Anti Dumping Duty: एंटी-डंपिंग ड्यूटी, वैश्विक व्यापार में संतुलन स्थापित करने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण

Anti-dumping Duty: एंटी-डंपिंग ड्यूटी एक प्रकार का संरक्षणवादी कर होता है, जो किसी देश की सरकार उन विदेशी वस्तुओं पर लगाती है, जिनकी कीमत घरेलू बाजार की तुलना में बहुत कम होती है।;

Written By :  Akshita Pidiha
Update:2025-04-05 15:10 IST

Anti Dumping Duty (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

Anti Dumping Duty: आज के वैश्विक युग में जब देशों के बीच व्यापार की सीमाएं धुंधली हो चुकी हैं, तब प्रतिस्पर्धा का स्तर भी अत्यधिक बढ़ चुका है। ऐसे में जब कोई देश या कंपनी जानबूझकर किसी उत्पाद को अपनी घरेलू कीमत से भी कम कीमत पर दूसरे देश में बेचता है, तो इसे ‘डंपिंग’ कहा जाता है। इससे स्थानीय उद्योगों को नुकसान होता है। इस अनुचित व्यापारिक व्यवहार से बचने और अपने देश के उद्योगों को संरक्षण देने के लिए सरकारें ‘एंटी-डंपिंग ड्यूटी’ नामक कर लगाती हैं।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी क्या है (Kya Hai Anti Dumping Duty In Hindi)?

एंटी-डंपिंग ड्यूटी एक प्रकार का संरक्षणवादी कर (Protectionist Tariff) होता है, जो किसी देश की सरकार उन विदेशी वस्तुओं पर लगाती है, जिनकी कीमत घरेलू बाजार की तुलना में बहुत कम होती है। इसका उद्देश्य उन विदेशी उत्पादों को घरेलू बाजार में सस्ती कीमतों पर बिकने से रोकना होता है, जिससे स्थानीय उद्योगों और कामगारों की सुरक्षा हो सके।

डंपिंग उस स्थिति को कहा जाता है जब किसी देश की कंपनी या निर्माता अपने उत्पादों को घरेलू बाजार की तुलना में दूसरे देश के बाजार में अत्यधिक कम कीमत पर निर्यात करता है। यह कीमत कभी-कभी उत्पादन लागत से भी कम होती है। यह एक अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) माना जाता है, जिससे आयात करने वाले देश की घरेलू कंपनियों को नुकसान पहुँच सकता है।

इस स्थिति से निपटने के लिए, आयात करने वाला देश एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-Dumping Duty) लगाता है। यह एक प्रकार का संरक्षणवादी शुल्क (Protectionist Tariff) है, जिसका उद्देश्य घरेलू उद्योग को डंपिंग से उत्पन्न असंतुलन से बचाना है।

डंपिंग की प्रक्रिया को समझना

डंपिंग का मतलब होता है जब कोई विदेशी कंपनी अपने उत्पादों को किसी दूसरे देश में इतनी कम कीमत पर बेचती है कि वह उत्पाद की निर्माण लागत से भी नीचे हो। इसके पीछे मंशा यह होती है कि वह स्थानीय उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा से बाहर कर दे और बाद में जब प्रतियोगिता समाप्त हो जाए, तब कीमतें बढ़ाकर मुनाफा कमाया जाए।

उदाहरण: यदि चीन की कोई कंपनी अपने देश में स्टील 100 रुपए किलो में बेचती है लेकिन भारत में वही स्टील 60 रुपए में बेचती है, तो यह डंपिंग कहलाएगी।

विश्व व्यापार संगठन (WTO) की भूमिका

WTO ने एंटी-डंपिंग उपायों को वैध माना है, बशर्ते कि इनका उपयोग निष्पक्षता से हो और घरेलू उद्योगों को हुए वास्तविक नुकसान के आधार पर किया जाए। इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार में संतुलन बनाए रखना है।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी से जुड़े WTO प्रावधान (WTO Provisions Related To Anti-dumping Duty)

वैधता अवधि: एंटी-डंपिंग ड्यूटी अधिकतम 5 वर्षों के लिए वैध होती है। यदि इसे पहले रद्द न किया जाए, तो यह निर्धारित अवधि तक प्रभावी रहती है।

