TDP Regional Party: एक क्षेत्रीय पार्टी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) का जन्म राजनीति में कैसे हुआ, जानिए क्या थी इसकी शर्तें
TDP Regional Party Political History: आइये जानते हैं कि तेलुगु देशम पार्टी (TDP) का राजनैतिक सफर कैसे शुरू हुआ और क्या थीं इससे जुड़ी शर्तें, विस्तार से जानते हैं।;
TDP Regional Party (Image Credit-Social Media)
TDP Regional Party Political History: 1982 का वर्ष भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज हुआ, जब पूरे देश में कांग्रेस (I) का प्रभुत्व था। यह आम धारणा थी कि न तो कांग्रेस का कोई मजबूत विकल्प हो सकता है और न ही इंदिरा गांधी की प्रभावशाली छवि और व्यापक लोकप्रियता को चुनौती दी जा सकती है। ऐसे समय में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) का गठन हुआ, जिसने जल्द ही यह साबित कर दिया कि लोकतांत्रिक राजनीति किसी एक पार्टी का एकाधिकार नहीं है।
TDP का उभार एक ऐतिहासिक घटना थी क्योंकि यह किसी विशेष क्षेत्रीय मुद्दे के कारण नहीं, बल्कि एक भावनात्मक बदलाव के रूप में सामने आई थी। इसने पूरे देश को स्पष्ट संकेत दिया कि इंदिरा गांधी जैसी शक्तिशाली नेता को भी चुनौती दी जा सकती है। TDP का क्षेत्रीय वर्चस्व न केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित रहा, बल्कि इसने राष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल मचा दी। इस घटना ने भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय पार्टियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले और समाज, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक आधारों पर क्षेत्रीय राजनीति को नई दिशा दी।
तेलुगु देशम पार्टी (TDP) भारत की एक प्रमुख क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी है, जिसका मुख्य आधार आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में है। यह पार्टी 29 मार्च,1982 को अभिनेता से नेता बने एन.टी. रामाराव (Nandamuri Taraka Rama Rao) द्वारा स्थापित की गई थी।TDP ने अपने गठन के कुछ वर्षों में ही आंध्र प्रदेश की राजनीति में मजबूत पकड़ बना ली थी।पार्टी ने न केवल राज्य की राजनीति को प्रभावित किया, बल्कि केंद्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।TDP को मुख्य रूप से तेलुगु गौरव, स्वाभिमान, क्षेत्रीय अस्मिता और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए जाना जाता है।
तेलुगु देशम पार्टी का गठन, कांग्रेस शासन के खिलाफ जनाक्रोश
1980 के दशक में आंध्र प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस का एकछत्र राज था।उस समय कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार, किसानों की उपेक्षा और तेलुगु भाषा एवं संस्कृति को उपेक्षित करने के आरोप लग रहे थे।आंध्र प्रदेश के लोगों में यह भावना थी कि केंद्र सरकार और कांग्रेस पार्टी, क्षेत्रीय अस्मिता को दबा रही है।राज्य की जनता को लगा कि उनकी क्षेत्रीय पहचान को महत्व नहीं दिया जा रहा।एन.टी. रामाराव, जो उस समय तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार थे, जनता के इस आक्रोश को भांप चुके थे।
एन.टी. रामाराव का राजनीतिक प्रवेश
एन.टी. रामाराव, जिन्हें लोग ‘एनटीआर’ के नाम से जानते हैं, उस समय आंध्र प्रदेश के सबसे लोकप्रिय फिल्म अभिनेता थे।उनके द्वारा निभाए गए पौराणिक और ऐतिहासिक किरदारों ने उन्हें जनता के बीच एक आदर्श व्यक्ति बना दिया था।1982 में उन्होंने राजनीति में प्रवेश करते हुए तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की स्थापना की।
पार्टी का मुख्य उद्देश्य था:तेलुगु लोगों की संस्कृति, भाषा और अस्मिता की रक्षा।कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार को खत्म करना।किसानों और गरीबों के अधिकारों की रक्षा करना।
तेलुगु गौरव और स्वाभिमान का मुद्दा
TDP का मुख्य नारा था – ‘तेलुगु गौरव’ (Pride of Telugu people)।पार्टी ने तेलुगु भाषी लोगों की क्षेत्रीय पहचान को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।NTR ने जनता के बीच ‘स्वाभिमान’ ( Self-respect) का मुद्दा उठाकर लोगों को एकजुट किया।TDP का गठन तेलुगु लोगों की अस्मिता को सशक्त बनाने के लिए किया गया था।
TDP का राजनीतिक सफर और प्रमुख उपलब्धियाँ
TDP ने 1983 के विधानसभा चुनावों में ही शानदार प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस को हराकर सत्ता पर कब्जा कर लिया।एन.टी. रामाराव ने मुख्यमंत्री पद संभाला।यह पहली बार था जब कांग्रेस को राज्य में हार का सामना करना पड़ा।TDP को राज्य की जनता का व्यापक समर्थन मिला, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि क्षेत्रीय अस्मिता का मुद्दा लोगों के दिलों में गहराई तक बस गया था।
1984: किसान और गरीबों के लिए योजनाएँ
- TDP सरकार ने किसानों, गरीबों और महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएँ शुरू कीं:
- रायथू रुण माफ़ी योजना – किसानों का कर्ज माफ किया गया।
