Dhurandhar 2 के खिलाफ सेना के जवान ने दिल्ली हाईकोर्ट में दर्ज की याचिका, जाने पूरा मामला

Dhurandhar 2 Legal Trouble: रणवीर सिंह की धुरंधऱ द रिवेंज के खिलाफ लगा सरकारी गोपनीयता अधिनियम के उल्लंघन का आरोप, जानिए क्या है पूरा मामला

Update:2026-05-21 15:25 IST

Dhurandhar 2 Controversy: आदित्य धर की फिल्म धुरंधर द रिवेंज जोकि 19 मार्च को रिलीज हुई थी। फिल्म को रिलीज हुए 2 महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। लेकिन फिल्म को लेकर चल रहा विवाद रूकने का नाम ही नहीं ले रहा है। तो वहीं Dhurandhar 2 के ओटीटी रिलीज को लेकर जहाँ एक तरफ मेकर्स ने तारीख का ऐलान किया है। वहीं दूसरी तरफ फिल्म एक नए विवाद में फंसती हुई नजर आ रही है। चलिए जानते हैं क्या है पूरा मामला 

धुरंधर 2 के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर (Dhurandhar 2 Pil Filed In Delhi Highcourt)-

रणवीर सिंह की फिल्म Dhurandhar 2 नई कानूनी मुसीबत में फंस चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, सेना के एक सेवारत जवान ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। और आरोप लगाया है कि यह फिल्म सरकारी गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन करती है। एक लेखक द्वारा फिल्म पर साहित्यिक चोरी का आरोप लगाए जाने के कुछ दिनों बाद ही, अब सेना के एक सेवारत जवान, दीपक कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट का रूख किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह फिल्म सशस्त्र बलों के ऑपरेशन से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को दिखाकर सरकारी गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन करती है। 

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि जनहित याचिका बिना किसी ठोस आधार के दायर नहीं की गई थी, और यद्यपि फिल्म मनोरंजन के लिए बनाई जाती है, लेकिन इसके प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता। यह जनहित याचिका सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के एक कर्मी याचिकाकर्ता द्वारा दायर की गई थी। अदालत ने आदेश दिया, “सेंसर बोर्ड के लिए कुछ दिशा-निर्देश होने चाहिए। हम चाहते हैं कि आप इस अभ्यावेदन पर विचार करें और सोच-समझकर निर्णय लें,” पीठ ने मौखिक रूप से कहा। “अदालत की राय है कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विचार किया जाना चाहिए और उनका उचित समाधान किया जाना चाहिए। हम सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सीबीएफसी को निर्देश देते हुए रिट याचिका का निपटारा करते हैं कि वे याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन के रूप में पूरी रिट याचिका पर विचार करें और उठाए गए मुद्दों पर उचित निर्णय लें।”

पीठ ने आगे कहा, “सेंसर बोर्ड के पास कुछ दिशा-निर्देश होने चाहिए। हम चाहते हैं कि आप इस निवेदन पर विचार करें और सोच-समझकर निर्णय लें।" 

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