चीन की खतरनाक चाल: खरीद रहा कई देशों के स्कूल, क्या है इसके पीछे साजिश

चीन घाटे में चल रहे ब्रिटिश स्कूलों को खरीद रहा है। ऐसे में इसके पीछे चीन की ये मंशा जताई जा रही है कि वो आगे चलकर स्कूलों में अपनी विचारधारा को बढ़ावा दे सकता है। जिससे ब्रिटिश बच्चे भी चीन की छत्र-छाया में रहे।

Published by Vidushi Mishra Published: February 23, 2021 | 12:56 pm
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फोटो-सोशल मीडिया

नई दिल्ली: चीन की साजिश अब धीरे-धीरे अपने करीबी छोटे देशों में घुसपैठ करने के अलावा कई विकसित देशों में होती हुई दिखाई दे रही है। अभी कुछ दिन पहले ही चीन का ब्रिटिश स्कूलों को एक-एक करके खरीदना बहुत चर्चाओं का विषय बना हुआ था। असल में चीन घाटे में चल रहे ब्रिटिश स्कूलों को खरीद रहा है। ऐसे में इसके पीछे चीन की ये मंशा जताई जा रही है कि वो आगे चलकर स्कूलों में अपनी विचारधारा को बढ़ावा दे सकता है। जिससे ब्रिटिश बच्चे भी चीन की छत्र-छाया में रहे।

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तंगी के हालात

बीते से पूरी दुनिया पर हावी हुई कोरोना महामारी के दौरान देशों की अर्थव्यवस्था के तो हाल बहुत ही खराब हो गए हैं, इसके साथ ही इसका असर शैक्षणिक संस्थानों पर भी बहुत भयानक पड़ा है।

इसके चलते स्कूल लंबे समय से या तो बंद हैं या खुलकर संक्रमण फैलने पर दोबारा बंद हो चुके। ऐसे में अब पढ़ाई ऑनलाइन करानी पड़ रही है। स्कूल प्रशासन अपनी इमारतों का भी खर्च पूरा नहीं कर पा रहा। और तंगी के हालातों को देखते हुए कई स्कूल अपनी इमारतें बेच रहे हैं।

तंगी में आ चुके स्कूलों को चीन अपने कब्जे में लेने के लिए धड़ल्ले से खरीद रहा है। ऐसा एक-दो स्कूलों के साथ नहीं, बल्कि पूरे 17 स्कूलों के साथ हो चुका है। बता दें, इन स्कूलों को पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना से संबंध रखने वाली कंपनियों ने बहुत ही कम दामों पर खरीद लिया है और अब कोरोना काल खत्म होने के इंतजार में हैं।

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इमारतों को खरीदना चीन के लिए आसान

दरअसल कोरोना से पहले भी चीन ब्रिटिश स्कूलों को खरीदना शुरू कर चुका था। जिसकी वजह ब्रिटिश मुद्रा पाउंड में आई गिरावट थी। जबकि दूसरी तरफ चीनी अर्थव्यवस्था तेजी से ऊपर की तरफ गई। तंगी में चलती स्कूली इमारतों को खरीदना चीन के लिए आसान हो गया।

लेकिन अब खुद ब्रिटिश शिक्षाविद और अधिकारी चीन की अपने स्कूलों में हस्तक्षेप और घुसपैठ तंग आ चुके हैं। ब्रिटेन में रिफॉर्म पार्टी के नेता नाइजेल फेरेंज ने परेशानी जाहिर करते हुए कहा कि ये ट्रेंड साल 2014 से चुपके-चुपके शुरू हुआ और अब धड़ल्ले से बढ़ा है।

आगे कहते हुए ब्रिटेन के लगभग 7 प्रतिशत बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। चीन इन्हीं निजी स्कूलों को खरीद रहा है। ऐसे में ये आशंका बढ़ जाती है कि जल्द ही बच्चों के मन में चीनी विचारधारा ठूंसी जाने लगेगी। चीन घुसपैठ से बाज नहीं आ रहा है।

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