Bengal में 'दीदी की हार' के बाद Akhilesh Yadav ने बदली रणनीति, I-PAC से डील की खत्म

Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बड़ा फैसला लेते हुए चुनावी रणनीति बनाने वाली कंपनी I-PAC के साथ अपनी डील रद्द कर दी है।

Update:2026-05-06 12:49 IST

Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे विपक्षी दलों के INDI Alliance के लिए बड़ा झटका साबित हुए हैं। इन परिणामों का असर अब अन्य राज्यों की राजनीति पर भी दिखने लगा है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बड़ा फैसला लेते हुए चुनावी रणनीति बनाने वाली कंपनी I-PAC के साथ डील रद्द कर दी है। यह कदम उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बेहद अहम माना जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में TMC की हार के बाद बदला फैसला 

जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव ने पहले 2027 के चुनावों के लिए I-PAC को चुनाव प्रबंधन और रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल लिया। उल्लेखनीय है कि बंगाल चुनाव में TMC की रणनीति और प्रबंधन I-PAC ही देख रही थी, बावजूद इसके पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा और ममता बनर्जी भी चुनाव हार गईं। इसके अलावा I-PAC पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई की खबरों ने भी इस निर्णय को प्रभावित किया।

बंगाल-असम के चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी गठबंधन में हलचल तेज 

बंगाल और असम के चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी गठबंधन में हलचल तेज हो गई है। अब उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव को लेकर सपा प्रमुख पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। अखिलेश यादव जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार दौरे कर रहे हैं। इसी क्रम में वह शाहजहांपुर का दौरा करने जा रहे हैं, जहां वे पार्टी के स्थानीय नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक रणनीति तैयार करने पर चर्चा होगी। शाहजहांपुर जिला सपा के लिए खास चुनौती बना हुआ है, क्योंकि यहां की सभी 6 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है और पिछली बार सपा को एक भी सीट नहीं मिली थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव अब अपने पारंपरिक “MY (मुस्लिम-यादव)” समीकरण को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। शाहजहांपुर में मुस्लिम आबादी 17 प्रतिशत से अधिक है, जबकि शहर क्षेत्र में यह आंकड़ा 44 प्रतिशत तक पहुंचता है। ऐसे में सपा इस सामाजिक समीकरण के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति बना रही है। बंगाल चुनाव के नतीजों ने यूपी की राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले समय में इसके और प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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