तो ये हैं विजय के चाणक्य, जिनकी सॉलिड रणनीति से TVK ने गाड़े झंडे, जानिए कौन हैं वो जिसने हिला दी स्टालिन सत्ता
TVK victory strategist John Arokiasamy: तमिलनाडु में विजय की TVK की ऐतिहासिक जीत के पीछे कौन है असली ‘चाणक्य’? जानिए जॉन अरोकियासामी की वो रणनीति जिसने DMK की सत्ता को हिला दिया और TVK को बना दिया नया राजनीतिक सुपरपावर।
TVK victory strategist John Arokiasamy: तमिलनाडु की राजनीति में जब भी कोई बड़ा उलटफेर होता है, तो उसके पीछे अक्सर किसी न किसी 'किंगमेकर' का हाथ होता है। हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में फिल्म सुपरस्टार विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) ने जो करिश्मा कर दिखाया, उसने पूरे देश को चौंका दिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि विजय की इस ऐतिहासिक और हैरान कर देने वाली जीत की पटकथा किसने लिखी थी? वो शख्स हैं जॉन अरोकियासामी। जिस तरह उत्तर भारत में प्रशांत किशोर की चर्चा होती है, ठीक उसी तरह आज दक्षिण में जॉन अरोकियासामी का नाम हर जुबान पर है। उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर एक ऐसी व्यूह रचना की, जिसने एक फिल्मी सितारे को राज्य के सबसे ताकतवर राजनीतिक योद्धा के रूप में स्थापित कर दिया।
सोशल मीडिया के 'व्यूज' से 'वोटों' तक का सफर
जॉन और विजय की यह कहानी करीब दो साल पहले शुरू हुई थी। उस वक्त विजय के मन में राजनीति को लेकर दुविधा थी। जॉन खुद भी शुरू में यह तय नहीं कर पा रहे थे कि क्या विजय का राजनीति में आना सही होगा। लेकिन, जॉन की नजर तब खुली जब उन्होंने देखा कि विजय की एक साधारण सी सोशल मीडिया पोस्ट भी महज एक घंटे में एक मिलियन व्यूज पार कर जाती है। यह संख्या कोई मामूली बात नहीं थी। यहीं से जॉन के दिमाग की बत्ती जली। विजय अक्सर उनसे निजी बातचीत में पूछते थे, "क्या डिजिटल दुनिया का यह प्यार वाकई वोटों में बदल पाएगा?" जॉन का जवाब 'हां' में था और इसी भरोसे ने 'टीवीके' (TVK) के जन्म की नींव रखी।
"जॉन से पूछो": बैकरूम का वो शक्तिशाली दिमाग
पार्टी लॉन्च होने के बाद विजय ने जॉन को पूरी बागडोर सौंप दी। टीवीके के गलियारों में एक जुमला मशहूर हो गया था—"जॉन से पूछो"। चाहे उम्मीदवारों का चयन करना हो, पार्टी का ढांचा तैयार करना हो या प्रचार की रणनीति, विजय का अपने रणनीतिकार पर अटूट विश्वास था। जॉन ने एक पारंपरिक चुनावी सलाहकार से कहीं बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने केवल अभियान नहीं चलाया, बल्कि पार्टी के संगठन की एक-एक ईंट जोड़ी। उन्होंने तय किया कि विजय मंच पर क्या बोलेंगे, क्या पहनेंगे, और किस मुद्दे पर विपक्ष को घेरेंगे। जॉन अरोकियासामी ने विजय को समझाया कि वे केवल एक राजनीतिक पार्टी नहीं बना रहे, बल्कि एक 'पंथ' (Cult) खड़ा कर रहे हैं, जो लोगों के दिलों पर राज करे।
भाजपा और डीएमके के खिलाफ 'वैचारिक चक्रव्यूह'
जॉन की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि उन्होंने विजय को भाजपा और व्यापक दक्षिणपंथी राजनीति के खिलाफ मजबूती से खड़ा किया। उनका तर्क सीधा था—तमिलनाडु के करीब 75 प्रतिशत मतदाता द्रविड़ विचारधारा से जुड़े हैं। इसलिए, विजय को इसी वर्ग को संबोधित करना होगा। उन्होंने ही टीवीके को वो मास्टरस्ट्रोक नारा दिया जिसने चुनाव का रुख मोड़ दिया: "डीएमके राजनीतिक शत्रु है, भाजपा वैचारिक शत्रु है।" इस नारे ने यह साफ कर दिया कि विजय किसी भी कीमत पर एनडीए की ओर नहीं जाएंगे। साथ ही, उन्होंने डीएमके को एक 'वंशवादी पार्टी' के रूप में चित्रित किया, जिससे युवा और निष्पक्ष मतदाता टीवीके की ओर खिंचे चले आए।
अनुभवी रणनीतिकार: चित्तूर से चेन्नई तक का सफर
आंध्र प्रदेश के चित्तूर से ताल्लुक रखने वाले जॉन अरोकियासामी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत है। अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई के बाद उन्होंने चेन्नई से एमबीए किया। राजनीति में आने से पहले वे कॉर्पोरेट जगत के एक मंझे हुए खिलाड़ी थे। उनका राजनीतिक अनुभव केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। उन्होंने 2016 में पीएमके के लिए काम किया, कर्नाटक में सिद्धारमैया के पहले कार्यकाल के दौरान कांग्रेस के लिए रणनीति बनाई और महाराष्ट्र में शरद पवार की एनसीपी व उद्धव ठाकरे की शिवसेना के लिए भी अहम भूमिका निभाई। उनके पास विभिन्न विचारधाराओं के साथ काम करने का एक व्यापक और विविधतापूर्ण अनुभव है।
बाइबल और अनुशासन: एक निजी और धार्मिक व्यक्तित्व
राजनीतिक अखाड़े में बेहद आक्रामक नजर आने वाले जॉन निजी जीवन में बहुत अनुशासित और शांत स्वभाव के हैं। एक धर्मनिष्ठ ईसाई के रूप में बाइबल उनके जीवन का केंद्र है। उनके करीबी बताते हैं कि वे बहुत ही निजी व्यक्ति हैं और सार्वजनिक रैलियों या चकाचौंध से दूर रहना पसंद करते हैं। उनकी गहरी धार्मिक आस्था के बावजूद, उनकी राजनीति पूरी तरह धर्मनिरपेक्षता पर आधारित रही है। यही अनुशासन उन्होंने टीवीके के संगठन में भी भरा, जिससे पार्टी में सैन्य स्तर की कार्यप्रणाली और स्पष्टता दिखाई दी।
एक नया राजनीतिक सितारा: 100 सीटों का वो दुर्लभ जादुई आंकड़ा
तमिलनाडु जैसे राज्य में, जहां पहले से ही दो विशाल द्रविड़ दल मौजूद हों, वहां बिल्कुल नए सिरे से पार्टी खड़ी करना और अपने पहले ही चुनाव में 100 सीटों का आंकड़ा पार कर जाना किसी चमत्कार से कम नहीं है। 2023 में विजय और जॉन के बीच हुआ तीन साल का औपचारिक समझौता आज पूरी तरह सफल साबित हो चुका है। इस जीत ने जॉन अरोकियासामी को न केवल तमिलनाडु, बल्कि पूरे भारत के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों की कतार में खड़ा कर दिया है। आज हर कोई जानना चाहता है कि 'थलापति' की इस सफलता के पीछे का वो 'शांत दिमाग' अब आगे कौन सी चाल चलने वाला है।