UP में चलेगा बंगाल वाला जादू! ये दिग्गज संभालेंगे 2027 की चुनावी कमान? BJP में बड़ी हलचल

Sunil Bansal UP Election 2027: 2027 चुनाव से पहले UP BJP में बड़ी हलचल! क्या अमित शाह और सुनील बंसल फिर संभालेंगे चुनावी कमान? बंगाल जीत के बाद BJP अब यूपी में बूथ लेवल रणनीति और सोशल इंजीनियरिंग पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है।

Update:2026-05-07 18:58 IST

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Sunil Bansal UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की सियासी बिसात पर 2027 के विधानसभा चुनाव की गूंज अभी से सुनाई देने लगी है। भाजपा के भीतर एक बहुत बड़ी चर्चा ने जोर पकड़ लिया है, जो आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति की पूरी तस्वीर बदल सकती है। खबर है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से बेहद सक्रिय और प्रत्यक्ष भूमिका में लाया जा सकता है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि 2027 की जंग जीतने के लिए उन 'चाणक्य' चेहरों की जरूरत है, जिन्होंने पहले भी यूपी की चुनावी जमीन पर असंभव को संभव कर दिखाया था। यह हलचल ऐसे समय में तेज हुई है जब भाजपा ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 15 साल पुराने अभेद्य किले को ध्वस्त कर अपनी सांगठनिक ताकत का लोहा मनवाया है।

बंगाल की जीत से मिला फॉर्मूला: क्या यूपी में भी चलेगा बूथ लेवल का जादू?

पश्चिम बंगाल में भाजपा की हालिया और शानदार सफलता ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। वहां जिस तरह से बूथ स्तर की रणनीति और सटीक सांगठनिक तालमेल ने तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया, उसी मॉडल को अब उत्तर प्रदेश में और भी उन्नत तरीके से लागू करने की तैयारी है। हालांकि, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को इस बात का बखूबी अहसास है कि बंगाल और यूपी की राजनीति में जमीन-आसमान का अंतर है। उत्तर प्रदेश की चुनावी जमीन कहीं ज्यादा जटिल और चुनौतीपूर्ण है। वर्तमान में बी.एल. संतोष और विनोद तावड़े जैसे नेता यूपी के मामलों को देख रहे हैं, लेकिन पार्टी का एक बड़ा वर्ग अब उन चेहरों की मांग कर रहा है जिन्हें उत्तर प्रदेश की नब्ज और यहां के पेचीदा जातीय समीकरणों का दशकों पुराना अनुभव हो।

2017 वाली 'ऐतिहासिक जोड़ी' की वापसी के संकेत

पार्टी के भीतर यह सुगबुगाहट है कि अमित शाह अब यूपी की राजनीति पर पहले से कहीं अधिक सीधी और पैनी नजर रखेंगे। वहीं, सुनील बंसल को एक बार फिर से राज्य का प्रभारी बनाकर चुनावी कमान सौंपी जा सकती है। याद रहे कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जो ऐतिहासिक प्रचंड बहुमत मिला था, उसके पीछे अमित शाह की रणनीति और सुनील बंसल के मजबूत सांगठनिक नेटवर्क का बहुत बड़ा हाथ था। भाजपा की असली ताकत हमेशा से सवर्णों, गैर-यादव पिछड़ों और गैर-जाटव दलितों के उस 'सोशल इंजीनियरिंग' पर टिकी रही है, जिसे हिंदुत्व के मजबूत फेविकोल से जोड़ा गया था। लेकिन हालिया दौर में इस समीकरण में कुछ दरारें देखी गई हैं, जिसे भरने के लिए शाह-बंसल की जोड़ी को सबसे उपयुक्त माना जा रहा है।

अखिलेश का 'PDA' दांव और भाजपा के सामने कड़ा मुकाबला

उत्तर प्रदेश में चुनौतियां इसलिए भी बढ़ गई हैं क्योंकि विपक्षी खेमे में अखिलेश यादव ने अपनी रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे के साथ समाजवादी पार्टी ने जातीय राजनीति को एक नई धार दी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता बचाने में तो कामयाब रही, लेकिन पार्टी के अंदर यह बात दबी जुबान में मानी गई कि यह जीत उम्मीद से कहीं ज्यादा मशक्कत भरी थी। 2024 के लोकसभा चुनावों ने तो खतरे की घंटी और जोर से बजा दी है। समाजवादी पार्टी ने भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाते हुए 80 में से 37 सीटें जीत लीं, जबकि भाजपा का ग्राफ 62 से गिरकर 33 पर आ गया। यह गिरावट भाजपा के लिए एक चेतावनी है कि अब आत्मसंतुष्टि का समय नहीं, बल्कि युद्धस्तर पर तैयारी का वक्त है।

योगी की छवि और शाह की रणनीति: विकास और संगठन का संगम

भाजपा आज भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'कड़क' कानून-व्यवस्था वाली छवि, बुनियादी ढांचे के विकास और जन कल्याणकारी योजनाओं को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानती है। योगी की लोकप्रियता आज भी बरकरार है, लेकिन चुनाव जीतने के लिए केवल सरकारी काम काफी नहीं होते, उसके लिए संगठन का मजबूत ढांचा भी चाहिए। विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा को अपनी खोई हुई सामाजिक पकड़ वापस पाने के लिए स्थानीय स्तर के असंतोष और विभिन्न समुदायों की छोटी-छोटी मांगों को गंभीरता से लेना होगा। 2024 में विपक्ष के जिस नैरेटिव ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया, उसका प्रभावी जवाब देने के लिए अब अमित शाह और सुनील बंसल जैसे मंझे हुए खिलाड़ियों की मैदान में मौजूदगी अनिवार्य मानी जा रही है। 2027 की डगर कठिन जरूर है, लेकिन भाजपा अपनी इस पुरानी 'विनिंग जोड़ी' के साथ हर बाधा को पार करने का मन बना चुकी है।

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