अखिलेश के PDA की काट तैयार! योगी सरकार में शामिल होंगे 16 नए चेहरे, इन 3 पुराने दिग्गजों की भी होगी विदाई
चुनावी साल में भाजपा उत्तर प्रदेश में बड़े बदलाव की तैयारी में है। बंगाल चुनाव नतीजों के बाद योगी सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल संभव है। नए चेहरों, जातीय संतुलन और राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट विस्तार पर मंथन तेज हो गया है।
यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी नई उड़ान (photo : social media )
चुनावी साल में भाजपा भले थोड़ा देर से सक्रिय हुई हो, लेकिन अब बड़े बदलाव की तैयारी में नजर आ रही है। संगठनात्मक फेरबदल से पहले मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के दो-तीन दिन बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नई टीम का गठन हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल के लिए करीब 16 नामों पर विचार किया गया है, जिनमें योगी सरकार 1.0 के तीन पुराने चेहरे भी शामिल हैं।
अप्रैल के दौरान दिल्ली और लखनऊ में कई अहम बैठकें हुईं। राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने मार्च में लखनऊ में रुककर मंत्रियों के कामकाज का फीडबैक लिया था। उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्षों, दोनों उपमुख्यमंत्रियों और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की। वहीं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व बीएल संतोष, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी चर्चा की।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नाम और उनके विभाग लगभग तय कर लिए गए हैं। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। ब्राह्मण समुदाय को साधने के लिए दो से तीन नेताओं को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। यदि किसी को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलती, तो उसे संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। पहले कैबिनेट में रह चुके कुछ नेताओं की वापसी भी संभव मानी जा रही है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बदलाव की संभावना जताई जा रही है, जहां दो से तीन नए चेहरों को मौका मिल सकता है। जाट और गुर्जर समुदाय के बीच संतुलन बनाने को लेकर पार्टी में मंथन जारी है एक को क्षेत्रीय संगठन में जिम्मेदारी और दूसरे को केंद्र में भूमिका देने की चर्चा है।
अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट के तौर पर मंत्रिमंडल में नए दलित और ओबीसी चेहरों को शामिल करने की रणनीति भी बनाई जा रही है। इसके अलावा, दो महिला मंत्रियों की जगह नए चेहरों को अवसर देने की भी चर्चा है।
पार्टी पदाधिकारियों का मानना है कि इस फेरबदल से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा होगा। वहीं, जिन नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलेगी, उन्हें संगठन में अहम जिम्मेदारियां देकर संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।