वैक्सीन मिलना मुश्किल: लोगों की उम्मीदों पर फिरा पानी, मंत्री ने ऐसा क्यों कहा

लोगों के उम्मीद पर पानी फेरते हुए ब्रिटेन के एक मंत्री द्वारा बयान दिया गया है कि इस साल के अंत तक कोरोना की वैक्सीन पाना मुश्किल है।

नई दिल्ली: चीन से फैले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रखा है। दुनियाभर के तमाम देशों में कोरोना वायरस ने बुरी तरह से अपने पैर पसार रखे हैं। इससे निपटने के लिए कईयों देश लगातार कोरोना की वैक्सीन बनाने में लगी हुई हैं। बीते दिनों कई वैज्ञानिकों ने कहा था कि इस साल के अंत तक कोरोना वैक्सीन तैयार हो जाएगी, जिससे एक उम्मीद सी बंधी हुई थी। लेकिन लोगों के इस उम्मीद पर पानी फेरते हुए ब्रिटेन के एक मंत्री द्वारा बयान दिया गया है कि इस साल के अंत तक कोरोना की वैक्सीन पाना मुश्किल है।

इस साल तक वैक्सीन आना मुश्किल

ब्रिटेन के मंत्री डोमिएक राब ने रविवार को कहा कि हम कोरोना वायरस को जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश में लगे हुए हैं और इस ओर कदम बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना के इलाज के लिए एक वैक्सीन बनाने का काम भी जारी है, लेकिन इस साल तक उस वैक्सीन का आना मुश्किल है।

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इस वक्त जरूरी है टेस्ट करवाए जाए

डोमिएक राब ने कहा कि इस वक्त लोगों का टेस्ट करवाया जाना सबसे ज्यादा जरूरी है, ताकि इस बात का पता चल सके कि किसे-किसे वायरस है और यह कितना फैल चुका है।

बयान ने दिया एक नई बहस को जन्म

ब्रिटेन के मंत्री द्वारा वैक्सीन में देरी को लेकर दिए गए बयान से अब एक नई बहस उत्पन्न हो गई है। क्योंकि मंत्री का ये बयान उस वक्त सामने आया है जब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा कोरोना की वैक्सीन पर टेस्टिंग शुरु कर दी गई है। वहां पर इस कोरोना की वैक्सीन को एक महिला को दिया भी जा चुका है और अब इंतजार है तो केवल रिजल्ट का।

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ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी ने शुरु कर दी है वैक्सीन की टेस्टिंग

इस वक्त ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी कोरोना वायरस की वैक्सीन पर अध्ययन कर रही है, इसके अलावा टेस्टिंग भी शुरु कर दी गई है। कोरोना वैक्सीन की टेस्टिंग से पहले यूनिवर्सिटी ने दावा किया था कि अगर सब सही जाता है तो इस साल सितंबर तक कोरोना वैक्सीन आ सकती है। साथ ही साल के अंत तक (दिसंबर) इस वैक्सीन को इतनी मात्रा में बना लिया जाएगा कि यह अन्य देशों को भी दी जा सके।

सितंबर महीने के अंत तक पता चलेगा कि वैक्सीन सफल है या नहीं

बता दें कि ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी ने पहला टेस्ट अप्रैल में ही शुरु कर दिया है, जिस पर दो महीने काम होना है। फिर जून में दूसरा टेस्ट किया जाएगा और अगस्त में फाइनल टेस्टिंग शुरु कर दी जाएगी। मतलब सितंबर महीने के आखिरी तक ही ये पता चल पाएगा कि ये वैक्सीन सफल हो पाई है या नहीं।

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