सनसेट रिव्यू (Sunset Review): यह एक समीक्षा प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से ड्यूटी की वैधता को पाँच वर्ष और बढ़ाया जा सकता है।इसमें यह आकलन किया जाता है कि डंपिंग और उससे जुड़ी क्षति की स्थिति अब भी बनी हुई है या नहीं।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का उद्देश्य (Purpose Of Imposing Anti-dumping Duty)


घरेलू उद्योग की रक्षा

एंटी-डंपिंग ड्यूटी का प्रमुख उद्देश्य देश के अपने उद्योगों और निर्माताओं को सस्ती विदेशी वस्तुओं से हो रहे नुकसान से बचाना है।

रोज़गार की सुरक्षा

जब स्थानीय उद्योग बंद होते हैं, तो बेरोजगारी बढ़ती है। एंटी-डंपिंग ड्यूटी इन उद्योगों को बचाकर रोज़गार की रक्षा करती है।

स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखना

एंटी-डंपिंग ड्यूटी बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा को रोकती है, जिससे केवल गुणवत्ता और उचित मूल्य वाले उत्पाद ही टिक पाते हैं।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की प्रक्रिया

भारत में यह प्रक्रिया डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज़ (DGTR) द्वारा संचालित की जाती है। इसमें निम्नलिखित चरण होते हैं:

शिकायत दर्ज

जब कोई घरेलू निर्माता या उत्पादक समूह यह महसूस करता है कि किसी उत्पाद की डंपिंग की जा रही है, तो वह DGTR में शिकायत दर्ज कराता है।

प्राथमिक जांच

DGTR यह जांच करता है कि शिकायत पर्याप्त है या नहीं।

डंपिंग का निर्धारण

संबंधित विदेशी कंपनियों से कीमत, निर्माण लागत और घरेलू बिक्री की जानकारी ली जाती है।

घरेलू उद्योग को हुए नुकसान का विश्लेषण

यदि यह सिद्ध हो जाए कि घरेलू उद्योग को वाकई नुकसान हुआ है, तो एंटी-डंपिंग ड्यूटी की सिफारिश की जाती है।

सरकार द्वारा निर्णय

वाणिज्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय की अनुमति के बाद ड्यूटी लागू होती है।

भारत में एंटी-डंपिंग ड्यूटी से जुड़े कुछ उदाहरण


चीन से आयातित स्टील पर शुल्क

2015 में भारत ने चीन से आयातित सस्ते स्टील पर 500% तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई क्योंकि इससे भारतीय स्टील उद्योग को भारी नुकसान हो रहा था।

सोलर पैनल

चीन और मलेशिया से सस्ते सोलर पैनल आने पर भारत ने 25% तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई।

फाइबर, टायर, केमिकल्स

कई बार टायर, सिंथेटिक फाइबर और केमिकल्स पर डंपिंग के आरोप लगने पर भी ड्यूटी लगाई गई है।

घरेलू उत्पादकों को राहत

उन्हें सस्ते और गैर-जिम्मेदार विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा मिलती है।

रोज़गार बचाना

उद्योगों के टिके रहने से श्रमिकों के रोजगार सुरक्षित रहते हैं।

राजस्व में वृद्धि

डंपिंग उत्पादों पर शुल्क लगाकर सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होता है।

भारत में एंटी-डंपिंग से संबंधित कानून

भारत में एंटी-डंपिंग ड्यूटी का प्रावधान कस्टम्स टैरिफ एक्ट, 1975 की धारा 9A में किया गया है। इसमें WTO के एंटी-डंपिंग समझौते के अनुरूप नियम बनाए गए हैं।

प्रमुख संस्थान:

DGTR (Directorate General of Trade Remedies): जांच एजेंसी

CBIC (Central Board of Indirect Taxes and Customs): ड्यूटी वसूली करने वाली संस्था

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय: समग्र निगरानी

वर्तमान स्थिति और चुनौतियां

हाल के वर्षों में एंटी-डंपिंग ड्यूटी भारत में काफी सक्रिय रूप से लागू की गई है। लेकिन इस प्रणाली के सामने निम्नलिखित चुनौतियां हैं-

प्रक्रिया में देरी

जांच पूरी होने में महीनों लगते हैं, तब तक नुकसान हो चुका होता है।

डेटा संग्रह की कठिनाई

विदेशी कंपनियों से सही डेटा प्राप्त करना कठिन होता है।

WTO में विवाद (Dispute in WTO)

