Loksabha Election 2024: पीलीभीत लोकसभा सीट पर क्यों जितिन प्रसाद के आने से दिलचस्प होगा मुकाबला?

Loksabha Election 2024 Pilibhit Seats Details: भाजपा ने इस बार वरुण गांधी का टिकट काटकर जितिन प्रसाद पर विश्वास जताया है। बसपा ने अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू को उम्मीदवार बनाया है। जबकि सपा ने भगवत सरन गंगवार को उम्मीदवार के रूप में उतारा है।

Written By :  Sandip Kumar Mishra
Written By :  Yogesh Mishra
Update: 2024-04-11 06:30 GMT

Loksabha Election 2024: यूपी का पीलीभीत जिला उत्तराखंड के पहाड़ों से सटा हुआ है। यह जिला प्रदेश में अपने गन्ना उत्पादन और बांसुरी निर्माण के लिए भी जाना जाता है। पीलीभीत लोकसभा सीट राजनीतिक रूप से देशभर में अपनी अलग पहचान रखती है। इस सीट पर 30 सालों से भाजपा काबिज है। इस जिले को गांधी परिवार का गढ़ भी कहा जाता है। लेकिन इस परिवार का कांग्रेस से नाता नहीं है। अमेठी-रायबरेली को सोनिया और राहुल के तो परिवार के दूसरा हिस्सा मेनका और वरुण गांधी के नाम से पीलीभीत को जाना जाता है। पीलीभीत में कभी मेनका गांधी तो कभी वरुण गांधी सांसद रहे हैं। वर्तमान में भाजपा से सांसद वरुण गांधी ही हैं। लेकिन भाजपा ने इस बार वरुण गांधी का टिकट काटकर जितिन प्रसाद पर विश्वास जताया है। बसपा ने अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू को उम्मीदवार बनाया है। जबकि इंडिया गठबंधन की ओर से यह सीट सपा के खाते में है। सपा ने भगवत सरन गंगवार को उम्मीदवार के रूप में उतारा है। पीलीभीत लोकसभा सीट पर कुल 10 उम्मीदवार चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। सभी को चुनाव चिह्न भी आवंटित कर दिए गए हैं।


लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा ने मेनका गांधी की जगह उनके बेटे वरुण गांधी को मैदान में उतारा था। वरुण गांधी ने सपा बसपा के संयुक्त उम्मीदवार रहे हेमराज वर्मा को 2,55,627 वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में वरुण गांधी को 7,04,549 और हेमराज वर्मा को 4,48,922 वोट मिले थे। वहीं लोकसभा चुनाव 2014 में मेनका गांधी ने सपा के बुद्धसेन वर्मा को 3,07,052 वोटों से हराकर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में मेनका गांधी को 5,46,934 और बुद्धसेन वर्मा को 2,39,882 वोट मिले थे। जबकि बसपा के अनीस अहमद खान (फूल बाबू) को 1,96,294 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस के संजय कपूर को 29,169 वोट मिले थे। पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र का निर्वाचन संख्या 26 है। इसमें वर्तमान में 5 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इस लोकसभा क्षेत्र का गठन पीलीभीत जिले के पीलीभीत सदर, बरखेड़ा, पूरनपुर व बीसलपुर और बरेली जिले के बहेड़ी विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर किया गया है। फिलहाल इन 5 सीटों में से 4 पर भाजपा और 1 पर सपा का कब्जा है। यह लोकसभा क्षेत्र 1952 में अस्तित्व में आया था। यहां कुल 17,61,207 मतदाता हैं। जिनमें से 8,12,360 पुरुष और 9,48,771 महिला मतदाता हैं। बता दें कि पीलीभीत लोकसभा सीट पर 2019 में हुए चुनाव में कुल 11,87,225 यानी 67.41 प्रतिशत मतदान हुआ था।

