जानिए क्यों सरकार देती है मुख्यमंत्री और मंत्रियों का टैक्स, यूपी में है ऐसा कानून

उत्तर प्रदेश में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों, मौजूदा सीएम और मंत्रियों का इनकम टैक्स सरकारी खजाने से भरा जाता है। इसके लिए बकायादा कानून है। इसके मुताबिक यूपी सरकार अब 19 मुख्यमंत्रियों जिनमें से 18 पूर्व मुख्यमंत्री हैं, के टैक्स भरेगी।

Published by Dharmendra kumar Published: September 13, 2019 | 5:19 pm
Modified: September 13, 2019 | 5:22 pm

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों, मौजूदा सीएम और मंत्रियों का इनकम टैक्स सरकारी खजाने से भरा जाता है। इसके लिए बकायादा कानून है। इसके मुताबिक यूपी सरकार अब 19 मुख्यमंत्रियों जिनमें से 18 पूर्व मुख्यमंत्री हैं, के टैक्स भरेगी।

यही नहीं सरकार करीब 1000 मंत्रियों का इनकम टैक्स भी जमा करेगी। यह मुख्यमंत्री समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और बीजेपी समेत कांग्रेस पार्टी के रहे हैं।

वीपी सिंह के बाद समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी की मायावती, कांग्रेस से नारायण दत्त तिवारी, वीर बहादुर सिंह और बीजेपी से कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, राम प्रकाश गुप्त रहे हैं और अब योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।

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एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश मिनिस्टर्स सैलरीज, अलाउंसेस और मिसलेनियस एक्ट, साल 1981 में बना था। उस समय विश्वनाथ प्रताप सिंह राज्य के मुख्यमंत्री थे।

चार दशक पुराने कानून के मुताबिक राज्य के मुख्यमंत्री और मंत्री अपनी कम वेतन की वजह से इनकम टैक्स नहीं भर सकते और वे गरीब हैं। साल 1981 में जब विश्वनाथ प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब बिल पास किया था।

उस समय कहा गया था ज्यादातर मंत्री और विधायक गरीब तबके से आते हैं। इसलिए जनता का प्रतिनिधि होने के नाते उनके इनकम टैक्स का भुगतान सरकारी खजाने से होना चाहिए।

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अब उत्तर प्रदेश सरकार जितने भी पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं और जितने भी मंत्री रहे हैं उन सब के आयकर का पैसा सरकारी खजाने से अदा करेगी जिसका बोझ सरकारी खजाने पर आएगा।

क्या है कानून

उत्तर प्रदेश मिनिस्टर्स सैलरीज, अलाउंसेस और मिसलेनियस एक्ट, साल 1981 में बना था। उस समय विश्वनाथ प्रताप सिंह राज्य के मुख्यमंत्री थे। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने कहा था कि राज्य सरकार इनकम टैक्स का बोझ उठाए, क्योंकि अधिकतर मंत्री गरीब हैं और उनकी आमदनी बहुत कम है।

ऐक्ट के एक सेक्शन में कहा गया है कि सभी मंत्री और राज्य मंत्रियों को पूरे कार्यकाल के दौरान प्रति माह एक हजार रुपये सैलरी मिलेगी। सभी डेप्युटी मिनिस्टर्स को प्रतिमाह 650 रुपये मिलेंगे।’

वीपी सिंह

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एक ऐक्ट में आगे कहा गया है ‘उपखंड 1 और 2 में उल्लेखित वेतन टैक्स देनदारी से अलग है और टैक्स का भार राज्य सरकार उठाएगी।’

जानिए सीएम को कितनी मिलती है सैलरी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को महीने में 3 लाख 65 हजार रुपये वेतन मिलता। इस सैलरी में भत्ते भी शामिल हैं। किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री का वेतन उस राज्य की विधानसभा तय करती है। केंद्र सरकार या संसद का इससे कोई लेना-देना नहीं होता है।

मुख्यमंत्री की सैलरी हर 10 सालों में बढ़ती है। जिस तरह भारत में विधायकों के वेतन में महंगाई भत्ता एवं अन्य भत्ता शामिल होता है, उसी तरह मुख्यमंत्री के वेतन में भी सारे भत्ते शामिल होते हैं।