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नशे में डूबा राष्ट्रपति और चारो तरफ सिर्फ कमसिन हसीनाओं का मजमा

इस दुनिया में कई ऐसे तानाशाह हुए जिन्होंने अपने आगे किसी भी इंसान की कोई कीमत नहीं समझी। इनके लिए इनके शौक सबसे अहम होते थे। जिन्हें पूरा करने के लिए ये किसी भी हद तक जाने से नहीं चूकते थे।

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RishiBy Rishi

Published on 28 April 2019 9:33 AM GMT

नशे में डूबा राष्ट्रपति और चारो तरफ सिर्फ कमसिन हसीनाओं का मजमा
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मुंबई : इस दुनिया में कई ऐसे तानाशाह हुए जिन्होंने अपने आगे किसी भी इंसान की कोई कीमत नहीं समझी। इनके लिए इनके शौक सबसे अहम होते थे। जिन्हें पूरा करने के लिए ये किसी भी हद तक जाने से नहीं चूकते थे। इनमें से एक नाम है लीबिया के पूर्व तानाशाह राष्ट्रपति कर्नल मुअम्मर गद्दाफी का। जिसने अपनी सेक्स की प्यास बुझाने के लिए मासूम बच्चियों का इस्तेमाल किया।

अय्याश गद्दाफी ने दर्जनों ऐसी बच्चियों का अपहरण करवाया जिनकी उम्र पंद्रह वर्ष या इससे भी कम होती थी। गद्दाफी अपने लिए स्कूल या कॉलेज से लड़की चुनता था। उसका तरीका ऐसा होता की किसी को शक भी नहीं होता था। स्कूल या कॉलेज पहुंचकर वो लड़की पसंद करता और सबके सामने दुलार में उस लड़की के सिर पर हाथ रखता, और फिर उसके साथ मौजूद उसके सैनिक कुछ समय बाद ही उस लड़की को उसके हरम में पहुंचा देते थे। इन बदकिस्मत लड़कियों की हैसियत सिर्फ सेक्स की भूख मिटाने वाली गुड़िया की होती थी। गद्दाफी की मौत के बाद लोगों को पता चला की वर्षों से गायब होने वाली लड़कियां आखिर जाती कहां थी।

मुअम्मर गद्दाफी का जन्म लीबिया के सिरते शहर में एक घुमक्कड़ बद्दू कबीले में हुआ था। 1967 में अरब-इसराइल युद्ध हुआ उस समय गद्दाफी लीबिया की सेना में कैप्टन के पद पर नौकरी कर रहा था। लीबिया में शासक इदरिस को इस हार के लिए दोषी ठहराया गया और उसके खिलाफ विद्रोह के सुर उठने लगे और इनका नेता बन बैठा गद्दाफी।

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इसी दौरान इदरिस इलाज के लिए तुर्की चला गया। गद्दाफी को इससे अच्छा मौका नहीं मिल सकता था। उसने एक रक्तहीन क्रांति के जरिये एक सितंबर 1969 को इदरिस का तख्ता पलट दिया।

गद्दाफी ने लीबिया पर 42 साल राज किया। इसमें से आरंभ के लगभग 5 वर्ष उसने जनता के लिए काफी काम किया। जिसकी तारीफ आज भी होती है, लेकिन उसके बाद वो निरंकुश होने लगा उसने देश के अन्दर चुन-चुन कर अपने विरोधियों को मौत के घाट उतारा। उसे अपनी कबीलाई पहचान पर बेहद गर्व था। वह अपने मेहमानों का स्वागत भी तंबू में ही किया करता था। विदेश यात्राओं के दौरान गद्दाफी होटल में नहीं बल्कि अपने आलीशान तंबू में ही रुकता था।

जैसे-जैसे उसकी उम्र बढ़ रही थी उसकी सेक्स के प्रति दीवानगी बढती जा रही थी। गद्दाफी ने अपने लिए खूबसूरत महिला अंगरक्षकों की टुकड़ी बना ली थी। गद्दाफी की अय्याशी पर ‘गद्दाफीज हरम’ नाम की बुक एनिक कोजियान ने लिखी। गद्दाफी की मौत के बाद कोजियान ने गद्दाफी की शिकार कई लड़कियों से मुलाकात की और उनके संस्मरण इस में लिखे।

गद्दाफी ने बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया। इसके लिए वो स्कूल और कॉलेज जाया करता था। जो लड़की पसंद आती, उसके सिर पर हाथ रख देता था। सैनिक इसके बाद लड़की को गद्दाफी के हरम में पहुंचा देते। कईयों माँ बाप को पता ही नहीं होता था कि उनकी बच्ची अचानक कहाँ चली गयी। और जिनको पता चलता उनको मौत का डर कुछ बोलने नहीं देता।

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आपको सुन कर हैरानी होगी कि नसरीन 17 साल की थी जब गद्दाफी के इशारे पर उसका अपहरण हुआ था। फिर महीनों तक उसका बलात्कार हुआ। कई बार तो एक दिन में कई बार उसके जिस्म को नोचा जाता था। इसके बाद जब वो 19 साल की हुई तो उसे गद्दाफी की बॉडीगार्ड टीम में शामिल कर लिया गया।

नसरीन को बेरहम बनाने के लिए उससे कई हत्याएं भी करवाई गयीं। एक ही दिन में नसरीन से 11 विद्रोहियों का क़त्ल करवाया गया। नसरीन के सिर पर बंदूक रख उसके सामने एक-एक विद्रोही को लाया जाता और उसे उनपर गोली चलाने को कहा जाता। अगर वो मना करती तो उसे जान से मार देने की धमकी दी जाती।

गद्दाफी ने साल 1980 में कबाइली गुटों के खिलाफ बड़ा युद्ध छेड़ दिया। इसके बाद वर्ष 1987 में गद्दाफी ने चाड में ईसाइयों के खिलाफ भी युद्ध छेड़ा, जिसमें हजारों लोगों बेमौत मारे गए। देश में ही नहीं अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व में बसे आलोचकों को मौत के घाट उतारने के लिए गद्दाफी ने खूंखार हत्यारों को मोटी रकम दी।

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इसके साथ ही गद्दाफी ने उत्तरी आयरलैंड और फिलीपीन्स के आतंकी संगठन को भी समर्थन दिया। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि गद्दाफी हमेशा नशे में रहता था उसे सिर्फ और सिर्फ लड़की चाहिए होती थी।

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आशीष शर्मा ऋषि वेब और न्यूज चैनल के मंझे हुए पत्रकार हैं। आशीष को 13 साल का अनुभव है। ऋषि ने टोटल टीवी से अपनी पत्रकारीय पारी की शुरुआत की। इसके बाद वे साधना टीवी, टीवी 100 जैसे टीवी संस्थानों में रहे। इसके बाद वे न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश, द न्यूज़ में स्टेट हेड के पद पर कार्यरत थे। निर्मल बाबा, राधे मां और गोपाल कांडा पर की गई इनकी स्टोरीज ने काफी चर्चा बटोरी। यूपी में बसपा सरकार के दौरान हुए पैकफेड, ओटी घोटाला को ब्रेक कर चुके हैं। अफ़्रीकी खूनी हीरों से जुडी बड़ी खबर भी आम आदमी के सामने लाए हैं। यूपी की जेलों में चलने वाले माफिया गिरोहों पर की गयी उनकी ख़बर को काफी सराहा गया। कापी एडिटिंग और रिपोर्टिंग में दक्ष ऋषि अपनी विशेष शैली के लिए जाने जाते हैं।

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