अंसल API के खिलाफ फिर हुई शिकायत, 'न रजिस्ट्री दी... न ही कब्जा', सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज हुईं 3 और FIR
Lucknow News: पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि तय किए गए समय तक अंसल कम्पनी की ओर से न तो रजिस्ट्री की गई और न ही कब्जा दिया गया।;
Lucknow News: लखनऊ में अंसल कम्पनी के खिलाफ लगातार शिकायतों के सहारे दर्ज हुए मुकदमों का अंबार लगता जा रहा है। ऐसे में अंसल कम्पनी से जुड़े लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लगातार सामने आ रहे धोखाधड़ी और ठगी के मामलों के बीच अंसल API के खिलाफ लखनऊ में 3 और धोखाधडी से जुड़े मामले सामने आए हैं, जिन्हें लेकर एक बार फिर FIR दर्ज की गई है। इन मामलों में पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि तय किए गए समय तक अंसल कम्पनी की ओर से न तो रजिस्ट्री की गई और न ही कब्जा दिया गया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज हुईं तीनों FIR
आपको बता दें कि अंसल के खिलाफ 3 पीड़ितों से मिली शिकायतों की FIR लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में डेज की गई हैं। ये मुकदमे फर्रुखाबाद के कमालगंज आजाद नगर निवासी अमित गुप्ता की ओर से, सुशांत गोल्फ सिटी के सेक्टर-6 निवासी राजेश कुमार वर्मा की ओर से और रायबरेली स्थित आईटीआई दूरभाष कॉलोनी निवासी उर्मिला यादव की ओर से कराए गए हैं।
फ्लैट के लिए 2010 में दिए 6.55 लाख रुपए, अभी तक अपार्टमेंट ही बनकर नहीं हुआ तैयार
पहली FIR दर्ज कराने वाले फर्रुखाबाद निवासी अमित गुप्ता ने आरोप लगाते हुए बताया कि साल 2010 में अंसल कम्पनी के निदेशक सुशील अंसल और प्रणव अंसल से फ्लैट खरीदने के लिए मुलाकात हुई थी। जिसके बाद पैराडाइज डायमंड में ब्रोकर वरुण प्रॉपर्टीज के जरिये से फ्लैट अपने व अपनी पत्नी शालिनी के नाम बुक किया गया। फ्लैट बुकिंग के लिए उस दौरान पीड़ित की ओर से 6.55 लाख रुपए दिए गए थे। रकम लेकर साल 2014 यानी 4 साल में कब्जा देने की बात कही गई थी। लेकिन अभी तक फ्लैट मिलना तो दूर की बात है, अपार्टमेंट का निर्माण ही नहीं हुआ है।
दुकान के लिए दिए 5 लाख रुपये, न रजिस्ट्री हुई न मिला कब्जा
सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र के रहने वाले दूसरे पीड़ित राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि साल 2015 के जून महीने में अंसल API से जेनिथ टॉवर की पहली मंजिल पर 403 स्क्वायर फीट की एक दुकान बुक कराई थी, इसके एवज में पीड़ित की ओर से 5 लाख रुपये दिए गए थे। लंबे समय बाद तक न तो दुकान की रजिस्ट्री हई और न ही कब्जा दिया गया। दुकान के विषय में जानकारी लेने पर टालमटोल किया जाता। रायबरेली की रहने वाली पीड़िता उर्मिला यादव ने बताया कि उन्होंने साल 2016 के अगस्त महीने में 6 लाख रुपए जमा करके अंसल से रिसेल में एक प्लॉट बुक कराया था लेकिन अभी तक उस प्लॉट पर कब्जा नहीं मिला।