Lok Sabha Election 2024: पूर्वांचल में BSP का नये मुस्लिम चेहरों पर दांव, किसे पहुंचाएंगे नुकसान

Lok Sabha Election 2024: पूर्वांचल की नौ सीटों में अब तक बसपा ने 6 सीटों प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है। बसपा ने बस्ती मंडल की तीनों सीटों पर प्रत्याशियों के चेहरे से पर्दा हटा दिया है।

Update: 2024-04-21 03:42 GMT

ख्वाजा शमशुद्दीन, जावेद सिमनानी, मोहम्मद आलम और मोहम्मद मौसमे आलम (Pic: Newstrack)

Lok Sabha Election 2024: गोरखपुर-बस्ती मंडल की नौ लोकसभा सीटों में से 6 पर बसपा ने अपने पत्तों को खोल दिया है। 6 में से 4 मुस्लिम प्रत्याशियों को उतारकर बसपा ने सपा-कांग्रेस गठबंधन की बेचैनी को बढ़ा दिया है। इन मुस्लिम चेहरों की ताकत को लेकर इंडिया गठबंधन आंकलन कर रहा है। बसपा ने मुस्लिम के साथ ही एक ब्राह्मण चेहरों पर भी दांव लगाया है। जिससे भाजपा खेमे में हलचल दिख रही है। राजनीतिक दलों में मंथन चल रहा है कि नये मुस्लिम चेहरे कितने ताकतवर हैं।

नौ सीटों में अब तक बसपा ने 6 सीटों प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है। बसपा ने बस्ती मंडल की तीनों सीटों पर प्रत्याशियों के चेहरे से पर्दा हटा दिया है। बसपा ने संतकबीरनगर से मोहम्मद आलम और डुमरियागंज से ख्वाजा शमसुद्दीन को उम्मीदवार बनाया है। जबकि बस्ती से दयाशंकर मिश्र प्रत्याशी हैं। बसपा ने गोरखपुर मंडल की छह सीटों में से तीन पर प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिये हैं। गोरखपुर से जावेद सिमनानी, महराजगंज से मोहम्मद मौसमी आलम को प्रत्याशी बनाया है। जबकि बांसगांव सुरक्षित सीट से पूर्व आयकर आयुक्त डॉ. रामसमुझ पार्टी के प्रत्याशी हैं।

पार्टी ने देवरिया, सलेमपुर और कुशीनगर में अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। छह सीटों पर प्रत्याशियों के नाम से साफ है कि बसपा मुस्लिम और दलित वोटों के भरोसे हैं। प्रत्याशियों के नाम के साथ इनके जीत-हार की उम्मीदों के साथ इस बात पर चर्चा होने लगी है कि ये भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन में से किसे अधिक नुकसान पहुंचाने की स्थिति में है। गोरखपुर में जावेद सिमनानी नये चेहरे हैं। वे सपा को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं इसे लेकर सपा प्रत्याशी काजल निषाद के खेमे में मंथन है। वहीं बांसगांव सुरक्षित सीट पर डॉ.रामसमुझ पुराने बसपाई हैं। वे भाजपा में भी रह चुके हैं। चुनाव के समय अचानक इनके सक्रिय होने को लेकर विरोधी सवाल उठा रहे हैं।

बस्ती मंडल की तीन सीटों पर मुस्लिम निर्णायक

लोकसभा चुनाव में अकेले दम पर ताल ठोक रही बहुजन समाज पार्टी ज्यादातर सीटों पर दलित और मुस्लिम समीकरण बैठाने की कोशिश शुरू कर दी है। वहीं अभी तक के आंकड़ों के हिसाब से देखें तो बसपा के लिए संतकबीरनगर और बस्ती लोकसभा सीट ज्यादा मुफीद रही है। संतकबीरनगर से 2009 और इसके पहले उपचुनाव में भीष्म शंकर तिवारी ने जीत हासिल की थी। वर्ष 2014 में भी बसपा के भीष्म शंकर दूसरे नंबर पर थे। हालांकि इस बार भीष्म शंकर सपा में हैं और डुमरियागंज से मैदान में हैं। बसपा में ख्वाजा शमसुद्दीन कितने मुस्लिम वोटों को अपने हक में कर सकेंगे इसे लेकर सपा खेमे में मंथन है।

सीट पर करीब 32 फीसदी वोटर मुस्लिम हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ईद में घर आए ज्यादेतर मुस्लिम अभी घर पर ही है। ये वोट देकर ही जाएंगे। वहीं महानगरों में काम करने वाले मुस्लिम वोटरों को बसों से डुमरियागंज बुलाने की कोशिशें हो रही हैं। बस्ती में भी बसपा दो बार जीत हासिल कर चुकी है। इस बार बसपा ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारकर भाजपा खेमे में खलबली मचाई है। भाजपा आंकलन कर रही है कि उसके पूर्व जिलाध्यक्ष दयाशंकर मिश्र कितने ब्राह्मण वोटों में सेंधमारी कर सकते हैं।

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