शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद केस में बड़ा मोड़: हाई कोर्ट के जज ने खुद को सुनवाई से किया अलग

Shankaracharya Avimukteshwaranand Latest News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद केस में नया मोड़: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने सुनवाई से खुद को अलग किया।

By :  Shivam
Update:2026-05-07 21:25 IST

Ashutosh Brahmachari Pakistan Threat Call Amid Shankaracharya Case

Shankaracharya Avimukteshwaranand Latest News: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Avimukteshwaranand Saraswati) से जुड़े विवादित मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने खुद को मामले से अलग करने का फैसला किया है। उन्होंने इस संदर्भ में फाइल को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजते हुए आग्रह किया है कि प्रकरण को किसी अन्य पीठ (बेंच) को आवंटित किया जाए। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब शंकराचार्य और उनके शिष्यों पर पॉक्सो एक्ट और अवमानना के गंभीर आरोप लगे हुए हैं, जिससे कानूनी और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज (Ashutosh Maharaj) द्वारा दायर की गई अवमानना याचिका है। याचिकाकर्ता का दावा है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को हाईकोर्ट ने फरवरी और मार्च 2026 में कुछ विशेष शर्तों के साथ राहत दी थी, लेकिन इन शर्तों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है। आरोप है कि दोनों आरोपी उन क्षेत्रों में सार्वजनिक रैलियां और धार्मिक सभाएं कर रहे हैं जहाँ नाबालिग पीड़ित निवास करते हैं। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल अदालत के आदेशों की अवमानना हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को भी सीधे तौर पर प्रभावित करने का प्रयास हैं।

पीड़ितों को डराने और जानलेवा हमले का दावा

मामला केवल कानूनी तकनीकी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यक्तिगत सुरक्षा के गंभीर दावे भी शामिल हैं। आशुतोष महाराज ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से नाबालिग पीड़ितों और उनके परिवारों को डराया-धमकाया जा रहा है। इससे भी अधिक चौंकाने वाला दावा यह है कि याचिकाकर्ता की 'नाक काटने' के लिए 21 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की गई। आशुतोष महाराज ने कोर्ट को बताया कि उन पर चलती ट्रेन में हमला हुआ और उन्हें अंतरराष्ट्रीय नंबरों से बम धमाके में उड़ाने की धमकियां मिल रही हैं। उनका कहना है कि यह सब उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।

विवाद की पृष्ठभूमि और पॉक्सो कोर्ट की कार्रवाई

इस बड़े विवाद की शुरुआत प्रयागराज के महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान हुई थी। प्रशासन और शंकराचार्य के बीच 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या पर हुए एक टकराव के बाद, 24 जनवरी को बच्चों के यौन शोषण के आरोप सामने आए। जब पुलिस ने शुरू में कार्रवाई नहीं की, तो मामला विशेष पॉक्सो अदालत पहुंचा। बच्चों के बयान दर्ज होने के बाद, अदालत के कड़े निर्देश पर 21 फरवरी 2026 को प्रयागराज के झूंसी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में शंकराचार्य और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी सहित अन्य को नामजद किया गया था।

भविष्य की कानूनी राह और प्रशासनिक कदम

न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल के सुनवाई से हटने के बाद अब सबकी निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर टिकी हैं। अब यह उनके विवेक पर निर्भर करेगा कि वह इस संवेदनशील मामले को किस नई बेंच को सौंपते हैं। चूंकि इस मामले में धार्मिक आस्था और कानून के कड़े सिद्धांतों का टकराव देखने को मिल रहा है, इसलिए नई बेंच का गठन और आगामी सुनवाई की दिशा उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल, सभी पक्षकारों को नई पीठ की घोषणा और सुनवाई की अगली तारीख का इंतजार है।

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