बर्बाद हुआ ये देश: महामारी को लेकर की बड़ी गलती, अब बिछ रही लाशें ही लाशें

कोविड 19 ने सारी दुनिया को संकट में डाल दिया है।बड़े से बड़े सुपरपावर कहलाने वाले देशों ने इस बीमारी के आगे घुटने टेक दिए हैं। अमरीका, इटली समेत दूसरे यूरोपीय देश कोरोना से पार नहीं पा रहे हैं।

 नई दिल्ली : कोविड 19 ने सारी दुनिया को संकट में डाल दिया है।बड़े से बड़े सुपरपावर कहलाने वाले देशों ने इस बीमारी के आगे घुटने टेक दिए हैं। अमरीका, इटली समेत दूसरे यूरोपीय देश कोरोना से पार नहीं पा रहे हैं। कहीं लॉकडाउन से हालात काबू में लाने की कोशिश की जा रही है तो कहीं बिना लॉकडाउन के ही स्थानीय नियमों का सहारा लेकर कोरोना के खिलाफ जंग की जा रही है।

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अमरीका के बाद सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित ब्राज़ील में मिल रहे हैं। अब तक ब्राज़ील में 20 लाख से ज्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है जबकि 76 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है।

ब्राजील के राष्ट्रपति ज़ायर बोलनोसारो खुद ही कोरोना पॉज़िटिव हैं। उनकी रिपोर्ट दो बार पॉज़िटिव आ चुकी है लेकिन वह कोरोना को साधारण फ्लू से ज्यादा कुछ नहीं मानते।वह कहते हैं कि उनको कोरोना से कुछ नहीं होगा।

अजीब है राष्ट्रपति बोलनोसारो की रणनीति—

ब्राज़ील के राष्ट्रपति ज़ायर बोलनोसारो ने कोरोना के इतने गंभीर संकट के बाद भी ना तो कभी लॉकडाउन की घोषणा कि और ना ही तेज़ी से फैलते संक्रमण के बाद ही लॉकडाउन किया गया है।

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एंटी लॉकडाउन प्रोटेस्ट

उनका मानना है कि कोरोना सिर्फ एक साधारण फ्लू है और अगर इसके लिए लॉकडाउन किया गया तो उससे होने वाला नुक्सान कहीं ज्यादा होगा। यहां तक कि वह ब्राज़ीलिया में होने वाले एंटी लॉकडाउन प्रोटेस्ट में भी शामिल हो चुके हैं और सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें भी वायरल हो चुकी हैं।

बोलनोसारो ना तो कभी मास्क पहनते हैं ना ही कोई एहतियात बरतते हैं।उल्टे वह मीडिया को ही डर फैलाने का दोषी ठहरा रहे हैं। हालांकि स्थिति हाथ से निकलते देख बोलनोसारो ने अब लोगों को घरों में रहने और स्थानीय स्तर पर कुछ प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है।

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फुटबॉल कैपिटल बना कब्रों का देश —

राष्ट्रपति चाहे जो मानें पर हकीकत कुछ और ही है।खुद ब्राज़ील के स्वास्थ्य अधिकारी कोरोना को हल्के में लेने से नाराज़ दिख रहे हैं।कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया तो कुछ को पद से हटा दिया गया।

ब्राज़ील में हालात इतने भयावह हैं कि ब्राज़ील में लोगों को दफनाने की जगह कम पड़ गई है। हज़ारों की संख्या में कब्रें बनाए जाने के बाद भी लोग अपने परिजनों की लाश के ताबूत लेकर एक इलाके से दूसरे इलाके में सिर्फ इसलिए टहलते देखे जा रहे हैं क्योंकि उनके पास लाशें दफनाने की जगह नहीं है।

अमेज़न नदी के मुहाने पर हज़ारों कब्रें देखी जा रही हैं।लेकिन वायरस से मरने वालों की संख्या को देखते हुए हज़ारों कब्रें पहले से ही खोदकर तैयार भी की जा रही हैं।

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देर में फैला संक्रमण पर रफ्तार बहुत तेज़—

दुनिया भर के बाकी देशों के मुकाबले ब्राज़ील में कोरोना संक्रमण काफी देऱ में फैलना शुरु हुआ।लेकिन आदिवासी इलाकों में सबसे पहले पाया गया यह संक्रमण ब्राजील की बड़ी आबादी को अपनी चपेट में ले चुका है।

दुनिया भर में फुटबाल के पावर हाउस के तौर पर मशहूर ब्राज़ील की पहचान कोरोना कैपिटल के तौर पर होने लगी है।संक्रमण की रफ्तार इतना तेज़ है कि इसने अमरीका के अलावा दुनिया के सभी देशों को पीछे छोड़ दिया है।

अमेज़न के वर्षा वनों में वनवासी और जनजाति प्रजाति को इस वायरस ने बुरी तरह से चपेट में ले रखा है।भुखमरी और गरीबी ने इसे और खतरनाक बना दिया है।

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ध्वस्त हैं स्वास्थ्य सेवाएं-

ब्राज़ील की चिकित्सा व्यवस्था ने कोरोना के आगे सरेंडर कर दिया है। मई महीने में ही साओ पाउलो के मेयर ने चेतावनी दी थी कि स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त नहीं हैं और संक्रमण बढ़ेगा तो ये ध्वस्त भी हो सकती हैं।

इन सारी स्थितियों के बावजूद ब्राज़ील स्थानीय प्रतिबंधों के सहारे और वैक्सीन की उम्मीद में कोरोना से अपने ही ढंग से लड़ाई लड़ रहा है।

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