स्त्रियों ने की वटवृक्ष की पूजा, मांगा पति की लंबी आयु का वरदान

आज वटवृक्ष की पूजा सनातन धर्म के अनुसार धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। जिसकी छाया सीधे मन पर असर डालती है और मन को शांत बनाए रखती है।

औरैया। आज वटवृक्ष की पूजा सनातन धर्म के अनुसार धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। जिसकी छाया सीधे मन पर असर डालती है और मन को शांत बनाए रखती है। आज के दिन सौभाग्यशाली स्त्रियां वट वृक्ष की परिक्रमा कर मंगलसूत्र वट वृक्ष को समर्पित कर अपने-अपने पति देव की रक्षा की कामना करती हैं और दीर्घायु व अमर तत्वों के प्रतीक के नाते भी स्वीकार किया जाता है।

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जल देने से पुण्य की प्राप्ति

प्राचीन काल मे सावित्री वट की पूजा करके ही पति सत्यवान को मृत्यु के द्वार से लौटा लाने में सफल रही थी। मान्यता है कि इसके पूजन और इसकी जड़ में जल देने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

पुराणों में स्पष्ट कहा गया है कि यह वृक्ष त्रिमूर्ति का प्रतीक है। इसकी छाल से विष्णु, जड़ से ब्रह्मा और शाखाओं मैं शिव का वास माना जाता है। इसको अक्षयवट भी कहा जाता है। साथ ही यह वटबृक्ष 1 दिन में 20 घंटे से ज्यादा समय तक ऑक्सीजन देने का काम भी करते हैं।

बताते चलें कि जब यमराज सत्यवान के प्राण लेने के लिए धरती पर आए तो इसकी जानकारी उनकी पत्नी सावित्री को हुई। इस पर उन्होंने अपने पति के प्राण बचाए जाने के लिए यमराज से काफी दया याचना की।

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वट वृक्ष की पूजा करके अपने पति की आयु लंबी

मगर यमराज ने उन्हें कोई भी वरदान नहीं दिया। इस पर सावित्री भगवान यमराज के पीछे निरंतर चलती रही। इस पर यमराज ने सावित्री से कहा कि वह व्यर्थ में ही उनका पीछा कर रही हैं क्योंकि उनके पति की आयु समाप्त हो चुकी है। इसलिए वह उनके प्राण नहीं लौटा सकते। मगर सावित्री ने हठधर्मिता दिखाते हुए उनका पीछा नहीं छोड़ा।

थक हार कर यमराज ने उन्हें वरदान दिया और कहा कि वह वट वृक्ष की पूजा करके अपने पति की आयु लंबी कर सकती हैं। इसी कथा के प्रारंभ होने के बाद से पत्नियां अपने पति की आयु के लिए वट वृक्ष की पूजा करती चली आ रही हैं।

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रिपोर्टर -प्रवेश चतुर्वेदी