यहां जानें भाजपा के उम्मीदवार जितिन प्रसाद के बारे में

योगी सरकार में लोक निर्माण विभाग मंत्री रहे जितिन प्रसाद शाहजहांपुर के रहने वाले हैं। जितिन प्रसाद ने 2021 में कांग्रेस का साथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। पूर्व में केंद्र सरकार में कई विभागों में मंत्री रह चुके है। जितिन प्रसाद ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम और दिल्ली स्थित अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान से एमबीए किया है। वह कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव भी रहे हैं। बता दें कि 2004 के चुनाव में शाहजहांपुर लोकसभा सीट से सांसद बने थे। फिर 2009 में धौरहरा से सांसद बने और कांग्रेस सरकार में मंत्री भी बने। 2014 व 2019 में हार का सामना किया। यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में तिलहर सीट से हार गए। अब वर्ष 2024 में पीलीभीत से लोकसभा चुनाव में भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं।

इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार भगवत सरन गंगवार का सियासी इतिहास

इंडिया गठबंधन के तहत सपा के टिकट पर मैदान में उतरे भगवत सरन गंगवार ने इंटर तक की पढ़ाई की है। नवाबगंज के गांव अहमदाबाद के रहने वाले भगवत सरन 1991 और 1993 में भाजपा के टिकट पर बरेली के नवाबगंज सीट से विधायक बने थे। 1996 के चुनाव में हारने के बाद 2002 में सपा में शामिल हो गए। सपा के टिकट पर वर्ष 2002, 2007, 2012 में लगातार तीन बार विधायक बने। सपा सरकार में भगवत सरन को स्वतंत्र प्रभार का मंत्री भी बनाया गया। 2009 में बरेली सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।

बसपा उम्मीदवार अनीस अहमद खान उर्फ फूलबाबू को विरासत में मिली है राजनीति


बीसलपुर के मोहल्ला हबीबुल्ला खां जैनुबी के रहने वाले बसपा उम्मीदवार अनीस अहमद खान उर्फ फूल बाबू को राजनीति विरासत में मिली है। स्नातक तक शिक्षा ग्रहण करने वाले फूल बाबू ने राजनीति की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की थी। 1989 में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली। हालांकि 1990 में बसपा में शामिल हो गए। 1991, 1993 में बसपा से टिकट मिला। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। 1996 में पहली बार बसपा के टिकट पर विधायक बने। इसके बाद वर्ष 2002 और 2007 में भी चुनाव जीते और विधायक बने। इस दौरान उनको तीन बार मंत्री बनने का मौका भी मिला। इस बार बसपा के टिकट से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं।

पीलीभीत लोकसभा सीट का राजनीतिक इतिहास

देश में हुए पहले चुनाव में पीलीभीत और नैनीताल लोकसभा सीट एक होती थी। पीलीभीत सीट पर पहली बार 1951 में हुए चुनाव में कांग्रेस के मुकुंद लाल अग्रवाल ने जीत दर्ज की थी। लेकिन अगले चुनाव में यह सीट बरेली के मोहन स्वरूप के हाथ में चली गई। मोहन स्वरूप ने 1957 से 1971 तक लगातार जीत के हैट्रिक लगाए। लेकिन इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए चुनाव में पूरनपुर के शेरपुर कलां के नवाब शमशुल हसन खान ने जीत दर्ज की। इसके बाद कांग्रेस के टिकट पर बरेली के हरीश कुमार गंगवार और भानुप्रताप सिंह सांसद बने। वरुण गांधी के पिता संजय गांधी के निधन के बाद उनकी मां मेनका गांधी ने राजनीति में कदम रखा तो उन्होंने अपने पति की सीट अमेठी चुनी थी। अमेठी में 1984 में हुए उपचुनाव में संजय के बड़े भाई राजीव गांधी कांग्रेस के टिकट पर और मेनका निर्दल मैदान में थे। इस उपचुनाव में जो कई दिग्गजों के साथ हुआ, वह मेनका के साथ भी हुआ। वह चुनाव हार गईं। इसके बाद उन्होंने राजनीति के लिए अपना नया ठिकाना पीलीभीत को बनाया। वह 1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के टिकट पर यहां से अपनी किस्मत आजमाने आईं। इस सीट से पहली बार चुनाव लड़कर सांसद बनीं। लेकिन 1991 में वह इस सीट से भाजपा के उम्मीदवार परशुराम गंगवार से चुनाव हार गईं। इसके बाद मेनका गांधी ने 1996 में जनता दल से चुनाव लड़कर हिसाब बराबर कर लिया और पीलीभीत लोकसभा सीट को अपनी कर्मभूमि बनाकर उन्होंने अपने मजबूत दुर्ग के तौर पर स्थापित किया।

