Maharashtra Politics: आज सियासी घमासान के आसार, स्पीकर के चुनाव में फंसा कानूनी पेंच

Maharashtra Politics: चुनाव में सबसे बड़ा पेंच फंसा हुआ है कि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना का व्हिप प्रभावी होगा या मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना का।

Written By :  Anshuman Tiwari
Update: 2022-07-03 03:51 GMT

एकनाथ शिंदे उद्धव ठाकरे (photo: social media )

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) की अगुवाई में नई सरकार के गठन के बाद आज प्रदेश विधानसभा में बड़ा सियासी घमासान होने के आसार हैं। विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन आज विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा जबकि कल शिंदे विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा की ओर से राहुल नार्वेकर (Rahul Narvekar) को चुनाव मैदान में उतारा गया है जबकि शिवसेना ने राजन सालवी (Rajan Salvi) का नामांकन कराकर सर्वसम्मत चुनाव की संभावनाएं खत्म कर दी हैं।

इस चुनाव में सबसे बड़ा पेंच फंसा हुआ है कि पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की शिवसेना का व्हिप प्रभावी होगा या मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना का। मजे की बात यह है कि दोनों गुटों के मुख्य सचेतकों की ओर से विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए अलग-अलग व्हिप जारी किया गया है। उद्धव ठाकरे गुट की ओर से चुनाव प्रक्रिया और अध्यक्ष के चुनाव के मुद्दे पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

व्हिप को लेकर अलग-अलग दावे

शिंदे गुट की ओर से भारत गोगावले को चीफ व्हिप बनाया जा चुका है। इस गुट का दावा है कि शिवसेना के 39 विधायकों ने सर्वसम्मति से शिंदे को अपना नेता चुना है और गोगावले ही चीफ व्हिप है। शिंदे गुट का कहना है कि गोगावले का व्हिप ही शिवसेना के सभी 55 विधायकों को मानना होगा। उद्धव गुट से जुड़े हुए 16 विधायकों ने अगर इस व्हिप का उल्लंघन किया तो उनकी सदस्यता खतरे में पड़ जाएगी।

दूसरी ओर उद्धव गुट भी कमर कसकर विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में डटा हुआ है। इस गुट का कहना है कि अजय चौधरी को विधायक दल का नया नेता चुना जा चुका है और विधानसभा के उपाध्यक्ष ने चौधरी की नियुक्ति को मान्यता भी दे दी है।

उद्धव गुट का कहना है कि सुनील चौधरी उनके मुख्य सचेतक हैं और प्रभु का व्हिप ही शिवसेना के सभी 55 विधायकों पर लागू होगा। उद्धव गुट के मुताबिक बागी गुट के 39 विधायक भी इस व्हिप का उल्लंघन नहीं कर सकते। इस तरह व्हिप को लेकर दोनों गुटों की ओर से अपने-अपने दावे पेश किए गए हैं।

दोनों गुटों ने जारी किया है व्हिप

जानकारों का कहना है कि स्पीकर के चुनाव के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचना तय माना जा रहा है। दोनों गुटों की ओर से अलग-अलग व्हिप जारी किए जाने के बाद व्हिप का उल्लंघन होने पर संबंधित गुट अदालत जरूर पहुंचेगा। फिर अदालत की ओर से यह फैसला किया जाएगा कि किसका व्हिप सही था और व्हिप का उल्लंघन करने वालों की सदस्यता बनी रहेगी या नहीं।

ठाकरे गुट के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु और शिंदे गुट के मुख्य सचेतक भारत गोगावले अपना-अपना व्हिप प्रभावी होने का दावा कर रहे हैं। सुनील प्रभु का कहना है कि शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने उन्हें नियुक्त किया है और ऐसी स्थिति में उनका व्हिप ही लागू होगा। दूसरी ओर गोगावले का दावा है कि शिवसेना के दो तिहाई से अधिक सदस्यों ने पाला बदल कर लिया है और इस आधार पर उनकी ओर से जारी व्हिप ही प्रभावी होगा।

फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा मामला

वैसे इस अजीबोगरीब स्थिति को लेकर कानून के जानकार भी कोई स्पष्ट राय नहीं दे पा रहे हैं। उनका कहना है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। वैसे कुछ जानकारों का कहना है कि विधानसभा उपाध्यक्ष की ओर से शिंदे गुट के मुख्य सचेतक भरत गोगावले की नियुक्ति को खारिज किया जा चुका है तो ऐसी स्थिति में उद्धव गुट की ओर से नियुक्त मुख्य सचेतक सुनील प्रभु का व्हिप ही प्रभावी माना जाना चाहिए।

सियासी जानकारों का कहना है कि शिंदे गुट भाजपा के साथ मिलकर ध्वनिमत के जरिए भाजपा का अध्यक्ष चुनवा सकता है मगर ऐसी स्थिति में यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचना तय माना जा रहा है। नया अध्यक्ष ही सोमवार को विधानसभा में विश्वास मत के दौरान सदन की कार्यवाही संचालित करेगा।

राजन सालवी ने किया जीत का दावा

उद्धव ठाकरे गुट की ओर से विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने वाले राजन सालवी ने अपनी जीत का दावा किया है। नामांकन के बाद उन्होंने कहा कि महाविकास अघाड़ी गठबंधन के सभी सदस्य मेरे पक्ष में ही मतदान करेंगे उन्होंने कहा कि शिवसेना की तरफ से सुनील प्रभु ने पहले ही व्हिप जारी कर दिया है। इसलिए पार्टी के सभी 55 विधायकों का वोट मुझे ही मिलेगा।

सालवी कोंकण के रत्नागिरी जिले की राजापुर विधानसभा सीट से चुने गए हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कि जब शिवसेना के 39 विधायकों ने अलग गुट बना लिया है तो उनका वोट उन्हें कैसे मिलेगा।

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