Aerogel Solid: फूल की कली से भी हल्का है ये, पृथ्वी का सबसे हल्का सॉलिड, आइए जानते हैं इसके बारे में

Aerogel Kya Hai: एयरोजल एक अनोखा पदार्थ है, जो अपनी अत्यधिक झरझरता और कम घनत्व के लिए जाना जाता है। इसे जेल (Gel) से बनाया जाता है, जिसमें तरल भाग को हटाकर गैस से बदल दिया जाता है।;

Written By :  Akshita Pidiha
Update:2025-03-29 15:45 IST

Aerogel Solid (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

Lightest Solid on Earth: एयरोजल (Aerogel) एक अद्वितीय पदार्थ है, जिसे ‘जमे हुए धुएं’ (Frozen Smoke) के नाम से भी जाना जाता है। यह सबसे हल्का ठोस (Solid) है, जिसका घनत्व सामान्य रूप से हवा के घनत्व का मात्र 2.75 गुना होता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें 99.8% वायु और केवल 0.2% ठोस पदार्थ होता है। यह एक झरझरा (Porous) पदार्थ है, जिसका अधिकांश हिस्सा हवा से भरा होता है। एयरोजल में अत्यधिक कम घनत्व और उच्च तापीय रोधकता होती है। यह न केवल हल्का होता है बल्कि अत्यधिक मजबूत भी होता है।

एयरोजल एक अनोखा पदार्थ है, जो अपनी अत्यधिक झरझरता (Porosity) और कम घनत्व (Low Density) के लिए जाना जाता है। इसे जेल (Gel) से बनाया जाता है, जिसमें तरल भाग को हटाकर गैस से बदल दिया जाता है। सिलिका एयरोजल सबसे आम प्रकार है, लेकिन इसे कार्बन, धातु ऑक्साइड और हाल ही में पॉलीमर से भी बनाया जाने लगा है।

एयरोजल का इतिहास और विकास (Aerogel Wikipedia In Hindi)

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

एयरोजल का आविष्कार 1931 में अमेरिकी रसायनज्ञ सैम्युअल स्टीफन कीस्टलर (Samuel Stephen Kistler) ने किया था। कीस्टलर का लक्ष्य एक ऐसी तकनीक विकसित करना था, जिसमें जेल के तरल भाग को हटाकर उसमें गैस भरी जा सके, बिना संरचना को सिकुड़ने या ढहने के। उन्होंने पहली बार सिलिका जेल (Silica gel) का प्रयोग करके तरल पदार्थ को हटाया और गैस के साथ प्रतिस्थापित किया। इसका परिणाम था – एक हल्का, ठोस पदार्थ, जिसे उन्होंने ‘एयरोजल’ नाम दिया।

प्रारंभिक प्रयोग: शुरुआती एयरोजल मुख्य रूप से सिलिका, एल्युमिना और कार्बन से बने थे। बाद में वैज्ञानिकों ने पॉलीमर और धातु ऑक्साइड के एयरोजल भी विकसित किए। 1980 के दशक में नासा (NASA) ने एयरोजल का उपयोग अंतरिक्ष मिशनों में शुरू किया, जिससे इसकी लोकप्रियता बढ़ी।

एयरोजल के निर्माण की प्रक्रिया (Process For Making Aerogels)

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

एयरोजल बनाने की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:-

चरण 1: जेल निर्माण (Gel Formation)

सबसे पहले, एक सॉल-गेल प्रक्रिया (Sol-Gel Process) द्वारा जेल तैयार किया जाता है। इसमें एक प्रीकरसर (precursor) (जैसे सिलिका, कार्बन या धातु ऑक्साइड) को एक विलायक (solvent) के साथ मिलाया जाता है। यह एक जेल जैसा पदार्थ बनाता है, जिसमें ठोस कण एक ढांचे में जुड़े होते हैं और बाकी हिस्सा तरल होता है।

चरण 2: सुपरक्रिटिकल ड्राइंग (Supercritical Drying)

