यूरोपीय यूनियन की ट्रंप से अपील: WHO की फंडिंग रोकने के फैसले पर फिर से सोचें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को बचाने के लिए अब यूरोपीय यूनियन ने पहल की है। यूनियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की है कि वे डब्ल्यूएचओ की फंडिंग रोकने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करें।

अंशुमान तिवारी

नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को बचाने के लिए अब यूरोपीय यूनियन ने पहल की है। यूनियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की है कि वे डब्ल्यूएचओ की फंडिंग रोकने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करें। ट्रंप ने हाल में डब्ल्यूएचओ पर कोरोना वायरस से सही ढंग से निपटने में नाकाम रहने का आरोप लगाया था और इस वैश्विक संगठन से सारे रिश्ते तोड़ते हुए फंडिंग पूरी तरफ बंद करने का एलान किया था।

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यह समय कोरोना से लड़ाई लड़ने का

अब यूरोपीय यूनियन की ओर से ट्रंप से अपने फैसले पर दोबारा सोचने का आग्रह किया गया है। यूनियन की अध्यक्ष उरसुला वोन डेर लेयेन ने कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई से बचा जाना चाहिए जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कोशिशें कमजोर होती हैं। उन्होंने कहा कि यह समय अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और मिलजुलकर प्रयास करके इस महामारी से लड़ने का है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ को फिलहाल कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का नेतृत्व करते रहना चाहिए। यह एक बहुत बड़ी लड़ाई है और इसमें डब्ल्यूएचओ को सभी देशों के सहयोग की जरूरत है।

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कोरोना के खिलाफ वैश्विक सहयोग जरूरी

यूरोपियन यूनियन ने भारत समेत दुनिया के कई अन्य देशों का हवाला देते हुए कहा कि इन देशों में कोरोना का असर काफी तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए राष्ट्रपति ट्रंप को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए और डब्ल्यूएचओ की मदद के लिए आगे आना चाहिए। यूनियन ने कहा कि वैश्विक सहयोग से ही कोरोना से जंग को जीता जा सकता है। इसलिए यह किसी को निशाना बनाने का समय नहीं है।

डब्ल्यूएचओ के भविष्य पर उठ रहे सवाल

डब्ल्यूएचओ को अमेरिका की ओर से सबसे ज्यादा फंड मिलता है। अमेरिका हर साल डब्ल्यूएचओ को 45 करोड़ डॉलर की मदद देता है। अमेरिका की ओर से इस वैश्विक संगठन को फंडिंग बंद किए जाने के एलान के बाद इसके भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस बीच दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री ज्वेलरी मखिजे ने डब्ल्यूएचओ की फंडिंग रोकने के ट्रंप के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। जर्मनी के विदेश मंत्री हेइको मास ने भी ट्रंप के फैसले की आलोचना करते हुए इसे गलत समय पर उठाया गया गलत कदम बताया है। उन्होंने भी ट्रंप से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।

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राष्ट्रपति ट्रंप ने की कड़ी कार्रवाई

राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ से पूरी तरह संबंध खत्म कर लेने का ऐलान किया था। ट्रंप का आरोप है कि डब्ल्यूएचओ पूरी तरह चीन के नियंत्रण में काम कर रहा है। ऐसे में उसे फंडिंग का कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने डब्ल्यूएचओ को दिया जाने वाला फंड दूसरे संगठनों को देने की भी घोषणा की थी। ट्रंप कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर चीन और डब्ल्यूएचओ की भूमिका को लेकर इन दिनों खासे नाराज हैं।

चीन से काफी ज्यादा मदद देता है अमेरिका

चीन की ओर से संगठन को हर साल चार करोड़ डॉलर की मदद मिलती है जबकि अमेरिका इस संगठन को इससे 11 गुना अधिक रकम देता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि हम इतनी बड़ी मदद देते हैं। इसके बावजूद यह संगठन चीन के दबाव में पूरी तरह काम कर रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले में संगठन की भूमिका ठीक नहीं रही है। दुनिया में कोरोना का सबसे ज्यादा का कहर अमेरिका में ही दिख रहा है और वहां करीब 18 लाख लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। यह वायरस अभी तक अमेरिका में एक लाख से अधिक लोगों की जान ले चुका है।

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