बढ़ती उम्र में घुटनों का दर्द नहीं है मामूली समस्या, इन संकेतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

Knee Pain In Old Age: बढ़ती उम्र में घुटनों का दर्द सामान्य नहीं होता। यह ऑस्टियोआर्थराइटिस और जोड़ों के घिसाव का संकेत हो सकता है। समय पर पहचान और सही इलाज से सर्जरी से बचा जा सकता है और दर्द को नियंत्रित किया जा सकता है।

By :  Avnish Pal
Update:2026-06-08 17:26 IST

Knee pain in old Age

Knee pain In old Age: बढ़ती उम्र के साथ घुटनों में दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। अधिकांश लोग इसे उम्र का सामान्य असर मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार रहने वाला घुटनों का दर्द, सूजन, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी जैसी समस्याएं गंभीर जोड़ों की बीमारी का संकेत हो सकती हैं। यदि समय रहते इन लक्षणों की पहचान कर उचित उपचार शुरू कर दिया जाए तो भविष्य में होने वाली जटिलताओं और सर्जरी की आवश्यकता को काफी हद तक टाला जा सकता है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के डायरेक्टर ऑर्थोपेडिक्स एवं रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि घुटनों का दर्द केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। बदलती जीवनशैली, मोटापा, शारीरिक गतिविधियों में कमी, लंबे समय तक बैठकर काम करना और बढ़ती उम्र के कारण अब बड़ी संख्या में लोग जोड़ों की समस्याओं से जूझ रहे हैं।

इन संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

डॉ. वर्मा के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को कई सप्ताह या महीनों से घुटनों में दर्द बना हुआ है तो इसे सामान्य नहीं समझना चाहिए। खासतौर पर निम्न लक्षण गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं:

सीढ़ियां चढ़ने या उतरने में दर्द और परेशानी होना।

कुर्सी से उठते या बैठते समय घुटनों में तेज दर्द महसूस होना।

सुबह उठने के बाद लंबे समय तक घुटनों में अकड़न रहना।

घुटनों के आसपास सूजन दिखाई देना।

चलने-फिरने की क्षमता में धीरे-धीरे कमी आना।

घुटनों से खटखटाहट, घिसने या चटकने जैसी आवाजें आना।

थोड़ी दूरी चलने पर भी दर्द बढ़ जाना।

उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण अक्सर ऑस्टियोआर्थराइटिस या जोड़ों के घिसाव की ओर संकेत करते हैं, जो समय के साथ गंभीर रूप ले सकते हैं।

दर्द से बचने के लिए गतिविधियां कम करना पड़ सकता है नुकसानदायक

विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग दर्द होने पर चलना-फिरना या सीढ़ियां चढ़ना बंद कर देते हैं। शुरुआत में यह राहत देने वाला लग सकता है, लेकिन लंबे समय में इससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और जोड़ों पर दबाव बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप दर्द और अधिक बढ़ सकता है तथा व्यक्ति की गतिशीलता प्रभावित हो सकती है। डॉ. वर्मा ने बताया कि शारीरिक गतिविधियों में अत्यधिक कमी, जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। इसलिए दर्द होने पर स्वयं निर्णय लेने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

हर घुटने के दर्द का इलाज सर्जरी नहीं

घुटनों के दर्द का नाम सुनते ही कई लोग जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी को लेकर डर जाते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि शुरुआती चरण में अधिकांश मरीजों को बिना सर्जरी के भी राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक फिजियोथेरेपी, वजन नियंत्रण, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का उपयोग करके दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। फिजियोथेरेपी के जरिए घुटनों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे जोड़ों पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और व्यक्ति की चलने-फिरने की क्षमता बेहतर होती है।

मोटापा भी बन रहा बड़ी वजह

डॉक्टरों के अनुसार बढ़ता वजन घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। हर अतिरिक्त किलो वजन का असर घुटनों के जोड़ों पर कई गुना अधिक पड़ता है। यही कारण है कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में घुटनों के दर्द और आर्थराइटिस का खतरा अधिक देखा जाता है। स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित रूप से पैदल चलना, हल्के व्यायाम करना और संतुलित खानपान अपनाना घुटनों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।

कब तुरंत लें ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ की सलाह?

डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि यदि दर्द लगातार बना रहे, रात की नींद प्रभावित होने लगे, छोटी दूरी चलना भी मुश्किल हो जाए या दवाओं से केवल अस्थायी राहत मिल रही हो, तो बिना देर किए ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच कराने से बीमारी की वास्तविक स्थिति का पता चलता है और उसी के अनुसार उपचार की सही योजना तैयार की जा सकती है। देर से इलाज कराने पर जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार गंभीर आर्थराइटिस या अत्यधिक क्षतिग्रस्त जोड़ों के मामलों में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी मरीजों को नई जिंदगी दे सकती है। वर्तमान समय में रोबोटिक-असिस्टेड जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीक के इस्तेमाल से सर्जरी पहले की तुलना में अधिक सटीक और सुरक्षित हो गई है। डॉ. वर्मा ने बताया कि रोबोटिक तकनीक की मदद से सर्जिकल योजना अधिक सटीक बनती है, जोड़ों का एलाइनमेंट बेहतर होता है, मरीज को सहज मूवमेंट मिलता है और रिकवरी की प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत तेज होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि घुटनों का दर्द यदि लगातार बना हुआ है तो उसे केवल बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, सही जीवनशैली, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह के जरिए न केवल दर्द को नियंत्रित किया जा सकता है बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर समस्याओं से भी बचा जा सकता है। याद रखें, घुटनों का दर्द उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा नहीं, बल्कि शरीर का एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत भी हो सकता है।

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