सब्सिडी वाला चावल – गरीब परिवारों को सस्ते दाम पर चावल उपलब्ध करवाया गया।
महिला सशक्तिकरण – महिलाओं के लिए विशेष ऋण योजनाएँ और रोजगार कार्यक्रम शुरू किए गए।
1984: लोकसभा चुनाव में प्रभाव
1984 में जब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में सहानुभूति लहर में कांग्रेस को भारी जीत मिली थी, तब भी आंध्र प्रदेश में TDP ने मजबूत प्रदर्शन किया।TDP केंद्र में एक मजबूत विपक्षी दल के रूप में उभरी।यह कांग्रेस के खिलाफ सबसे मजबूत क्षेत्रीय पार्टी बन गई थी।
TDP का पतन और वापसी
1989 में हुए विधानसभा चुनावों में TDP को हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस सत्ता में लौट आई।कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद TDP के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।हालांकि, जनता में फिर से कांग्रेस के खिलाफ असंतोष बढ़ने लगा।
1994: TDP ने फिर से सत्ता में वापसी की।इस बार TDP ने कांग्रेस सरकार की विफलताओं को मुद्दा बनाया।
NTR ने किसानों, गरीबों और महिलाओं को केंद्र में रखते हुए चुनाव लड़ा और भारी जीत दर्ज की।
1995: NTR का पतन और चंद्रबाबू नायडू का उदय
1995 में NTR की पार्टी में बगावत हो गई।उनके दामाद चंद्रबाबू नायडू ने NTR के खिलाफ बगावत कर पार्टी पर कब्जा कर लिया।NTR को मुख्यमंत्री पद से हटाकर चंद्रबाबू नायडू ने सत्ता संभाली।यह घटना तेलुगु देशम पार्टी के इतिहास में एक बड़ा मोड़ थी।
TDP का प्रभाव और केंद्र की राजनीति में भूमिका
NDA का हिस्सा बनना (1999-2004)
1999 में TDP ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनकर केंद्र में भूमिका निभाई।TDP के समर्थन से अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को स्थिरता मिली।चंद्रबाबू नायडू की लोकप्रियता बढ़ी।
2004 में हार- 2004 में TDP को आंध्र प्रदेश में हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस सत्ता में आई।इसके बाद पार्टी का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा।
2014 में तेलंगाना का गठन और TDP का प्रभाव
2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद तेलंगाना का गठन हुआ।इस विभाजन से TDP को बड़ा झटका लगा।
तेलंगाना में TDP का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो गया।हालांकि, आंध्र प्रदेश में TDP अभी भी मजबूत बनी रही।
वर्तमान स्थिति (2025 तक)
2019 विधानसभा चुनाव में TDP को बड़ी हार का सामना करना पड़ा.वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के नेता वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी मुख्यमंत्री बने।TDP धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। लेकिन चंद्रबाबू नायडू अभी भी पार्टी को पुनर्जीवित करने में प्रयासरत हैं।2024 के लोकसभा चुनावों में TDP ने BJP और जनसेना के साथ गठबंधन किया और केंद्र में NDA का समर्थन किया।
टीडीपी के सत्ता में आने के बाद आंध्र प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। राजनीति में युवा, शिक्षित और प्रोफेशनल चेहरों को महत्वपूर्ण भूमिका मिलने लगी, जिससे न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में एक नई ताज़गी और बदलाव की लहर महसूस की गई। खास बात यह थी कि 1982 में बनी यह पार्टी सत्ता में आने के साथ ही गठबंधन राजनीति में संतुलन साधने की नई रणनीतियों को भी ईजाद करने में सफल रही।
एनटी रामाराव (एनटीआर) के करिश्मे ने ऐसा असर डाला कि आंध्र प्रदेश के पिछड़े वर्गों के लोग कांग्रेस का साथ छोड़कर टीडीपी से जुड़ गए। इसका परिणाम यह हुआ कि 1983 के विधानसभा चुनाव में इतिहास रच दिया गया। 1978 में कांग्रेस को पिछड़े वर्ग के तीन चौथाई वोट मिले थे, लेकिन 1983 में यह आंकड़ा 68% घट गया।
TDP के उदय के साथ ही आंध्र प्रदेश की राजनीति में ‘तेलुगु आत्मसम्मान’ और ‘तेलुगु अपमान’ जैसे नारे गूंजने लगे, जो क्षेत्रीय अस्मिता का प्रतीक बन गए। टीडीपी की सत्ता में मजबूती ने राजनीति के सहकारी संघीय ढांचे को झकझोर कर रख दिया और क्षेत्रीय पार्टियों को राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने का आत्मविश्वास दिया।
तेलुगु देशम पार्टी ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।पार्टी ने तेलुगु अस्मिता, किसानों के अधिकार और क्षेत्रीय गौरव को मजबूत किया।वर्तमान में पार्टी को YSRCP से कड़ी चुनौती मिल रही है, लेकिन TDP अभी भी आंध्र प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बनी हुई है।चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में पार्टी को भविष्य में फिर से मजबूत करने के प्रयास जारी हैं।
तेलुगु देशम पार्टी ने अपने 40 साल के इतिहास में आंध्र प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। NTR के नेतृत्व में इसने कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती दी और जनता के बीच अपनी पहचान बनाई। हालांकि, वर्तमान समय में पार्टी कई चुनौतियों का सामना कर रही है और अपने पुराने गौरव को वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है।