बंगाल में खिला कमल, तो यूपी में अखिलेश ने बदली चाल! 2027 के लिए समाजवाद में लगा 'हिंदुत्व' का तड़का

Akhilesh Yadav Hindutva strategy UP election: बंगाल में BJP की जीत के बाद अखिलेश यादव ने बदली रणनीति! ज्योतिष, हनुमान चालीसा और ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ के सहारे 2027 की तैयारी में जुटी सपा। जानिए कैसे बदल रहा है समाजवाद का नया चेहरा।

Update:2026-05-07 16:12 IST

Akhilesh Yadav Hindutva strategy UP election: पश्चिम बंगाल के सियासी रण में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत और ममता बनर्जी के दुर्ग के पतन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। बंगाल के नतीजों ने जहां भाजपा कार्यकर्ताओं के हौसले आसमान पर पहुंचा दिए हैं, वहीं समाजवादी पार्टी के खेमे में भविष्य की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भांप लिया है कि केवल पुराने सामाजिक समीकरणों के भरोसे 2027 की वैतरणी पार करना मुश्किल है। यही वजह है कि अखिलेश अब एक नई 'सोशल इंजीनियरिंग' गढ़ रहे हैं, जिसमें समाजवाद के साथ-साथ धर्म, आध्यात्म और ज्योतिष का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

अब पंडित जी की सलाह पर चलेगी सपा की साइकिल

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अखिलेश यादव अब कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते। बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने सबको तब हैरान कर दिया, जब उन्होंने खुद को पूरी तरह ज्योतिषीय सलाह पर निर्भर बताया। अखिलेश ने मजाकिया लहजे में ही सही, लेकिन एक बड़ा सियासी संदेश देते हुए कहा कि वे अब 'नये समाजवादी' हैं और भविष्य की हर चाल सितारों की गर्दिश को देखकर ही तय करेंगे। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि अगर उनके पंडित जी कहेंगे कि बाल कटाने हैं या दाएं पैर से घर से बाहर निकलना है, तो वे वैसा ही करेंगे। अखिलेश का दावा है कि उनके संपर्क में ऐसे सिद्ध ज्योतिष हैं जो मन की बात पढ़ लेते हैं, और 2012 की जीत का श्रेय भी उन्होंने इसी सलाह को दिया।

BJP के हिंदुत्व कार्ड की काट: अखिलेश का 'सॉफ्ट हिंदुत्व' अवतार

मिशन-2027 को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव ने अपनी छवि को एक खास वर्ग के नेता से बदलकर बहुसंख्यक समाज के बीच लोकप्रिय बनाने की कवायद शुरू कर दी है। बंगाल में भाजपा की जीत के पीछे धार्मिक ध्रुवीकरण एक बड़ी वजह रही, जिससे सबक लेते हुए सपा मुखिया अब 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पर चल पड़े हैं। उन्होंने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को सख्त हिदायत दी है कि वे ऐसा कोई बयान न दें जिससे भाजपा को ध्रुवीकरण का मौका मिले। अखिलेश अब अपनी पारंपरिक 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति के साथ-साथ सांस्कृतिक हिंदुत्व को जोड़कर भाजपा के कोर वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

हनुमान चालीसा और केदारेश्वर मंदिर: खुद को बताया बड़ा सनातनी

अखिलेश यादव अब भाजपा को हिंदुत्व के मुद्दे पर वॉकओवर देने के मूड में नहीं हैं। बड़े मंगल के अवसर पर उनके सोशल मीडिया अकाउंट से हनुमान चालीसा की पंक्तियां साझा करना इसी रणनीति का हिस्सा है। इतना ही नहीं, उनके गृह जनपद इटावा में बन रहे 'केदारेश्वर मंदिर' का सावन में भव्य लोकार्पण करने की तैयारी है। इसके जरिए अखिलेश यह संदेश देना चाहते हैं कि वे भी उतने ही बड़े सनातनी और हिंदू धर्म के संरक्षक हैं जितने उनके प्रतिद्वंद्वी। उनका मुख्य उद्देश्य भाजपा द्वारा किए जाने वाले 'काउंटर पोलराइजेशन' को रोकना है ताकि 2027 में हिंदू मतदाता धर्म के नाम पर उनसे छिटक न जाएं।

अनुशासन का डंडा और 'नियो-समाजवाद' का भविष्य

पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए अखिलेश अब कड़े तेवर अपना रहे हैं। उन्होंने नेताओं को पत्रकारों के साथ 'ऑफ द रिकॉर्ड' बात करने से बचने की नसीहत दी है। यह नाराजगी उस समय उपजी जब पार्टी के ही एक नेता द्वारा बंगाल में ममता की हार की आशंका वाली बात लीक हो गई थी। अखिलेश की मौजूदा राजनीति आधुनिकता (लैपटॉप/एआई) और प्राचीन परंपरा (ज्योतिष) का एक दिलचस्प मिश्रण है। वे समाजवाद पर हिंदुत्व का तड़का लगाकर एक ऐसा 'नियो-समाजवाद' पेश कर रहे हैं जो 2027 के रण में भाजपा के चक्रव्यूह को तोड़ सके। अब देखना यह है कि यह सांस्कृतिक बदलाव सपा को सत्ता के करीब ले जाता है या नहीं।

Tags:    

Similar News