयोजन की रवायत रही है। 50 सालों के इतिहास में पहली बार ऐसा लग रहा है कि मूर्खों ने पहली बार अकल का काम किया है।

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कर्फ्यू में भी नही रुका कार्यक्रम

आयोजकों ने कोरोना जैसी महामारी से लड़ने के लिए सरकार का साथ देने का फैसला किया। सांड बनारसी कहते हैं कि ऐसे वक्त में इस तरह के आयोजन का कोई मतलब नहीं है। हालांकि पिछले 50 वर्षों में यह पहली बार हो रहा है कि यह कार्यक्रम पूर्ण रूप से स्थगित कर दिया गया है। जबकि इसके पहले इस कार्यक्रम के स्तंभ रहे स्वर्गीय धर्मशील चतुर्वेदी जी के संयोजन में कार्यक्रम हमेशा होता रहा। भयंकर कर्फ्यू के बीच में भी उनके घर में ही छोटे रूप में ही कार्यक्रम को संपन्न कराया गया था। लेकिन इस बार पूरी तरह से सरकारी आदेश का पालन करते हुए इस कार्यक्रम को स्थगित करने का फैसला पूरी समिति ने लिया है।

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