अभी-अभी यहां मिसाइल से बड़ा हमला, 83 लोगों की मौत, धुंए में तब्दील हुआ शहर

यमन के मारिब में एक मस्जिद पर मिसाइल और ड्रोन हमले में सेना के 83 जवानों की मौत हो गई है। हालांकि हूती विद्रोहियों ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। मगर हूती विद्रोहियों को इस हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

नई दिल्ली: यमन के मारिब में एक मस्जिद पर मिसाइल और ड्रोन हमले में सेना के 83 जवानों की मौत हो गई है। हालांकि हूती विद्रोहियों ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है। मगर हूती विद्रोहियों को इस हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। जिस समय हमला हुआ, तब जवान नमाज पढ़ रहे थे।

हमले में 150 के करीब लोग घायल भी हुए हैं। माना जाता है कि हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के समर्थन वाली यमन सरकार से जारी जंग में पिछले कुछ महीनों से शांति थी।

जानकारी के मुताबिक हूती विद्रोहियों ने सना के पूर्व में करीब 170 किलोमीटर दूर मारिब में शाम को नमाज के दौरान एक सैन्य शिविर पर हमला किया।

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इस हमले से एक दिन पहले सरकारी बलों ने सना के उत्तर में स्थित नाहम क्षेत्र में हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया था। यमन के राष्ट्रपति अबेदरब्बो मंसूर हादी ने इस कायराना और आतंकवादी हमले की निंदा की है।

एक समाचार वेबसाइट ने राष्ट्रपति के हवाले से कहा कि हूती मिलिशिया का यह शर्मनाक कदम इस बात की पुष्टि करता है कि वे शांति नहीं चाहते। उन्हें मौत और विनाश के अलावा कुछ नहीं आता। ये लोग इस क्षेत्र में ईरान का घटिया हथियार है।

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यमन के राष्ट्रपति को सऊदी में शरण लेनी पड़ी थी

हूती विद्रोहियों ने 2014 के अंत में यमन की राजधानी सना समेत देश के ज्यादातर उत्तरी हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया था। इसी के साथ वहां गृहयुद्ध शुरू हो गया।

5 साल से जारी गृहयुद्ध के दौरान 10 हजार से ज्यादा लोग मारे गए। 30 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए। राष्ट्रपति अब्दु-रब्बू मंसूर हादी और उनकी सरकार को पड़ोसी देश सऊदी अरब में निर्वासित होना पड़ा था।

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