यात्रियों की जान से खेल रहा भारतीय विमानन क्षेत्र, आखिर कब जागेगा सिस्टम?
Indian Aviation Sector: भारत में हाल की विमानन घटनाओं ने एयरलाइंस की सुरक्षा, मेंटेनेंस और क्रू से जुड़े प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े किए हैं। तकनीकी खराबी, इमरजेंसी लैंडिंग और रनवे समस्याओं के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज है।
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Indian Aviation Sector: भारतीय विमानन क्षेत्र इन दिनों जिस तरह की घटनाओं से गुजर रहा है, उसने सुरक्षा व्यवस्था और एयरलाइंस के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तकनीकी खराबी, इमरजेंसी लैंडिंग, उड़ानों में लंबी देरी, रनवे में खामी और क्रू से जुड़ी कथित लापरवाही एक के बाद एक सामने आ रहे मामले यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि आसमान में उड़ रहे यात्रियों की सुरक्षा कहीं व्यवस्था की प्राथमिकताओं में पीछे तो नहीं छूट गई है।
मामला सिर्फ किसी एक एयरलाइन का नहीं है। पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग एयरलाइंस और एयरपोर्ट से सामने आई घटनाओं ने पूरे एविएशन सिस्टम की तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिया है। विडंबना देखिए जमीन पर विमान की सुरक्षा के लिए जांच-पड़ताल की लंबी प्रक्रिया है, लेकिन आसमान में पहुंचने के बाद छोटी-सी चूक भी सैकड़ों जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है।
इंडिगो के विमान के इंजन में खराबी, 224 यात्री थे सवार
मंगलवार को कोलकाता से चेन्नई जा रही इंडिगो की फ्लाइट 6E-723 के बाएं इंजन में लैंडिंग से ठीक पहले खराबी सामने आई। विमान में 224 लोग सवार थे। पायलट की सूचना के बाद चेन्नई एयरपोर्ट पर रात 11:29 बजे पूर्ण आपातकाल घोषित किया गया।
इसके कुछ ही मिनट बाद विमान ने रात 11:37 बजे रनवे 25 पर सुरक्षित लैंडिंग की। राहत की बात यह रही कि सभी यात्री और क्रू सदस्य सुरक्षित रहे। लेकिन सवाल यह है कि इंजन की समस्या आखिर उड़ान के अंतिम चरण तक क्यों पहुंची और ऐसी खामी का पता पहले क्यों नहीं चला?
वाराणसी में रनवे ने रोकी उड़ानों की रफ्तार
वाराणसी एयरपोर्ट पर भी मंगलवार को तकनीकी खराबी ने विमान संचालन को करीब दो घंटे तक प्रभावित किया। रनवे में समस्या सामने आने के बाद न कोई विमान उड़ान भर सका और न ही लैंडिंग हो सकी।
एयरपोर्ट प्रशासन ने समय रहते खामी पकड़कर आवश्यक जांच और मरम्मत की, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका टल गई। यह घटना भले ही हादसे में तब्दील नहीं हुई, लेकिन यह जरूर बताती है कि विमानन सुरक्षा में छोटी-सी तकनीकी चूक भी कितनी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है।
स्पाइसजेट में एसी बंद, यात्रियों का पारा चढ़ा
दिल्ली से पुणे जाने वाली स्पाइसजेट की फ्लाइट में उड़ान से पहले ही एसी में खराबी आ गई। विमान के भीतर गर्मी और असुविधा से परेशान यात्रियों ने नाराजगी जताई और हंगामा किया। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए।
अब सवाल यह है कि जब विमान जमीन पर खड़ा था और यात्रियों को उसमें बैठाया जा चुका था, तब ऐसी बुनियादी तकनीकी समस्या का समाधान पहले क्यों नहीं किया गया? यात्रियों के लिए विमान का सफर सुविधाजनक हो या न हो, कम से कम सुरक्षित और मानवीय तो होना ही चाहिए।
फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में अचानक बदली ऊंचाई
फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2379 में विमान की ऊंचाई अचानक बदलने की घटना ने सबसे गंभीर सवाल खड़े किए। विमान में 137 यात्री सवार थे और घटना में 24 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
शुरुआत में इसे टर्बुलेंस से जोड़कर देखा गया, लेकिन बाद में विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव की बात सामने आई। मामले की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने अपने हाथ में ली।
रिपोर्टों में पायलट के साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट को लेकर भी गंभीर दावे किए गए हैं। कथित तौर पर प्रारंभिक जांच में टेस्ट पॉजिटिव आया और बाद की लैब रिपोर्ट में भी कैनाबिस सेवन की पुष्टि की बात कही गई। इस मामले में जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट और अंतिम निष्कर्ष का इंतजार बेहद महत्वपूर्ण है।
बताया गया कि विमान की ऊंचाई अचानक कम होने के दौरान को-पायलट ने नियंत्रण संभाला और विमान को स्थिर करते हुए दिल्ली में सुरक्षित लैंड कराया। अगर जांच में पायलट से जुड़ी लापरवाही के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह महज एक व्यक्ति की गलती नहीं बल्कि पूरे सुरक्षा प्रोटोकॉल की गंभीर परीक्षा होगी।
जेवर एयरपोर्ट पर बारिश ने खोली ड्रेनेज व्यवस्था की पोल
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तेज बारिश के बाद टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र को जोड़ने वाले मार्ग पर कुछ समय के लिए पानी जमा हो गया। इससे आवाजाही प्रभावित हुई।
एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, अत्यधिक तेज बारिश के बाद यह स्थिति बनी और टीमों ने तत्काल जल निकासी शुरू कर करीब आधे घंटे में रास्ते को सामान्य कर दिया। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन एक आधुनिक और बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए यह सवाल भी जरूरी है कि मानसून जैसी सामान्य मौसमी परिस्थितियों के लिए ड्रेनेज व्यवस्था कितनी तैयार है।
सवाल सिर्फ देरी का नहीं, भरोसे का है
इन घटनाओं को अलग-अलग करके देखा जाए तो हर मामले की अपनी वजह और अपनी सफाई हो सकती है। लेकिन जब तकनीकी खराबियां, इमरजेंसी लैंडिंग, रनवे की समस्याएं, यात्रियों की असुविधा और कथित मानवीय चूक बार-बार सामने आने लगें, तो इन्हें महज संयोग कहकर टालना मुश्किल हो जाता है।
विमानन उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और एयरलाइंस तेजी से अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सुरक्षा व्यवस्था, मेंटेनेंस और मानव संसाधन भी उसी गति से मजबूत किए जा रहे हैं?
आखिर विमान कोई बस नहीं है कि रास्ते में खराब हुआ तो किनारे लगाकर यात्री उतर जाएं। यहां हजारों फीट ऊपर एक तकनीकी चूक का मतलब कुछ सेकंड में जिंदगी और मौत के बीच का फासला हो सकता है।
यात्रियों को समय पर मंजिल तक पहुंचाना एयरलाइन की जिम्मेदारी है, लेकिन उन्हें सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाना उसकी सबसे पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।
वरना विमानन क्षेत्र की चमकदार तस्वीरों, नए एयरपोर्ट और बढ़ती उड़ानों के बीच एक सवाल लगातार मंडराता रहेगा, क्या हम आसमान में सुविधा का विस्तार कर रहे हैं या सुरक्षा के जोखिमों को भी उसी रफ्तार से बढ़ा रहे हैं?