जेल को सुपरक्रिटिकल ड्राइंग प्रक्रिया द्वारा सुखाया जाता है। इसमें जेल के तरल हिस्से को धीरे-धीरे सुपरक्रिटिकल द्रव (Supercritical Fluid) में बदल दिया जाता है। सुपरक्रिटिकल अवस्था में द्रव और गैस की सतह का तनाव समाप्त हो जाता है, जिससे सूखने पर संरचना नहीं सिकुड़ती। अंततः, तरल को गैस से विस्थापित कर दिया जाता है, जिससे एक अत्यंत हल्की ठोस संरचना बचती है – यही एयरोजल है।

एयरोजल की संरचना और विशेषताएँ (Structure and Properties of Aerogel)

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एयरोजल में एक सूक्ष्म नैनो-संरचना (Nano-architecture) होती है, जो आपस में जुड़ी रहती है। इसे बनाने के लिए सुपरक्रिटिकल ड्राइंग प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है, जिससे जेल की संरचना बिना ढहे सूख जाती है। इसका परिणाम एक ऐसा पदार्थ होता है, जिसका सतही क्षेत्रफल 1000 वर्ग मीटर/ग्राम या उससे अधिक हो सकता है।

थर्मल इंसुलेशन में उपयोगी

एयरोजल में कम तापीय चालकता (low thermal conductivity) होती है, जिससे यह एक बेहतरीन इंसुलेटर बनता है।इसकी झरझर संरचना गर्मी को प्रवाहित होने से रोकती है, जिससे कन्वेक्शन और कंडक्शन कम होता है।एयरोजल का घनत्व इतना कम होता है कि यह 99.8% हवा से भरा होता है।

प्रयोग और संभावनाएँ

स्पेसक्राफ्ट और इंसुलेशन गियर: एयरोजल का उपयोग अंतरिक्ष यान और परफॉर्मेंस गियर में इंसुलेशन के लिए किया जाता है।

तेल रिसाव सफाई: एयरोजल की झरझर संरचना इसे तेल अवशोषण के लिए आदर्श बनाती है।

कैटलिसिस और पर्यावरण शुद्धिकरण: इसकी उच्च सतही क्षेत्रफल और झरझरता इसे रासायनिक कैटेलिसिस और पर्यावरणीय सफाई जैसे कार्यों के लिए उपयुक्त बनाती है।

नैनो संरचना और ऊर्जा भंडारण: एयरोजल की अनोखी संरचना इसे ऊर्जा भंडारण और परिवर्तित करने में मददगार बनाती है।

नई तकनीक में प्रगति

हाल ही में, वैज्ञानिकों ने पॉलीमर-प्रबलित एयरोजल बनाए हैं, जो पारंपरिक एयरोजल की तुलना में अधिक मजबूत होते हैं। इससे एयरोजल की भंगुरता (fragility) की समस्या कम हो जाती है, जिससे यह अधिक टिकाऊ हो जाता है। एयरोजल एक अद्वितीय पदार्थ है, जिसकी हल्की संरचना, उच्च झरझरता और बेहतरीन इंसुलेशन क्षमता इसे विज्ञान, प्रौद्योगिकी और औद्योगिक क्षेत्रों में क्रांतिकारी बना रही है।

एयरोजल के प्रकार (Types Of Aerogel)

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

एयरोजल को उनके निर्माण और संरचना के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में बांटा जाता है:-

सिलिका एयरोजल (Silica Aerogel)- सबसे सामान्य प्रकार, जिसमें सिलिका (SiO₂) का उपयोग होता है। यह हल्का, तापीय रोधक और पारदर्शी होता है। इसका उपयोग अंतरिक्ष यान के थर्मल इंसुलेशन में किया जाता है।

कार्बन एयरोजल (Carbon Aerogel)- कार्बन एयरोजल अत्यधिक झरझरा और हल्का होता है। इसका उपयोग बैटरियों और सुपरकैपेसिटर्स में ऊर्जा भंडारण के लिए किया जाता है।