वरुण गांधी लोकसभा चुनाव 2009 में पहली बार बने सांसद


पीलीभीत सीट से 1998 और 1999 में मेनका गांधी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की। अटल बिहार वाजपेयी सरकार में मंत्री रहीं और 2004 में मेनका ने भाजपा उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की। लेकिन वरुण गांधी ने सियासत में आने का फैसला किया तो उन्होंने पीलीभीत सीट बेटे के लिए छोड़ दी। लोकसभा चुनाव 2009 में वरुण गांधी पीलीभीत से सांसद बने तो मेनका गांधी आंवला सीट से सांसद चुनी गईं। लेकिन लोकसभा 2014 में भाजपा ने वरुण को सुल्तानपुर से तो मेनका गांधी को पीलीभीत से चुनावी मैदान में उतारा। मां-बेटे दोनों ही जीतने में सफल रहे। लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 में फिर से दोनों की सीट बदल दी गई। इस बार भाजपा ने वरुण गांधी के पीलीभीत से तो मेनका गांधी को सुल्तानपुर से प्रत्याशी बनाया था। इस बार भी दोनों जीत दर्ज करने में सफल रहे। लेकिन भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2024 में वरुण गांधी को पीलीभीत से टिकट नहीं दिया जबकि उनकी मां मेनका गांधी को सुल्तानपुर से उम्मीदवार बनाया है।

पीलीभीत लोकसभा में जातीय समीकरण

गन्ना और धान के फसल की उपज के लिए मशहूर इस जिले में लगभग 25 फीसदी मुस्लिम आबादी है। पिछले चुनावों पर नजर डालें तो मुस्लिम बहुल्य इलाकों में साइकिल को ज्यादा अहमियत दी जाती है, हालांकि कुछ मुस्लिम मतदाता ऐसे भी हैं जो दबे मुंह भाजपा को पसंद करते हैं। वहीं अनुसूचित जाति की करीब 17 प्रतिशत आबादी है। पीलीभीत में होने वाले लोकसभा चुनाव में मुस्लिम और दलित वोटर ही प्रत्याशियों का खेल बनाते और बिगाड़ते हैं। इसके अलावा राजपूत और किसान भी खासी तादाद में हैं जो भाजपा के मतदाता कहे जाते हैं।

पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र से अब तक चुने गए सांसद

  • कांग्रेस से मुकुंद लाल अग्रवाल 1952 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए।
  • प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से मोहन स्वरूप 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए।
  • कांग्रेस से मोहन स्वरूप 1971 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए।
  • जनता पार्टी से मोहम्मद शम्सुल हसन खान 1977 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए।
  • कांग्रेस से हरीश कुमार गंगवार 1980 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए।
  • कांग्रेस से भानु प्रताप सिंह 1984 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए।
  • जनता पार्टी से मेनका गांधी 1977 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुनी गईं।
  • भाजपा से परशुराम गंगवार 1991 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए।
  • निर्दल से मेनका गांधी 1996, 1998 और 1999 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुनी गईं।
  • भाजपा से मेनका गांधी 2004 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुनी गईं।
  • भाजपा से वरुण गांधी 2009 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए।
  • भाजपा से मेनका गांधी 2014 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुनी गईं।
  • भाजपा से वरुण गांधी 2019 में लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए।
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