'BJP के एजेंट' हैं राज्यपाल...!' दूसरी बार खाली हाथ लौटे विजय,चेन्नई में 'तांडव' शुरू, हजारों समर्थकों ने घेरा राजभवन

Vijay TVK government formation crisis update: तमिलनाडु में सियासी घमासान तेज! दूसरी बार राज्यपाल से खाली हाथ लौटे विजय के समर्थन में चेन्नई की सड़कों पर उतरे हजारों कार्यकर्ता। TVK समर्थकों ने राजभवन घेरा और राज्यपाल पर BJP का एजेंट होने का आरोप लगाया।

Update:2026-05-07 17:50 IST

Vijay TVK government formation crisis update: तमिलनाडु की सियासत में इस वक्त हाई-वोल्टेज ड्रामा चल रहा है। फिल्मी पर्दे के 'थलापति' और अब राजनीति के नए 'किंग' कहे जा रहे टीवीके (TVK) प्रमुख विजय को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। गुरुवार को विजय दूसरी बार राजभवन पहुंचे, लेकिन इस बार भी उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं मिला। राजभवन से खाली हाथ लौटने की खबर जैसे ही बाहर खड़ी समर्थकों की भीड़ तक पहुंची, माहौल पूरी तरह गरमा गया। चेन्नई की सड़कों पर उतरे हजारों कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उन पर भाजपा का पक्ष लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

112 विधायकों का साथ फिर भी 'इंतजार', समर्थकों ने घेरा राजभवन

विजय की पार्टी 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है और कांग्रेस के समर्थन के साथ उनके पास कुल 112 विधायकों का आंकड़ा है। विजय के समर्थकों का तर्क है कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी पार्टी को मौका मिलना चाहिए, लेकिन राज्यपाल जानबूझकर प्रक्रिया को लंबा खींच रहे हैं। राजभवन के बाहर तिरुपुर और अन्य जिलों से आए कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि राज्यपाल जानबूझकर देरी कर रहे हैं ताकि दूसरी पार्टियों को जोड़-तोड़ का मौका मिल सके। पुलिस को बेकाबू भीड़ को संभालने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक शपथ ग्रहण नहीं होता, वे चेन्नई नहीं छोड़ेंगे।

बहुमत का फैसला विधानसभा में हो, राजभवन में नहीं

प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं और कानूनी जानकारों ने अब इस लड़ाई को संवैधानिक मोड़ दे दिया है। समर्थकों का साफ कहना है कि बहुमत साबित करने की जगह विधानसभा का फ्लोर (सदन) है, न कि राजभवन का बंद कमरा। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक 'एस.आर. बोम्मई' केस का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्यपाल को फ्लोर टेस्ट का मौका देना चाहिए। उनका आरोप है कि राजभवन में विधायकों के हस्ताक्षर मांगना केवल एक बहाना है ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित किया जा सके। कार्यकर्ताओं का मानना है कि सबसे बड़े दल के नेता को शपथ दिलाना राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

राज्यपाल का आश्वासन और 'हस्ताक्षर' वाली शर्त का पेंच

पीटीआई के मुताबिक, राज्यपाल ने विजय से मुलाकात के दौरान उन्हें एक बड़ा आश्वासन भी दिया है। राज्यपाल ने कहा है कि वह विजय को मौका दिए बिना किसी दूसरी पार्टी को सरकार बनाने के लिए नहीं बुलाएंगे। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने एक सख्त शर्त भी जोड़ दी है। राज्यपाल का कहना है कि विजय को अपने समर्थक सभी विधायकों के व्यक्तिगत हस्ताक्षर वाली एक औपचारिक सूची जमा करनी होगी। जब तक हर विधायक के दस्तखत वाला समर्थन पत्र राजभवन को नहीं मिलता, तब तक शपथ ग्रहण की फाइल आगे नहीं बढ़ेगी। राज्यपाल ने स्पष्ट किया है कि वे कागजों पर पूरी तरह पक्का दावा चाहते हैं।

विपक्ष की खामोशी और चेन्नई में डटे रहने का संकल्प

इस पूरे ड्रामे के बीच विपक्षी नेता पलानीस्वामी की खामोशी ने सबको हैरान कर दिया है। उन्होंने अभी तक राज्यपाल से मुलाकात का समय नहीं मांगा है, जिससे चर्चाओं का बाजार गर्म है। इधर, चेन्नई में विजय के समर्थकों का जोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कार्यकर्ताओं ने कसम खाई है कि वे अपने नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाकर ही दम लेंगे। तमिलनाडु की यह राजनीतिक रस्साकशी अब एक बड़े संवैधानिक संकट की ओर बढ़ती दिख रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विजय कब तक अपने विधायकों के हस्ताक्षर जुटा पाते हैं और राज्यपाल अगला कदम क्या उठाते हैं।

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