ट्रम्प की टैरिफ: लिबरेशन डे धमाका, भारत भी तैयार

US Tarrif: "लिबरेशन डे" के डर से लगभग सभी आर्थिक संकेतक निराशाजनक हैं : शेयर बाजार नीचे हैं, उपभोक्ता भावना चार साल के निचले स्तर पर है, और अर्थशास्त्रियों ने मंदी के वास्तविक जोखिम की चेतावनी दी है।;

Update:2025-04-02 10:36 IST

Donald Trump and PM Modi (photo: social media )

US Tarrif: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल को "लिबरेशन डे" का नाम दिया है क्योंकि इस दिन से अमेरिका में आने वाले सामानों यानी इम्पोर्ट पर भारी ड्यूटी लगा दी जाएगी। जो देश अमेरिकी सामानों पर जितनी ड्यूटी लगाता है, उसी अनुपात में अमेरिका भी इम्पोर्ट ड्यूटी लगाएगा। ट्रम्प के मुताबिक अमेरिका अब बाहरी सामानों और असंतुलित व्यापारिक घाटे से "आज़ाद" हो जाएगा।

लेकिन अमेरिका के इस पारस्परिक टैरिफ के चलते दुनिया का व्यापारिक गणित और ग्लोबल अर्थव्यवस्था में ज़लज़ला आना तय है। अमेरिका के प्रहार से बचने के लिए कई देशों ने अमेरिका के खिलाफ इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का ऐलान किया है।

आर्थिक प्रभाव

"लिबरेशन डे" के डर से लगभग सभी आर्थिक संकेतक निराशाजनक हैं : शेयर बाजार नीचे हैं, उपभोक्ता भावना चार साल के निचले स्तर पर है, और अर्थशास्त्रियों ने मंदी के वास्तविक जोखिम की चेतावनी दी है। इंग्लैंड के एस्टन बिजनेस स्कूल के एक विश्लेषण में पाया गया है कि ट्रम्प के टैरिफ से शुरू होने वाले पूर्ण पैमाने के व्यापार युद्ध से दुनिया को 1.4 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक गतिविधि का नुकसान हो सकता है, अमेरिका में कीमतों में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 1.3 प्रतिशत की कमी आ सकती है।

क्या है भारत की स्थिति

जहां तक भारत की बात है तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत टैरिफ में कटौती करने को तैयार है। यानी जिससे भारत को अमेरिकी टैरिफ में संभावित राहत सकती है। व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने कहा, "मैंने सुना है कि भारत अपने टैरिफ में काफी कमी करने जा रहा है। बहुत से देश अपने टैरिफ में कमी करने जा रहे हैं।"

वैसे, अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील पर बातचीत जारी है। ट्रेड डील पर चार दिन की बातचीत के बाद अमेरिकी वार्ताकार वापस जा चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि आगे की औपचारिक बातचीत में भारत द्वारा अमेरिकी रियायतों के बदले अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ कम की जाएगी।

भारत और अन्य व्यापारिक साझेदारों पर दबाव डालते हुए, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने 29 प्रमुख साझेदार देशों को कवर करने वाली अपनी रिपोर्ट में कई तरह की चिंताएँ जताई हैं। रिपोर्ट में भारत के 17 फीसदी के औसत सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) टैरिफ को किसी भी प्रमुख विश्व अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक बताया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने कई तरह के अमेरिकी सामानों पर टैरिफ लागू किया है, जिसमें वनस्पति तेल (45 प्रतिशत तक); सेब, मक्का और मोटरसाइकिल (50 प्रतिशत); ऑटोमोबाइल और फूल (60 प्रतिशत); प्राकृतिक रबर (70 प्रतिशत); कॉफी, किशमिश और अखरोट (100 प्रतिशत); और मादक पेय (150 प्रतिशत) शामिल हैं। इसके अलावा, अमेरिका ने जीवन रक्षक दवाओं और तैयार दवाओं सहित दवा निर्माण पर भारत द्वारा लगाए गए उच्च बुनियादी सीमा शुल्क पर चिंता जताई है। ट्रम्प सरकार ने विशेष रूप से कहा है कि भारत द्वारा कुछ कृषि उत्पादों पर लगाए गए उच्च शुल्कों ने व्यापार में महत्वपूर्ण बाधाएँ उत्पन्न की हैं। इनमें खासकर पोल्ट्री, आलू, खट्टे फल, बादाम, पेकान, सेब, अंगूर, डिब्बाबंद आड़ू, चॉकलेट, कुकीज़ और जमे हुए फ्रेंच फ्राइज़ आदि का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि "कृषि उत्पादों पर भारत की विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) बाध्य टैरिफ दरें दुनिया में सबसे अधिक हैं, जो औसतन 113.1 प्रतिशत और 300 प्रतिशत तक हैं।

Tags:    

Similar News