पॉलिमर एयरोजल (Polymer Aerogel)- यह पॉलीमर बेस पर आधारित होता है।यह अधिक लचीला और टिकाऊ होता है।इसका उपयोग ऊर्जा संरक्षण और इन्सुलेशन में किया जाता है।

धातु ऑक्साइड एयरोजल (Metal Oxide Aerogel)- इसमें धातु ऑक्साइड का उपयोग किया जाता है, जैसे टाइटेनियम ऑक्साइड (TiO₂) या एल्युमिनियम ऑक्साइड।यह कैटेलिस्ट के रूप में उपयोग किया जाता है।

एयरोजल के भौतिक और रासायनिक गुण (Aerogel Physical and Chemical Properties)

एयरोजल में अद्वितीय भौतिक और रासायनिक गुण होते हैं:-

घनत्व: 0.0011 से 0.5 ग्राम/सेमी³ (हवा की तुलना में थोड़ा अधिक)

छिद्रता (Porosity): 90-99.8%

थर्मल कंडक्टिविटी: 0.01-0.03 W/m·K (अत्यधिक थर्मल इंसुलेटर)

पारदर्शिता: सिलिका एयरोजल 90% तक प्रकाश को पार करता है।

संपीड़न शक्ति: अत्यधिक हल्का होने के बावजूद मजबूत

एयरोजल का घनत्व – सबसे हल्का सॉलिड

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

एयरोजल को पृथ्वी का सबसे हल्का ठोस माना जाता है। इसका घनत्व मात्र 0.0011 ग्राम/सेमी³ तक हो सकता है। इसका अर्थ है कि यह हवा की तुलना में केवल 2.75 गुना भारी होता है। 2012 में, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने ग्रेफीन एयरोजल बनाया, जिसका घनत्व मात्र 0.16 मिलीग्राम/सेमी³ था – यह अब तक का सबसे हल्का ठोस है।

एयरोजल के अनुप्रयोग (Applications)

एयरोजल का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में होता है:-

अंतरिक्ष अन्वेषण: नासा इसे थर्मल इंसुलेशन के रूप में उपयोग करता है।

तेल रिसाव सफाई: कार्बन एयरोजल तेल को अवशोषित कर सकते हैं।

निर्माण क्षेत्र: घरों और इमारतों के लिए ऊर्जा कुशल इंसुलेशन।

स्वास्थ्य क्षेत्र: औषधियों को नियंत्रित तरीके से छोड़ने में मदद।

रक्षा क्षेत्र: बुलेटप्रूफ जैकेट में उपयोग।

एयरोजल एक क्रांतिकारी पदार्थ है, जो अपने हल्केपन, मजबूत संरचना और उत्कृष्ट इंसुलेशन गुणों के कारण भविष्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और औद्योगिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

हाइब्रिड एयरोजल: हड्डी के इलाज में क्रांतिकारी खोज

ईरान, जर्मनी और ऑस्ट्रिया की तीन रिसर्च लैब्स ने मिलकर एक अनोखा प्रयोग किया। उन्होंने एक मजबूत प्रोटीन को हल्के और झरझरे एयरोजल के साथ मिलाने का फैसला किया।

मजबूत प्रोटीन: इसका नाम सिल्क फाइब्रॉइन है, जो रेशम के कीड़ों के कोकून में पाया जाता है और इसे महंगे कपड़े बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।यह एयरोजल को मजबूती और कठोरता देता है, जिससे इसे हड्डी बढ़ाने के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है।

चरण I: हाइब्रिड एयरोजल बनाना

वैज्ञानिकों ने एयरोजल बनाने के लिए सिलिका, सिल्क फाइब्रॉइन, एसिड और डिटर्जेंट को मिलाया। इसे एक घंटे तक गर्म किया गया और तैयार हुआ सिलिका-सिल्क फाइब्रॉइन हाइब्रिड एयरोजल।

