Top

कोरोना काल में भी इस देश ने नहीं किया लॉकडाउन, अब है ऐसा हाल

देश-दुनिया में कोरोनावायरस का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। 25 मार्च से लागू लॉकडाउन के बाद भी देशभर में कोविड-19 से संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।  बता दें कि कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए हर जगह लॉकडाउन जारी है,

Suman  Mishra | Astrologer

Suman  Mishra | AstrologerBy Suman Mishra | Astrologer

Published on 11 July 2020 3:56 PM GMT

कोरोना काल में भी इस देश ने नहीं किया लॉकडाउन, अब है ऐसा हाल
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

नई दिल्ली: देश-दुनिया में कोरोनावायरस का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। 25 मार्च से लागू लॉकडाउन के बाद भी देशभर में कोविड-19 से संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बता दें कि कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए हर जगह लॉकडाउन जारी है, तो ऑनलॉक चल रहा है, इन सब व्यवस्थाओं के बीच पूरी दुनिया में एक सवाल हो रहा है कि क्या कोरोना संकट से बचने के लिए लॉकडाउन एकमात्र विकल्प है, तो स्वीडन देखकर नहीं लगता यूरोप के इस देश ने अमेरिका-ब्रिटेन को चौंका दिया था करीब एक करोड़ की आबादी वाले इस देश स्वीडन ने अन्य देशों के लॉकडाउन मॉडल को खारिज करते हुए महामारी के दौरान एक 'प्रयोग' किया। लेकिन अब इस प्रयोग का खतरनाक असर देखने को मिला है।

यह पढें...विश्व जनसंख्या दिवस: सैंड आर्टिस्ट ने बनाई अनोखी कलाकृति, लोगों को ऐसे किया आगाह

मौत की संख्या तो बढ़ी

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, महामारी फैलने के बाद भी लॉकडाउन नहीं करने वाले स्वीडन में मौत की संख्या तो बढ़ी ही, इकोनॉमी को भी कोई लाभ नहीं हुआ, बल्कि नुकसान ही झेलने को मिला। अब इस 'प्रयोग' के नतीजे को अमेरिका, ब्रिटेन सहित अन्य देशों के लिए चेतावनी कहा जा रहा है। हालांकि, अब कई देश तेजी से लॉकडाउन खोलने के फैसले ले रहे हैं। एक करोड़ जनसंख्या यानी भारत के उत्तराखंड जितनी आबादी वाले देश स्वीडन में अब तक कोरोना के 74 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और 5500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यानी जिन पड़ोसी देशों ने लॉकडाउन किया था उनसे कई हजार अधिक मौतें स्वीडन में हुईं।

खुद की गलती का खामियाजा

55 लाख की आबादी वाले फिनलैंड में सिर्फ 329 लोगों की मौतें हुई हैं। वॉशिंगटन के पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के सीनियर फेलो जैकब एफ किरकेगार्ड कहते हैं कि ये साफ है कि स्वीडन को कुछ भी लाभ नहीं मिला। ये एक खुद से किए गए घाव की तरह है और उनकी इकोनॉमी भी बेहतर नहीं हुई।

यह पढें...हाई अलर्ट एरिया में स्थापित होगी मेडिकल मोबाइल यूनिट, ये बीमारी होने पर डाॅक्टर को दिखाएं

स्वीडन में लॉकडाउन नहीं किए जाने के बावजूद इकोनॉमी को इसलिए नुकसान पहुंचा क्योंकि लोगों ने खरीदारी कम की और पड़ोसी देशों में लॉकडाउन की वजह से कंपनियों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई। इसकी वजह से स्वीडन में कंपनियों को उत्पादन रोकना पड़ा बाद में जब स्वीडन की सरकार ने नियम बदलने शुरू किए तब तक देर हो चुकी थी।

इकोनॉमी में बढ़त का दावा

जैकब एफ किरकेगार्ड कहते हैं कि सरकार ने इकोनॉमी में बढ़त हासिल करने का दावा किया था, लेकिन वह सच नहीं है। वहीं, अमेरिका में भी लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बाद कोरोना के मामले फिर से रिकॉर्ड बनाने लगे हैं। एक दिन में करीब 60 हजार नए मामले सामने आए हैं। हालांकि, अब ब्रिटेन में भी पब और रेस्तरां खोल दिए गए हैं।

Suman  Mishra | Astrologer

Suman Mishra | Astrologer

Next Story