Gorakhpur News: नीले ड्रम कारोबारियों की ‘मुस्कान’ गायब, मेरठ की घटना के बाद फंस गई पूंजी
Gorakhpur News: ड्रम बाजार के कारोबार में गिरावट आई तो नीले ड्रम से भी लोगों ने दूरी बना ली है। कोई ऐसा ड्रम लेने पहुंच रहा तो चर्चा शुरू हो जाती है।;
नीले ड्रम कारोबारियों की ‘मुस्कान’ गायब (photo: social media )
Gorakhpur News: प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या करने वाली मुस्कान की करतूत का खौफ गोरखपुर में भी दिख रहा है। मेरठ में प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या कर नीले ड्रम में शव छिपाने की दिल दहलाने वाली घटना का असर यह है कि गोरखपुर में नीले ड्रम की बिक्री कम हो गई है। दांतों तले अंगुली दबाने वाला यह कृत्य सोशल मीडिया संग आम आदमी के दिल-दिमाग में भी बस चुका है।
घटना के बाद ड्रम बाजार के कारोबार में गिरावट आई तो नीले ड्रम से भी लोगों ने दूरी बना ली है। कोई ऐसा ड्रम लेने पहुंच रहा तो चर्चा शुरू हो जाती है। 100 ड्रम रोज बेचने वाले इस बाजार में खरीदारी का ग्राफ आधे पर पहुंच गया है। कारोबारियों के सामने व्यापार बचाने का संकट खड़ा हो गया है। हाबर्ट बंधा के पास ड्रम बाजार के दुकानदारों ने बताया कि मेरठ कांड ने दहशत फैला दी है। कारोबार में गिरावट आने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खरीदारों से बातों-बातों में पूछना पड़ रहा है कि ड्रम खरीद क्यों रहे हैं। इसका इस्तेमाल किस काम के लिए करेंगे। हालांकि अधिकांश ग्राहक नाराजगी भी जताते हैं। मेरठ की घटना के बाद अनहोनी का डर लगने लगा है। महिला खरीदारों में भी कमी आई है। छह से आठ के बदले अब सिर्फ एक या दो महिलाएं ही ड्रम खरीदने आ रही हैं। साईधाम नगर निवासी दिनेश त्रिपाठी को मकान में टाइल्स लगवाना है। वह पिछले दिनों ड्रम खरीदने गए तो हर तरफ नीला ड्रम ही मिल रहा था। वह बताते हैं कि नीला ड्रम 700 रुपये में बिक रहा है। वहीं काला ड्रम 1000 रुपये में मिला। नीले के खौफ में काला ड्रम खरीदा। कारोबारी जितेन्द्र जायसवाल कहते हैं कि ज्यादेतर केमिकल नीले ड्रम में आता है। नीलामी में 400 से 500 रुपये में खरीदते हैं। जिसकी 600 से 700 रुपये में बिक्री हो जाती है। अब इसके खरीदार आधे रह गए हैं।
रील्स और मीम्स की चर्चा
दुकानदार महेश कुशवाहा कहते हैं कि मेरठ हत्याकांड के बाद शव छिपाने का यह अनूठा तरीका सामने आया है। सोशल मीडिया पर तरह-तरह की रील्स और मीम्स बनने से दिनभर बाजार में इसकी ही चर्चा होती रहती है। यही वजह है कि खरीदारी में काफी अंतर आया है। बरगदवा में प्लास्टिक के कारोबारी धर्मदेव कहते हैं कि मेरठ की घटना के बाद अगर कोई नीला ड्रम खरीदने आ जाता है तो उसके साथ हंसी-ठिठोली भी हो जाती है। इसलिए कई तो ड्रम खुद ले जाने के बदले भिजवा देने की बात कहते हैं। इसके एवज में अतिरिक्त पैसा देने को भी तैयार हैं।