Sonbhadra News: निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का प्रदर्शन, दमनात्मक कार्रवाई पर सवाल
Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने दमनात्मक कार्रवाई और सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए।
Sonbhadra News(Photo-Social Media)
Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध और कर्मचारियों पर कथित दमनात्मक कार्रवाइयों को लेकर गुरुवार को जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। यह प्रदर्शन आगरा स्थित दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय पर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में बिजली कर्मियों ने भाग लेकर सरकार और प्रबंधन की नीतियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई।
संघर्ष समिति के बैनर तले हुआ बड़ा प्रदर्शन
यह विरोध प्रदर्शन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आयोजित किया गया। सभा में शामिल कर्मचारियों ने प्रबंधन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर और महेंद्र राय ने कहा कि ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों के साथ लगातार अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार दिए गए आश्वासनों को अब तक लागू नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है।
2023 के आंदोलन और वादों का मुद्दा उठा
सभा के दौरान वक्ताओं ने वर्ष 2023 के आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने संघर्ष समिति के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में आंदोलन से जुड़े सभी दंडात्मक मामलों को समाप्त करने का भरोसा दिया था। इसके तहत संविदा कर्मचारियों की बहाली, एफआईआर और मुकदमों की वापसी जैसे कई वादे किए गए थे। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी अधिकांश वादे जमीन पर लागू नहीं हो सके हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ गया है।
निजीकरण के फैसले से बढ़ा विरोध
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि नवंबर 2024 में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के फैसले के बाद से आंदोलन और तेज हो गया है। कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से बिजली पंचायत, महापंचायत, रैली, क्रमिक अनशन और विरोध सभाओं के माध्यम से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है। इसके बावजूद आरोप है कि कर्मचारियों पर दबाव बनाया जा रहा है और कई मामलों में दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
बिजली व्यवस्था पर असर की चेतावनी
वक्ताओं ने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद बिजली कर्मचारी पूरी निष्ठा के साथ उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति देने में जुटे हैं। लेकिन यदि कर्मचारियों का उत्पीड़न जारी रहा तो इसका सीधा असर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।
आंदोलन जारी रखने का संकल्प
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने साफ कहा कि जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता और कर्मचारियों पर की जा रही दमनात्मक कार्रवाइयों को समाप्त नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सभा के अंत में कर्मचारियों ने एकजुट होकर संघर्ष को और तेज करने का संकल्प लिया और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।