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रंगभेद की लड़ाई से जुड़ा ये इतिहास, US से यूरोप तक हो रहा ऐसा हाल

अमेरिका में नस्लवाद और रंगभेद के खिलाफ लोगों की लड़ाई अब भी जारी है। लेकिन अब लोगों का विरोध करने का तरीका थोड़ा बदल गया है। अब वो ऐतिहासिक हस्तियों की मूर्तियां तोड़ रहे हैं। अब तक ऐसी 45 मूर्तियां तोड़ी जा चुकी हैं।

Shreya
Updated on: 11 Jun 2020 1:33 PM GMT
रंगभेद की लड़ाई से जुड़ा ये इतिहास, US से यूरोप तक हो रहा ऐसा हाल
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न्यूयॉर्क: अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका में भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही हैं। लोग अभी भी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। नस्लवाद और रंगभेद के खिलाफ लोगों की लड़ाई अब भी जारी है। लेकिन अब लोगों का विरोध करने का तरीका थोड़ा बदल गया है। अब वो ऐतिहासिक हस्तियों की मूर्तियां तोड़ रहे हैं। दुनिया में अब तक ऐसी 45 मूर्तियां तोड़ी जा चुकी हैं।

प्रदर्शनकारी क्यों ऐतिहासिक हस्तियों की मूर्ति को पहुंचा रहे नुकसान?

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, वे लोग उन ऐतिहासिक हस्तियों की मूर्तियां तोड़ रहे हैं, जो गुलामी और दास प्रथा को बढ़ावा देते थे। इसके साथ ही नस्लवाद और रंगभेद के समर्थक थे। इस हिंसा में सबसे ज्यादा अमेरिका और ब्रिटेन में मूर्तियों की तोड़फोड़ की गई है।

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कोलंबस, रानी विक्टोरिया की मूर्ति का हुआ ये हाल

प्रदर्शनकारियों ने बोस्टन में महान खोजकर्ता क्रिस्टोफर कोलंबस की मूर्ति को तो उखाड़कर ही फेंक दिया। लोगों का आरोप है कि कोलंबस ने अमेरिकी मूल के लोगों की सामूहिक हत्या कराई थी। इसके अलावा रंगभेद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे लोगों ने ब्रिटेन में रानी विक्टोरिया की मूर्ति को खराब कर डाला है। मूर्ति को थोड़ा नुकसान भी पहुंचा है। लोगों का आरोप है कि रानी विक्टोरिया ने उपनिवेशवाद को बढ़ावा दिया था।

प्रदर्शनकारियों ने लिस्ट भी की हैं तैयार

जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटेन में ऐसी 60 मूर्तियों की लिस्ट भी तैयार की है, जिन्हें वो तोड़ना चाहते है या फिर उसे नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटेन में रानी विक्टोरिया की मूर्ति पर पेंट स्प्रे कर उसे नुकसान पहुंचाया है।

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इस हस्तियों की मूर्ति को पहुंचाया गया नुकसान

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने ब्रिस्टल में एडवर्ड कोल्सटन की मूर्ति को गिरा दिया। उनका कहना है कि कोल्सटन अफ्रीकी लोगों की खरीद-फरोख्त कर गुलामी के काम से संबंधित एक व्यापारी था। इसके अलावा एडिनबर्ग में रॉबर्ट डंडास की मूर्ति को पेंट स्प्रे से खराब कर दिया गया। उन पर आरोप है कि वो दास प्रथा के काम से जुड़े थे। उन पर महाभियोग की कार्रवाई भी हुई थी।

बेल्जियम के ब्रसेल्स में बेल्जियम के ब्रसेल्स में नुकसान पहुंचाने के पीछे की वजह को बताया गया कि वो दास प्रथा को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। लंदन में रॉबर्ट मिलिगन की मूर्ति तोड़ दी गई। प्रदर्शन कारी उन्हें भी दासप्रथा का समर्थक मानते हैं।

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