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बुरे होंगे देश के हाल: कोरोना का पूरी दुनिया पर असर, संकट से भरे आने वाले दिन

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) ने शुक्रवार को कहा है कि इस महामारी ने दुनियाभर की इकोनमी के लिए संकट की स्थिति पैदा कर दी है।

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ShreyaBy Shreya

Published on 4 April 2020 12:35 PM GMT

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नई दिल्ली: इस वक्त पूरा देश कोरोना की संकट से जूझ रहा है। 24 मार्च को PM मोदी ने कोरोना वायरस के बढ़ते संकट को देखते हुए देश को 21 दिनों तक लॉकडाउन रखा है। कोरोना वायरस के चलते कईयों देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। वहीं इस बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) ने शुक्रवार को कहा है कि इस महामारी ने दुनियाभर की इकोनमी के लिए संकट की स्थिति पैदा कर दी है।

2008 में आए वैश्विक वित्तीय संकट से भी बुरा यह समय

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का कहना है कि दुनियाभर के लिए यह संकट एक दशक पहले साल 2008 में आए वैश्विक वित्तीय संकट (global financial crisis) से भी बुरा हो सकता है। IMF ने इस वक्त को 'मानवता के लिए अंधकारमय समय' कहा है।

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इमर्जिंग मार्केट्स को सपोर्ट करने के लिए आगे आएं

IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि एडवांस इकोनॉमी को आगे आकर इमर्जिंग मार्केट्स को सपोर्ट करना चाहिए। जॉर्जिवा ने कहा कि ऐसा करने से डेवलपिंग नेशन्स यानि विकासशील देश अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के साथ-साथ इस कोरोना वायरस की महामारी से भी निपट सकेंगे।

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हम मंदी के दौर में हैं

उन्होंने कहा कि यह संकट पहले के अन्य संकट की तरह नहीं है। उन्होंने कहा कि हमने पहले भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के संकट को देखा है। अब हम मंदी के दौर में हैं। IMF की प्रबंध निदेशक ने इस स्थिति को 2008-09 की वित्तीय संकट से भी बुरा करार दिया है।

छोटे देशों से एक साल तक न वसूलें कर्ज

जॉर्जिवा ने कहा कि IMF वर्ल्ड बैंक और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर इस बात पर चर्चा कर रहा है कि चीन के साथ-साथ कुछ बड़े अर्थव्यवस्था वाले देश छोटे देशों से कम से कम एक साल के लिए कर्ज की न वसूलें। उन्होंने ये भी कहा कि इस संबंध में चीन का रुख साकारात्मक है। उन्होंने बताया कि अगले दो हफ्तों के अंदर वर्ल्ड बैंक और जी 20 समूह के बीच ऑनलाइन बैठक होगी।

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