चीन की शातिर चाल, अब हांगकांग और सिंगापुर के जरिए शुरू किया ये खेल

चीन और चीन की कंपनियों के खिलाफ भारत के कड़े रुख के बाद अब ड्रैगन नई चाल चलने की फिराक में है। जानकार सूत्रों के मुताबिक चीन के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार…

अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली: चीन और चीन की कंपनियों के खिलाफ भारत के कड़े रुख के बाद अब ड्रैगन नई चाल चलने की फिराक में है। जानकार सूत्रों के मुताबिक चीन के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार है और भारत में चीन विरोधी माहौल के बाद अब चीन हांगकांग और सिंगापुर जैसे किसी तीसरे पक्ष के माध्यम से भारत में अपना व्यापार चलाने की कोशिश कर सकता है। चीन को यह बात बखूबी पता है कि भारत के साथ आर्थिक रिश्ते टूटने पर उसे बड़ी आर्थिक चोट लगेगी और इसलिए वह नई चाल चलने की फिराक में है।

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भारत के कड़े रुख के बाद चीन की चाल

लद्दाख में भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव के बाद देश में चीन विरोधी मुहिम काफी तेज हो गई है। चीनी कंपनियों के सामानों का बहिष्कार करने की आवाज भी तेज होती जा रही है। केंद्र सरकार ने भी चीनी कंपनियों पर शिकंजा कसने के साथ 59 चीनी एप्स पर पाबंदी लगा दी है। चीनी कंपनियों के हाथ से भारत में कई बड़े प्रोजेक्ट निकल गए हैं और इस कारण चीन अब नई चाल चल रहा है।

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चीन की नजर ऐसे देशों पर

जानकार सूत्रों का कहना है कि अब चीन की नजर उन देशों पर है जिन देशों के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए), तरजीही व्यापार समझौता (पीटीेए) या किसी अन्य प्रकार का द्विपक्षीय कॉमर्शियल एग्रीमेंट है। चीन इन देशों के जरिए भारत में सामान भेजने और निवेश बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। आंकड़ों से पता चलता है कि देश में चीन के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में तो कमी आई है मगर कई भारतीय कंपनियों में चीन की ओर से निवेश भी किया गया है।

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जांच किए जाने की जरुरत

इसी तरह चीन से आयात में भी हाल के दिनों में गिरावट दर्ज की गई है मगर इसके साथ ही साथ हांगकांग और सिंगापुर से होने वाले आयात में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जानकारों का कहना है कि इन आंकड़ों से इस बात की पुष्टि होती है कि कहीं ना कहीं कुछ गड़बड़ है और इस मामले में गहराई से जांच पड़ताल करने की जरूरत है।

हांगकांग-सिंगापुर से व्यापार बढ़ा

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (एफआईईओ) के आंकड़ों के मुताबिक 2019 के दौरान चीन के साथ भारत के व्यापार में 6.05 बिलियन डॉलर की कमी आई है। दोनों देशों के बीच व्यापार और 51.25 बिलियन डॉलर तक सीमित हो गया है। दूसरी ओर हांगकांग के साथ भारत का व्यापार बढ़ा है। पिछले साल इस व्यापार में 5.8 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी तरह सिंगापुर के साथ भी भारत के व्यापार में वृद्धि हुई है।

 

फिओ के महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अजय सहाय का कहना है कि हांगकांग से आयात में मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट बढ़े हैं।उनका कहना है कि इसमें उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 2017 में हांगकांग से आयात 1.3 बिलियन डॉलर था जबकि 2019 में बढ़कर यह 8.6 बिलियन डालर तक पहुंच गया। इसे समझा जा सकता है कि जहां चीन से भारत का व्यापार घटा है, वही सिंगापुर और हांगकांग से भारत के व्यापार में बढ़ोतरी हुई है।

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