अब तो बन कर रहेगी विजय की सरकार! TVK को मिला कट्टर दुश्मनों का साथ, DMK-VCK और CPI ने थामा हाथ
TVK alliance support DMK-CPI and VCK: तमिलनाडु में बड़ा सियासी उलटफेर! विजय की TVK को अब DMK, CPI और VCK का भी समर्थन मिल गया है। क्या अब ‘थलापति’ बनेंगे मुख्यमंत्री? जानिए सरकार गठन के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का पूरा सच।
TVK alliance support DMK-CPI and VCK: तमिलनाडु की राजनीति इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। पर्दे पर बड़े-बड़े दुश्मनों को धूल चटाने वाले 'थलापति' विजय आज राजभवन की दहलीज पर अपनी राजनीतिक पारी की सबसे कठिन परीक्षा दे रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए जो दल मैदान में उनके खिलाफ लड़ रहे थे, आज वही दल उनके समर्थन में खड़े हो गए हैं। डीएमके, वीसीके, सीपीआई और कमल हासन की एमएनएम जैसी विरोधी पार्टियों ने विजय का साथ देकर सबको चौंका दिया है। हालांकि, यह समर्थन कोई व्यक्तिगत प्रेम नहीं, बल्कि राज्यपाल और केंद्र सरकार के खिलाफ एक बड़ा साझा मोर्चा है।
विरोधियों का साथ: राज्यपाल के खिलाफ एकजुट हुआ तमिलनाडु
तमिलनाडु चुनाव के नतीजे आए 72 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। विजय दो बार राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मिल चुके हैं, लेकिन दोनों ही बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इस 'इंतजार' ने राज्य के राजनीतिक दलों को भड़का दिया है। विरोधियों का तर्क है कि यह केवल विजय का मुद्दा नहीं, बल्कि तमिलनाडु की साढ़े सात करोड़ जनता के जनादेश का अपमान है। डीएमके और अन्य दलों का मानना है कि राज्यपाल जानबूझकर देरी कर रहे हैं, जो संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है। इसी नाराजगी ने कट्टर विरोधियों को भी विजय के पक्ष में बयान देने पर मजबूर कर दिया है।
113 का आंकड़ा और राजभवन की 'अड़ियल' शर्त
विजय की पार्टी टीवीके (TVK) ने अपने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी। बहुमत के लिए 118 विधायकों की जरूरत है और कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के साथ विजय के पास अब 113 विधायकों की ताकत है। वे बहुमत के जादुई आंकड़े से महज 5 कदम दूर हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब राज्यपाल ने साफ कह दिया कि शपथ लेने से पहले विजय को अपना बहुमत साबित करना होगा। इस पर विजय और उनके समर्थक दलों का कहना है कि बहुमत का परीक्षण राजभवन के बंद कमरों में नहीं, बल्कि विधानसभा के पटल पर होना चाहिए।
कमल हासन का हमला: जनादेश का अपमान बर्दाश्त नहीं
विजय के पक्ष में सबसे मुखर आवाज उनके साथी अभिनेता और राजनेता कमल हासन की रही है। हासन ने सोशल मीडिया पर राज्यपाल को उनके संवैधानिक कर्तव्यों की याद दिलाते हुए लिखा कि सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका न देना लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने एम.के. स्टालिन की प्रशंसा करते हुए कहा कि जब विपक्ष अपनी भूमिका निभाने को तैयार है, तो संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को भी अपना फर्ज निभाना चाहिए। हासन का मानना है कि 233 चुने हुए विधायकों को शपथ न दिलाना पूरे राज्य का अपमान है।
विपक्ष की दलील: विधानसभा ही है असली मैदान
वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन और सीपीआई सचिव एम. वीरपांडियन ने भी राज्यपाल की मांग को 'अस्वीकार्य' बताया है। उनका कहना है कि संविधान के मुताबिक सबसे बड़ी पार्टी या चुनाव बाद बने गठबंधन को मौका मिलना चाहिए। डीएमके नेता ए. सरवनन ने भी विजय का समर्थन करते हुए कहा कि जब 113 विधायकों के साथ विजय सबसे मजबूत दावेदार हैं, तो उन्हें शपथ लेने की अनुमति मिलनी चाहिए। इन सभी दलों का एक ही स्वर है—बहुमत का परीक्षण केवल और केवल विधानसभा में होना चाहिए।
तमिलनाडु के भविष्य पर टिकी निगाहें
234 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल स्थिति त्रिशंकु बनी हुई है। टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे आगे है, जबकि डीएमके 59 सीटों पर सिमट गई है। कांग्रेस, जो अब तक डीएमके के साथ थी, अब विजय के पाले में खड़ी है। इस पूरी खींचतान ने राज्यपाल की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या राज्यपाल परंपराओं का पालन करते हुए विजय को शपथ दिलाएंगे, या फिर यह संवैधानिक लड़ाई सड़कों पर उतरेगी? तमिलनाडु की जनता अब अगले आदेश का बेसब्री से इंतजार कर रही है, क्योंकि लोकतंत्र की साख इस वक्त दांव पर लगी है।