Top
TRENDING TAGS :Coronavirusvaccination

वैक्सीन में सुअर: इस्लामिक बॉडी ने कही ये बड़ी बात, मच गया बवाल

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सर्वोच्च इस्लामिक संस्था यूएई फतवा काउंसिल ने कहा है कि अगर कोरोना वायरस की वैक्सीन में सुअर से बनने वाला जिलेटिन भी मौजूद हो तो भी मुसलमान उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

Newstrack

NewstrackBy Newstrack

Published on 23 Dec 2020 11:13 AM GMT

वैक्सीन में सुअर: इस्लामिक बॉडी ने कही ये बड़ी बात, मच गया बवाल
X
वैक्सीन में सुअर: इस्लामिक बॉडी ने कही ये बड़ी बात, मच गया बवाल
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

नई दिल्ली: कोरोना वायरस से बचने के लिए वैक्सीन का इंतज़ार अब ख़त्म होने को है। इस्लाम में सुअर के मांस से बने उत्पादों का उपभोग करना हराम माना गया है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सर्वोच्च इस्लामिक संस्था यूएई फतवा काउंसिल ने कहा है कि अगर कोरोना वायरस की वैक्सीन में सुअर से बनने वाला जिलेटिन भी मौजूद हो तो भी मुसलमान उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। अधिकतर वैक्सीन में पोर्क जिलेटिन होता है और इस वजह से कहा जा रहा था कि तमाम मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं की वजह से कोरोना वैक्सीन से दूरी बना सकते हैं।

मानव शरीर को सुरक्षित करने के लिए इसकी सख्त जरूरत

काउंसिल के चेयरमैन शेख अब्दुल्ला बिन बय्या ने कहा है कि अगर कोई और विकल्प नहीं है तो कोरोना की वैक्सीन को लेकर इस्लाम में सुअर को लेकर लगाए गए प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि मानव शरीर को सुरक्षित करने के लिए इसकी सख्त जरूरत है। काउंसिल ने कहा कि वैक्सीन के मामले में पोर्क जिलेटिन मेडिसिन की कैटिगरी में आता है ना कि खाने की श्रेणी में। कोरोना वायरस पूरे समाज के लिए ही बहुत बड़ा खतरा बनकर आया है, ऐसे में वैक्सीन बेहद जरूरी है।

vaccination

मुस्लिम देशों में वैक्सीन को लेकर ऐसी चिंताएं

कई मुस्लिम देशों में कोरोना की वैक्सीन को लेकर ऐसी चिंताएं जाहिर की जा रही हैं। अक्टूबर महीने में इंडोनेशिया के कुछ डिप्लोमैट और मुस्लिम स्कॉलर्स चीन में एक प्लेन से अचानक उतर गए। मुस्लिम स्कॉलर्स की चिंता थी कि इस्लामिक कानून के तहत कोरोना की वैक्सीन लगवाने की इजाजत नहीं है।

ये भी देखें: धमाके में उड़ी फैक्ट्री: 8 लोगों की बिखर गई लाशें, घायलों को बचाने में जुटी टीम

जिलेटिन का इस्तेमाल वैक्सीन को स्टोरेज के लिए होता है

पोर्क से मिलने वाला जिलेटिन का इस्तेमाल वैक्सीन को स्टोरेज और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के दौरान सुरक्षित और प्रभावी रखने के लिए किया जाता है। सऊदी अरब और मलेशिया की एजे फार्मा बिना जिलेटिन वाली वैक्सीन पर काम भी कर रही हैं। फाइजर, मॉडर्ना और एस्ट्राजेनेका ने कहा है कि उनकी कोरोना वैक्सीन में पोर्क उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। हालांकि, वैक्सीन की सीमित उपलब्धता के चलते कई मुस्लिम देश जिलेटिन वाली वैक्सीन का इस्तेमाल करेंगे।

चेचक और रूबेला वैक्सीन का हुआ था विरोध

हालांकि, दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है। साल 2018 में, इंडोनेशिया उलेमा काउंसिल ने कहा था कि चेचक और रूबेला वैक्सीन में जिलेटिन मौजूद है इसलिए ये हराम हैं। धार्मिक नेताओं ने इसके बाद अभिभावकों से बच्चों को वैक्सीन ना लगाने की अपील करनी शुरू कर दी थी।

astrazeneca-bioitech

ये भी देखें: महंगाई की मार: अंडे की कीमत ने छुआ आसमान, रो रहा पूरा पाकिस्तान

काउंसिल ने बाद में वैक्सीन लगवाने की इजाजत दे दी

काउंसिल ने बाद में वैक्सीन लगवाने की इजाजत दे दी थी। लेकिन टैबू के चलते वैक्सीनेशन रेट काफी कम रही। इंडोनेशिया की सरकार ने कहा है कि कोरोना वैक्सीन की खरीदारी में वह मुस्लिम संगठनों को भी शामिल करेगी ताकि वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में बाद में कोई समस्या ना हो। यहूदियों में भी पोर्क खाने पर प्रतिबंध है लेकिन ये केवल प्राकृतिक रूप से सेवन को लेकर है। कुछ संगठनों का कहना है कि अगर आपके शरीर में इसे इंजेक्ट किया जाता है तो फिर इसमें कोई समस्या नहीं है, खासकर जब ये कोरोना जैसी महामारी के नियंत्रण को लेकर है।

दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।

Newstrack

Newstrack

Next Story