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चीन-WHO का काला सच: लाखों मौत की वजह आई सामने, रुक सकती थी ये तबाही

दुनियाभर में कोरोना वायरस की वजह से लाखों लोगों की मौत हो गई। जबकि करोड़ो लोगों की अच्छी-खासी चल रही जिंदगी सड़कों पर आ गई। ऐसे में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर एक हैरान करने वाला खुलासा हुआ है।

Vidushi Mishra

Vidushi MishraBy Vidushi Mishra

Published on 19 Jan 2021 9:56 AM GMT

चीन-WHO का काला सच: लाखों मौत की वजह आई सामने, रुक सकती थी ये तबाही
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महामारी को लेकर चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की लापरवाही के चलते दुनियाभर में कोरोना वायरस ने अपना विकराल रूप दिखाया।
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नई दिल्ली: पूरी दुनिया में कहर बरसाने वाला कोरोना वायरस चीन के वुहान से निकला था। जिसकी वजह से दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हो गई। जबकि करोड़ो लोगों की अच्छी-खासी चल रही जिंदगी सड़कों पर आ गई। ऐसे में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर एक हैरान करने वाला खुलासा हुआ है, जिसमें चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की लापरवाही के चलते दुनियाभर में कोरोना वायरस ने अपना विकराल रूप दिखाया।

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चीन ने समय रहते काबू नहीं किया

सामने आई इंडिपेंडेंट पैनल फॉर पैन्डेमिक प्रिपेयर्डनेस एंड रिस्पॉन्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, यदि चीन चाहता तो कोरोना वायरस को महामारी बनने से रोका जा सकता था, लेकिन चीन ने समय रहते काबू नहीं किया।

और तो और रिपोर्ट में इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। वैश्विक महामारी की जांच करने वाले इस स्वतंत्र समूह ने निष्कर्ष निकाला है कि जब चीन में कोरोना का पहला मामला सामने आया था, तब डब्ल्यूएचओ और बीजिंग तेजी से काम कर सकते थे। हालाकिं उन्होंने ऐसा नहीं किया और उन दोनों की लापरवाही की वजह से दुनियाभर में कोरोना वायरस ने महामारी का रूप ले लिया।

china फोटो-सोशल मीडिया

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वैश्विक महामारी बन गई

इसके साथ ही कोरोना महामारी संबंधी तैयारियों और प्रतिक्रिया पर अपनी दूसरी रिपोर्ट के अनुसार, महामारी प्रकोप के प्रारंभिक चरण के क्रोनोलॉजी का मूल्यांकन इस बात की तरफ इशारा करता है कि शुरुआती संकेतों के बाद अधिक तेजी से काम करने की आवश्यकता थी।

आपको बता दें कि 2019 के आखिर में चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया था। लेकिन चीन जब तक इस खतरनाक वायरस को अपनी सीमाओं तक सीमित रखता, इससे पहले ही यह वैश्विक महामारी बन गई और इससे करीब 20 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई और कई अर्थव्यवस्थाओं को बहुत बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।

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Desk Editor

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