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खूंखार बना देश: नेताओं के मरने पर रोना जरूरी, नहीं तो मिलेगी ऐसी खौफनाक सजा

दुनिया के तमाम देश चर्चों में रहते हैं, लेकिन नॉर्थ कोरिया की बात ही क्या है। ये देश अपने अजीबो-गरीब रीति-रिवाजों, धर्म-प्रथा, रहन-सहन, खान-पीन के बारे में हमेशा खबरों में अपना विशेष स्थान बना लेता है।

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Updated on: 12 July 2020 11:32 AM GMT
खूंखार बना देश: नेताओं के मरने पर रोना जरूरी, नहीं तो मिलेगी ऐसी खौफनाक सजा
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नई दिल्ली। दुनिया के तमाम देश चर्चों में रहते हैं, लेकिन नॉर्थ कोरिया की बात ही क्या है। ये देश अपने अजीबो-गरीब रीति-रिवाजों, धर्म-प्रथा, रहन-सहन, खान-पीन के बारे में हमेशा खबरों में अपना विशेष स्थान बना लेता है। तानाशाह किम जोंग और उनके परिवार का दबदबा पूरी सत्ता बन पर रहता है। ऐसे में तानाशाह किम के दादा के बाद पिता किम जोंग इल ने ही देश की भाग-दौड़ यानी सत्ता संभाली।

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चिल्ला-चिल्लाकर और छाती पीटकर रोए

ये कहा जाता है कि उनकी मौत के बाद प्रजा को शोक सभा में खुलकर रोने का आदेश मिला। आदेश के चलते लोग पूरे दम से चिल्ला-चिल्लाकर और छाती पीटकर रोए। जो ठीक से नहीं रो पाया, वो अगले ही रोज के बाद से दिखाई नहीं दिया।

तानाशाह किम के पिता किम जोंग इल के बारे में नॉर्थ कोरिया के सरकारी चैनल ने बताया कि राजधानी प्योंगयांग से बाहर एक इलाके में अपनी शाही ट्रेन में ही हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। 17 दिसंबर 2011 को हुई इस मौत के बारे में देश की जनता को दो दिनों बाद टीवी के जरिए पता चला।

इनकी मौत की घोषणा के बाद देश में आधिकारिक शोक लागू हो गया, झंडे आधे झुका दिए गए और किसी भी किस्म के उत्सव या मनोरंजन पर रोक लग गई। अब यहां इतना तक तो ठीक था लेकिन 10 दिनों के राष्ट्रीय शोक में जनता को अपने दुख का प्रदर्शन भी करना था। वो भी फूट-फूटकर रोना था।

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रोकर ये साबित करना था

सूत्रों से मिली रिपोर्ट के अनुसार, शासक की मौत के बाद नए राजा किम जोंग उन ने पिता के लिए बहुत सी शोकसभाएं रखीं। ये एक तरह के organised mourning events थे, जिसमें जनता को आकर रोकर ये साबित करना था कि वे पुराने राजा से प्यार करते थे।

ये सब इसलिए था कि किम परिवार के लिए उनकी प्रजा द्वारा वफादारी का भी सबूत था। युवा, बच्चे, बूढ़े, औरत-मर्द सबके लिए रोना बहुत जरूरी था।

और तो और 10 दिनों तक ये शोकसभाएं चलीं। इस दौरान ये विशेषकर नोट किया गया कि कौन-कौन उतनी ठीक तरह से नहीं रो रहा था। इसे किम परिवार के प्रति वफादारी में कमी माना गया और फिर उनके खिलाफ कार्रवाई भी हुई।

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