बंगाल के नतीजों से पहले आया 'भूकंप'! सबसे बड़ी सर्वे एजेंसी Axis My India ने किया सरेंडर, जानिए क्यों नहीं जारी किए आकड़े

Axis My India Bengal exit poll: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में Axis My India ने एग्जिट पोल के आंकड़े जारी करने से इनकार कर दिया है। प्रदीप गुप्ता के मुताबिक 60-70% मतदाताओं ने अपनी पसंद बताने से मना कर दिया, जिससे सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं हो सका। 4 मई की काउंटिंग से पहले सस्पेंस और गहरा गया है।

Update:2026-04-30 19:45 IST

Axis My India Bengal exit poll: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने में अब कुछ ही घंटे शेष हैं, लेकिन नतीजों से पहले एक ऐसी खबर आई है जिसने राजनीतिक पंडितों को हैरत में डाल दिया है। देश की सबसे भरोसेमंद एग्जिट पोल एजेंसियों में शुमार 'Axis My India' ने बंगाल को लेकर अपने आंकड़े जारी करने से साफ इनकार कर दिया है। जहां अन्य एजेंसियां बीजेपी और टीएमसी की जीत-हार के दावे कर रही हैं, वहीं प्रदीप गुप्ता की कंपनी ने हाथ खड़े करते हुए कहा है कि बंगाल का मतदाता इस बार 'मौन' है। यह खबर इसलिए बड़ी है क्योंकि बंगाल में इस बार रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत मतदान हुआ है, लेकिन इसके बावजूद जनता के मन की थाह पाना नामुमकिन साबित हो रहा है।

प्रदीप गुप्ता का खुलासा: 60 फीसदी लोगों ने जुबां पर लगाए ताले

Axis My India के प्रबंध निदेशक प्रदीप गुप्ता ने एनडीटीवी से बात करते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनकी टीम जब जमीन पर लोगों से बात करने पहुंची, तो करीब 60 से 70 फीसदी लोगों ने यह बताने से इनकार कर दिया कि उन्होंने किसे वोट दिया है। गुप्ता ने इसे 'भय का माहौल' बताते हुए कहा कि बंगाल में लोग 'हां' या 'नहीं' कहने तक के लिए तैयार नहीं थे। जब सर्वे में शामिल होने वाले प्रतिभागी जवाब ही न दें, तो इतने छोटे सैंपल साइज के आधार पर किसी नतीजे पर पहुंचना वैज्ञानिक रूप से गलत होगा। इसीलिए कंपनी ने निर्णय लिया है कि वह गलत आंकड़े देने के बजाय मौन रहना बेहतर समझेगी।

रिकॉर्ड मतदान और 'अंडरकरंट' का डर

बंगाल में इस बार जो वोटिंग हुई है, उसने आजादी के बाद के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पहले चरण में 93.13 प्रतिशत और दूसरे में 91.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। औसतन 92.47 प्रतिशत की यह वोटिंग 2011 के उस रिकॉर्ड (84%) से भी कहीं ज्यादा है, जब ममता बनर्जी ने 34 साल के वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका था। भारी मतदान को अक्सर सत्ता परिवर्तन का संकेत माना जाता है, लेकिन बंगाल में मतदाता की खामोशी ने एग्जिट पोल एजेंसियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। क्या यह खामोशी ममता बनर्जी के प्रति वफादारी है या फिर सत्ता बदलने का गुप्त इरादा, इसका अंदाजा लगाना फिलहाल नामुमकिन है।

ममता बनर्जी के लिए साख की सबसे बड़ी लड़ाई

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव महज सत्ता बचाने की जंग नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई है। डेढ़ दशक तक बंगाल पर एकछत्र राज करने वाली दीदी के लिए यह चुनाव 2011 जैसा ही चुनौतीपूर्ण मोड़ ले चुका है। एक तरफ जहां कई एग्जिट पोल बीजेपी की प्रचंड जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं कुछ अन्य सर्वे ममता की वापसी की उम्मीद जता रहे हैं। Axis My India का पीछे हटना यह संकेत देता है कि बंगाल की जमीन पर कोई बहुत गहरा 'अंडरकरंट' है, जिसे भांपने में बड़ी-बड़ी मशीनरी भी फेल हो रही है।

खिलेगा कमल या बनी रहेंगी दीदी?

अब जब सबसे बड़ी सर्वे एजेंसी ने हाथ खींच लिए हैं, तो सस्पेंस और भी गहरा गया है। बंगाल का मतदाता आखिर इतना डरा हुआ क्यों है कि वह अपनी पसंद जाहिर नहीं करना चाहता? या फिर यह उसकी कोई सोची-समझी रणनीति है? इन तमाम सवालों के जवाब 4 मई को ही मिलेंगे जब ईवीएम से असल आंकड़े बाहर आएंगे। फिलहाल बंगाल की गलियों में सन्नाटा है, लेकिन यह सन्नाटा किसी बड़े राजनीतिक तूफान की आहट भी हो सकता है। क्या 4 मई को बंगाल में फिर से 'मां-माटी-मानुष' का नारा गूंजेगा या 'सोनार बांग्ला' का संकल्प हकीकत बनेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

Tags:    

Similar News