लेकिन, वैज्ञानिकों को इसे परफेक्ट बनाने में कई मुश्किलें आईं। पहला एयरोजल बहुत हाइड्रोफोबिक (पानी को दूर करने वाला) था, जो शरीर में काम नहीं करता, क्योंकि शरीर 70% पानी से बना है। दूसरा एयरोजल बहुत सख्त और सूखा था। तीसरा एयरोजल शरीर में कभी न घुलने वाला था, यानी यह डिग्रेड नहीं हो पाता। आखिरकार, चौथे प्रयास में उन्हें सफलता मिली। उन्होंने ऐसा एयरोजल बनाया, जो: हाइड्रोफिलिक (पानी को आकर्षित करने वाला) था। ज्यादा कठोर नहीं था। शरीर में घुलने वाला (बायोडिग्रेडेबल) था।

चरण II: मानव कोशिकाओं पर टेस्ट

वैज्ञानिकों ने यह जांचने के लिए कि हाइब्रिड एयरोजल मानव कोशिकाओं के लिए सुरक्षित है या नहीं, उसे कई परीक्षणों से गुजारा।परिणाम यह रहा कि यह पूरी तरह सुरक्षित था।जब एयरोजल को हड्डी की कोशिकाओं के साथ रखा गया, तो कोशिकाएँ उसकी सतह पर तेजी से बढ़ीं और हड्डी बनाने वाले प्रोटीन और खनिज जमा करने लगीं।

चरण III: चूहों पर परीक्षण

अब वैज्ञानिकों ने चूहों पर इसका परीक्षण किया। उन्होंने दो समूह बनाए और चूहों की हड्डी में चोट की। एक समूह में उन्होंने हाइब्रिड एयरोजल लगाया और दूसरे में नहीं। 25 दिन बाद, एयरोजल वाले चूहों की हड्डी तेजी से और बेहतर तरीके से ठीक हो रही थी। एयरोजल ने न सिर्फ हड्डी बढ़ाई, बल्कि सामान्य से तेज गति से बढ़ाई।

यह हाइब्रिड एयरोजल हड्डी के इलाज में नई चिकित्सा तकनीक का मार्ग प्रशस्त कर सकता है:-

-हड्डी का फ्रैक्चर अब हफ्तों की बजाय कुछ दिनों में ठीक हो सकता है।

-कैंसर मरीजों की कट चुकी हड्डी को जल्दी से फिर से उगाया जा सकता है।

-भविष्य में, डॉक्टर मरीजों से कह सकेंगे कि, "आपकी हड्डी काटनी पड़ेगी, लेकिन इसे जल्दी उगाया जा सकता है, कोई चिंता की बात नहीं।

-कम वजन और तापीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य होगा।

-सुपरकैपेसिटर में सुधार के लिए कार्बन एयरोजल का उपयोग।

-सौर पैनल और बैटरियों में एप्लिकेशन।

-यह खोज हड्डी के इलाज में एक बड़ा बदलाव ला सकती है.।

-एक 1 ग्राम एयरोजल में एक फुटबॉल मैदान के बराबर सतह क्षेत्र हो सकता है। यह माइनस 200°C से 1200°C तक काम कर सकता है। एक इंच मोटी एयरोजल शीट आग की लपटों को रोक सकती है।

-अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने मंगल ग्रह के रोवरों के लिए थर्मल इन्सुलेशन के लिए और अंतरिक्ष सूट को इन्सुलेट करने के लिए भी एरोजेल का उपयोग किया गया है।

-एरोजेल डाई मैटेरियल (Dry Material) की तरह भी काम करता है। इसका मतलब यह है कि ये नमी को सोख सकते हैं। इसलिए लंबे समय तक एयरजेल का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अपनी स्किन पर शुष्क धब्बे न हों, इसके लिए दस्ताने पहनने चाहिए।

-एरोजेल को धीरे से दबाने पर आमतौर पर उस पर निशान नहीं पड़ता है। अत्यधिक तेजी से दबाने पर यह कांच की तरह बिखर जाएगा। इसके इस गुण को भुरभुरापन कहा जाता है। एरोजेल का उपयोग पानी को कीटाणुरहित करने और बैक्टीरिया को मारने के लिए किया जा सकता है।

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