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भारत-नेपाल में बढ़ सकता है विवाद, आर्मी चीफ का बयान बना वजह

नेपाल के भूमि प्रबंधन, सहकारिता और गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने नेपाल का नया नक्शा तैयार कर लिया है और इसमें कालापानी को भी शामिल किया गया है।

Aradhya Tripathi
Updated on: 18 May 2020 7:24 AM GMT
भारत-नेपाल में बढ़ सकता है विवाद, आर्मी चीफ का बयान बना वजह
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नेपाल और भारत के बीच अब कैलाश मानसरोवर लिंक रोड के उदघाटन को लेकर अप बात बढती नजर आ रही है। क्योंकि नेपाल लगातार इस उद्घाटन को गलत बता कर इसका विरोध कर रहा है। जबकि भारत नेपाल के इस विरोध को किसी और की चाल बता रहा है। अभी दो दिन पहले आर्मी चीफ एम. एम नरवणे ने अपने बयान में कहा था कि मानसरोवर के रास्ते पर लिपुलेख पास पर बन रही सड़क का विरोध नेपाल किसी और के इशारे पर कर रहा है। इसके बाद विरोध और बढ़ गया। और नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने लिपुलेख , कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का भिन्न हिसा बताया।

नेपाल जारी करेगा नया नक्शा

नेपाल की संसद की संयुक्त समिति में सरकार की नीतियों और कार्यक्रम पर चर्चा के दौरान राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने कहा कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा नेपाल का अभिन्न हिस्सा हैं और इन पर दावा पेश करने के लिए ठोस कूटनीतिक कदम उठाए जाएंगे। वहीं इस बीच भंडारी ने एक बड़ी बात कहते हुए बताया कि इन इलाकों पर दावा पेश करते हुए नेपाल एक नया राजनीतिक नक्शा जारी करेगा। यानी कि अब साफ है कि नेपाल भी इस मुद्दे पर किसी भी तरह से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

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नेपाल ने अपना काम करते हुए उसके भूमि प्रबंधन, सहकारिता और गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने नेपाल का नया नक्शा तैयार कर लिया है और इसमें कालापानी को भी शामिल किया गया है। बता दें कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर में दो राज्यों के विभाजन के बाद भारत ने भी अपना नया नक्षा जारी किया था। नेपाल ने उस समय भी कालापानी को भारत की ओर से अपने नक़्शे में शामिल करने पर आपत्ति जताई थी। तभी नेपाल सरकार की ओर से भारत के जवाब में एक नया नक्षा तैयार करने का आदेश दे दिया था।

किसी और के इशारे पर नेपाल कर रहा विरोध- आर्मी चीफ

ये विवाद तब बढ़ता नजर आया जब नई दिल्ली में मनोहर पर्रिकर इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज ऐंड एनालिसिस के एक कार्यक्रम में आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे ने लिपुलेख विवाद में चीन के अहम् रोल होने का इशारा किया। आर्मी चीफ ने कहा कि यह मानने की पूरी वजह है कि नेपाल ने किसी और के इशारे पर इस मामले को उठाया होगा। इस बात की संभावना बहुत ज्यादा है। एम.एम. नरवणे ने इस मौके पर कहा कि हमने जो सड़क बनाई है वह नदी के पश्चिम में है और नदी के पूर्व की जमीन उन लोगों की है। उसमें कोई विवाद ही नहीं है। मुझे नहीं समझ में आ रहा है कि वे किस बारे में आंदोलन कर रहे हैं।

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ट्राइजंक्शन को लेकर कोई संशय नहीं है, अतीत में कभी ऐसी कोई दिक्कत नहीं हुई है। इस बीच आर्मीचीफ ने कहा कि लद्दाख और सिक्किम में भारतीय-चीनी सेना के बीच संघर्ष की घटनाओं और लिपुलेख के बीच किसी तरह का संबंध नहीं है। गौरतलब है कि बीती 8 मई ओ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा ऑनलाइन तरीके से भारत-नेपाल-चीन ट्राइजंक्शन के नजदीक उत्तराखंड के लिपुलेख पास से 80 किमी लंबी सड़क का उद्घाटन किया गया था। जिसको लेकर नेपाल लगातार अपना विरोध उठा रहा है। सड़क बनने से कैलाश मानसरोवर तक की तीर्थयात्रा पूरी करने में अब भारतीयों को काफी कम वक्त लगेगा। भारत-चीन के व्यापार के लिए भी इस सड़क का इस्तेमाल होगा।

चीन-नेपाल के मधुर हो रहे संबंध

दूसरी ओर चीन नेपाल से अपाने संबंध लगातार मधुर बनाने में लगा है। आर्मी चीफ के बयां कुछ घंटे पहले ही नेपाल के विदेश सचिव शंकर दास बैरागी ने चीनी राजदूत हू यंकी से लिपुलेख विवाद को लेकर मुलाकात की थी। पिछले कुछ दिनों में चीनी राजदूत नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल और माधव कुमार नेपाल के साथ कई बैठकें कर चुके हैं। ऐसे में आर्मी चीफ का इशारा चीन की ओर शक करना बिलकुल लाजिमी है।

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वहीं नेपाल का कहना है कि वो कैलाश मानसरोवर मसले पर भारत के साथ चीन से भी बात करेगा। नेपाल का कहना है कि कैलाश मानसरोवर लिंक रोड लिपुलेख से होते हुए चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत तक जाती है और सड़क निर्माण को लेकर भारत-चीन के बीच समझौता हुआ था इसलिए चीन के साथ भी बातचीत जरूरी है।

Aradhya Tripathi

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