कई बार भारत पर अन्य देश WTO में शिकायत करते हैं कि वह अनुचित ड्यूटी लगा रहा है।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी का उद्देश्य (Purpose of Anti-Dumping Duty)

घरेलू उद्योगों की रक्षा करना जो सस्ती आयातित वस्तुओं के कारण बाजार में नुकसान उठा सकते हैं।

समान प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना ताकि कोई देश अन्य देशों के बाजार में अनुचित तरीके से अपनी पकड़ न बना सके।

रोजगार की रक्षा करना और देश के आर्थिक संतुलन को बनाए रखना।

यह सुनिश्चित करना कि आयातक देश की अर्थव्यवस्था पर बाहरी देशों की नीतियों का अनुचित प्रभाव न पड़े।

भारत में एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू करने की प्रक्रिया

भारत में एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की ज़िम्मेदारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत व्यापार उपचार महानिदेशालय (Directorate General of Trade Remedies - DGTR) पर होती है। यह संस्थान निम्नलिखित कार्य करता है:-

घरेलू उद्योगों की ओर से प्राप्त शिकायतों पर डंपिंग की जांच करना।

सब्सिडी और हानिकारक आयातों की समीक्षा करना।

उपयुक्त एंटी-डंपिंग, काउंटरवेलिंग और सेफगार्ड ड्यूटी लगाने की सिफारिश करना।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की प्रक्रिया

शिकायत दर्ज – किसी घरेलू उत्पादक या उद्योग संघ द्वारा DGTR को शिकायत दी जाती है।

प्रारंभिक जाँच – DGTR यह देखता है कि क्या डंपिंग और उससे क्षति का प्रथम दृष्टया प्रमाण है।

सूचना प्रकाशन – सभी संबंधित पक्षों को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।

निरंतर जाँच – मूल्य निर्धारण, निर्यात, आयात और उत्पादन लागत से संबंधित आंकड़ों की समीक्षा की जाती है।

प्रारंभिक शुल्क – यदि प्रथम दृष्टया डंपिंग प्रमाणित हो जाती है तो प्रारंभिक एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई जाती है।

अंतिम निष्कर्ष – विस्तृत जांच के पश्चात अंतिम निर्णय लिया जाता है और उपयुक्त शुल्क अधिरोपित किया जाता है।

प्रमुख उदाहरण: स्टील डंपिंग केस (2015, अमेरिका)

जून 2015 में अमेरिका की कुछ प्रमुख स्टील कंपनियों – जैसे कि यूनाइटेड स्टेट्स स्टील कॉर्प, न्यूकौर कॉर्प, स्टील डायनामिक्स आदि – ने अमेरिकी वाणिज्य विभाग और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आयोग (ITC) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि चीन जैसे देशों से स्टील डंपिंग की जा रही है।जाँच के बाद 2016 में अमेरिका ने चीन से आयातित स्टील पर 522% तक की एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगा दी।इसके जवाब में चीन ने WTO में शिकायत दर्ज की।यह मामला अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधों में तनाव का प्रमुख कारण बना।

भारत में हालिया एंटी-डंपिंग मामलों के उदाहरण

चीन से आयातित सौर उपकरण – घरेलू सौर उद्योग की सुरक्षा के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई गई।

मलेशिया और वियतनाम से आयातित स्टील उत्पाद – भारी मात्रा में कम कीमत पर स्टील आयात के कारण घरेलू उद्योग को नुकसान पहुँच रहा था।

इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और केमिकल्स – चीन और दक्षिण कोरिया से आयात पर जांच और शुल्क की सिफारिश की गई।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी एक महत्वपूर्ण आर्थिक उपकरण है, जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादकों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाना और निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करना है। हालाँकि, इसके प्रभावों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है ताकि यह घरेलू उद्योगों की रक्षा करते हुए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार न डाले और वैश्विक व्यापार सहयोग बना रहे।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी आज के वैश्विक व्यापार में एक महत्वपूर्ण औजार बन चुका है। यह देश के घरेलू उद्योगों को सुरक्षा प्रदान करता है और अनैतिक व्यापारिक व्यवहार पर रोक लगाता है। हालांकि इसका संतुलित और न्यायसंगत उपयोग ही इसके प्रभाव को सकारात्मक बना सकता है। सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इसका उपयोग घरेलू उद्योगों की रक्षा के साथ-साथ उपभोक्ताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संतुलन के लिए भी हो।

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